ट्रम्प का इनकार: ईरानी स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले के सबूत नहीं, 175 मौतें

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ट्रम्प का इनकार: ईरानी स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले के सबूत नहीं, 175 मौतें

ट्रम्प का इनकार: ईरानी स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले के <सबूत नहीं>, <175 मौतें>

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में अमेरिकी मिसाइल के इस्तेमाल से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त हर तरफ मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए शायद कभी यह पता नहीं चल पाएगा कि हमले के लिए जिम्मेदार कौन था।

ट्रम्प ने कहा, “किसी ने कहा कि यह हमारी मिसाइल थी, लेकिन हो सकता है कि वह हमारी मिसाइल न हो। मैंने ऐसा कोई सबूत नहीं देखा, जिससे लगे कि यह हमला हमने किया था।”

हालांकि 10 दिन पहले ही ट्रम्प ने इस घटना को गलती बताया था और कहा था कि स्कूल को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया। मार्च में आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सेना की शुरुआती जांच में हमले के पीछे अमेरिकी फोर्सेस का रोल होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि पेंटागन ने अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

ईरान के मुताबिक, 28 फरवरी को मिनाब के गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में 175 से ज्यादा बच्चों और शिक्षकों की मौत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UNHRC) ने इस हमले को भयावह बताया था।

पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…

1. कच्चा तेल 70 डॉलर से नीचे आया

अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। ब्रेंट क्रूड भी गिरकर 73.50 डॉलर पर पहुंच गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली है।

2. तेल कंपनियों को ट्रम्प की धमकी

ट्रम्प ने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट को तेल कंपनियों की जांच के निर्देश दिए। उनका आरोप है कि कच्चे तेल के दाम घटने के बावजूद कंपनियां ग्राहकों को राहत नहीं दे रहीं।

3. खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए मोदी को न्योता

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है।

4.ट्रम्प ने तेल कंपनियों पर जांच बैठाई

ट्रम्प ने अमेरिकी न्याय विभाग को तेल कंपनियों की जांच के निर्देश दिए। उनका आरोप है कि कच्चे तेल के दाम घटने के बावजूद कंपनियां ग्राहकों को राहत नहीं दे रहीं।

5.ईरान-IAEA में परमाणु जांच पर मतभेद

IAEA का कहना है कि उसे ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच का अधिकार मिलेगा, जबकि ईरान ने कहा है कि किसी भी निरीक्षण पर फैसला अंतिम समझौते और प्रतिबंध हटने के बाद होगा।

ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए किसी विशेष फंड पर खाड़ी देशों (GCC) के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है। बहरीन की राजधानी मनामा में GCC देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या किसी तरह का शुल्क लगाने के प्रस्ताव को भी खाड़ी देशों का समर्थन नहीं है। रुबियो के मुताबिक, GCC का कोई भी सदस्य देश हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के पक्ष में नहीं है।

बैठक के बारे में बात करते हुए रुबियो ने कहा कि हमारी बैठक काफी सकारात्मक और उपयोगी रही। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अच्छी चर्चा हुई।

हॉर्मुज से बिना अनुमति गुजरने वाले जहाजों को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी है। IRGC ने कहा कि जो जहाज तय नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, IRGC ने हॉर्मुज से गुजरने के लिए प्रस्तावित नए समुद्री मार्ग की भी आलोचना की। उसका कहना है कि जहाजों की आवाजाही केवल उसी मार्ग से होनी चाहिए, जिसकी घोषणा ईरान ने की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर यानी करीब 8.3 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त फंडिंग मंजूर करने की मांग की है। इसका बड़ा हिस्सा ईरान युद्ध से जुड़े खर्चों के लिए रखा गया है।

व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह रकम पिछले साल मंजूर किए गए करीब 1 ट्रिलियन डॉलर और अगले वित्तीय वर्ष के लिए मांगे गए 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट से अलग है। सरकार का कहना है कि यह पैसा युद्ध से जुड़े ऑपरेशन, सेना की तैयारी, हथियारों के भंडार को फिर से भरने और सीक्रेट रक्षा कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।

वहीं, संसद में इस मांग का विरोध बढ़ रहा है। मंगलवार को सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ट्रम्प से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने को कहा। इससे पहले ऐसा ही प्रस्ताव लोअर हाउस भी पास कर चुकी है। चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया।

