ट्रम्प का दावा: ईरान जंग में मिली जीत, 2-3 हफ्ते में बड़ा हमला करेंगे

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ट्रम्प का दावा: ईरान जंग में मिली जीत, 2-3 हफ्ते में बड़ा हमला करेंगे

ट्रम्प का दावा: ईरान जंग में जीत मिली, 2-3 हफ्ते में बड़ा हमला करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका को ईरान जंग में जीत मिली है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका 2-3 हफ्तों में ईरान पर एक बड़ा हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा कि ईरान की मिसाइल-ड्रोन क्षमता और नौसेना खत्म हो गई है, और उसकी सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस सैन्य अभियान का अहम मकसद पूरा होने वाला है।

ईरान को 'पाषाणकाल' में भेजने की चेतावनी और 45 हजार प्रदर्शनकारियों की हत्या का आरोप

ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान को 'स्टोन एज' यानी पाषाणकाल में भेज देगा। हालांकि, उन्होंने यह दावा भी किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर है। ट्रम्प ने जनवरी में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 45,000 लोगों की हत्या का आरोप भी लगाया, जबकि इससे पहले उन्होंने यह आंकड़ा करीब 32,000 बताया था। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।

भाषण में नई बातें नहीं, पुराने दावों को दुहराया

ट्रम्प ने 19 मिनट का भाषण दिया, जिसमें कोई नया ऐलान नहीं था। उन्होंने वही बातें दुहराईं जो पिछले कुछ समय से कहते आ रहे थे। उन्होंने युद्ध की लागत और इसके लंबा खिंचने से चिंतित अमेरिकियों से कहा कि वे इस संघर्ष को सही नजरिए से देखें, इसकी तुलना इराक (8 साल) और वियतनाम (19 साल) जैसे पिछले अमेरिकी युद्धों से की। ट्रम्प ने ईरान से युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मांग की, जबकि एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि उन्हें समझौते की जरूरत नहीं है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट संकट को लेकर कहा कि इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दूसरे देशों को लेनी चाहिए, यह भी एक दिन पहले के उनके बयान से उलट था।

सैन्य लक्ष्यों की प्राप्ति और सहयोगियों की आलोचना

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को जल्द हासिल कर लेगा और आने वाले हफ्तों में हमले और तेज किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल बनाने की क्षमता को नष्ट कर दिया गया है, और 'मिशन खत्म करने' के करीब है, जिसमें 2 से 3 हफ्ते और लग सकते हैं। ट्रम्प ने सहयोगी देशों की आलोचना की, क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की जिम्मेदारी अब उन्हीं देशों को लेनी चाहिए। उन्होंने इजराइल और खाड़ी देशों जैसे सहयोगियों का धन्यवाद किया और उन्हें किसी भी हालत में नुकसान न होने देने का वादा किया।

परमाणु हथियार और पिछली नीतियों पर ट्रम्प

ट्रम्प ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही ईरान को परमाणु हथियार हासिल न करने देने की कसम खाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि उनकी सख्त नीति ने मिडिल ईस्ट और इजराइल को तबाही से बचाया। इस नीति में ईरान के साथ उनके पहले कार्यकाल में 2015 का परमाणु समझौता खत्म करना भी शामिल है। ट्रम्प के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुआ यह समझौता अगर जारी रहता तो ईरान के पास बड़े पैमाने पर परमाणु हथियारों का जखीरा हो जाता। उन्होंने जनवरी में वेनेजुएला में हुए ऑपरेशन की भी तारीफ की, जिसमें निकोलस मादुरो को हटाया गया था।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और होर्मुज स्ट्रेट

नाटो के कई देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया, जिससे ट्रम्प नाराज दिखे। फ्रांस की मंत्री एलिस रूफो ने साफ किया कि नाटो का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना है और होर्मुज में सैन्य कार्रवाई करना उसके दायरे में नहीं आता। ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहा है, जिसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के रास्ते तलाशना है। इसमें भारत भी भाग ले सकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें इस क्षेत्र पर काफी निर्भर करती हैं। इस बीच, ईरान ने बहरीन में अमेरिकी कंपनी अमेजन वेब सर्विस के एक डेटा सेंटर पर हमला किया, जिससे वहां आग लग गई।

Vivek Singh