ओमान ने अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का समर्थन किया है। सरकारी समाचार एजेंसी की ओर से X पर जारी बयान में कहा गया कि यह समझौता क्षेत्र में शांति बहाल करने और हॉर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है।

ओमान ने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से किसी तरह का ट्रांजिट शुल्क नहीं लिया जाएगा।

यह बयान ओमान के विदेश मंत्री ने गुरुवार को बहरीन में आयोजित खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान दिया।

संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने गुरुवार को कहा कि हॉर्मुज से 23 जून से अब तक 57 जहाज गुजर चुके हैं। इन जहाजों में 1100 नाविक सवार थे। IMO के आंकड़ों के अनुसार, 23 जून को 13 जहाज, 24 जून को 32 जहाज और 25 जून की सुबह तक 12 जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं।

दरअसल, हॉर्मुज में फंसे करीब 11 हजार नाविकों (सीफेयरर्स) को सुरक्षित निकालने की योजना मंगलवार को शुरू किया गया था। यह अभियान ईरान, ओमान, क्षेत्र के अन्य तटीय देशों, अमेरिका और समुद्री उद्योग के सहयोग से चलाया गया।

इजराइली सैन्य अधिकारियों ने रॉयटर्स की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि इजराइली सेना (IDF) लेबनान के कुछ इलाकों से पीछे हट गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इजराइल सरकार ने अभी सेना को पीछे हटने का कोई आदेश नहीं दिया है।

हालांकि, दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की संभावित वापसी को लेकर इजराइल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत हुई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई समझौता नहीं हुआ है।

बहरीन दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका होर्मुज पर किसी एक देश के दावे को स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ समझौता चाहता है, लेकिन अमेरिका ऐसी शांति का समर्थन करता है, जो लंबे समय तक टिके, वास्तविक हो और अमेरिका या उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा को नुकसान न पहुंचाए

रूबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान के साथ होने वाले किसी भी समझौते में उसके सहयोगी देशों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए। अमेरिका इस समझौते को सफल बनाने के लिए हर संभव कोशिश करेगा।

बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जियानी ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ओमान की तरफ से बनाए गए अस्थायी समुद्री कॉरिडोर का स्वागत किया है।

अल जियानी ने यह बात बहरीन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यात्रा के दौरान हुई खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। ईरान लगातार दावा करता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। लेकिन अमेरिका और इजराइल इस दावे को नहीं मानते। उनका कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है।

2015 का परमाणु समझौता क्या था?

ट्रम्प के फैसले के बाद क्या बदला?

ईरान कितनी दूर पहुंच गया था?

इजराइली सेना ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में चल रहे एक सैन्य अभियान के दौरान उसका एक जवान मारा गया। सेना ने मारे गए सैनिक की पहचान 32 वर्षीय मेजर बासेल सुवैद के रूप में की है।

अमेरिकी सैनिकों और उनके परिवारों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की सेना और पेंटागन ने ईरान के खिलाफ हुए युद्ध में लगी चोटों को कम करके बताया है।

CBS न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एक मामले में एक सैनिक को ऐसा झटका लगा जिसमें उसे कंशन (सिर में चोट), सुनने और देखने की क्षमता में कमी और फेफड़ों को नुकसान हुआ, लेकिन उसकी हालत को “गंभीर नहीं” बताया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस युद्ध में कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई।

हालांकि अमेरिकी सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने किसी भी तरह से सैनिकों की चोटों को कम करके नहीं दिखाया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी सीनेट ने ईरान युद्ध अधिकार प्रस्ताव पर अपना रूख बदल दिया है।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सीनेट ने ईरान पर अपना वोट 50-48 के विरोध से बदलकर 50-47 के समर्थन में कर दिया। रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने अपना रुख बदला। जॉन थ्यून, लिंडसे ग्राहम, बर्नी मोरेनो और सभी का धन्यवाद। यह वोट ईरान को साफ संदेश देता है।"

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन दिनों कुवैत, UAE और बहरीन के दौरे पर हैं। उनका मकसद ईरान के साथ हुए समझौते पर खाड़ी देशों का समर्थन जुटाना और मदद के लिए उनका धन्यवाद करना है।

दौरे के दौरान रुबियो ने 3 अहम बातें कहीं:

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता भेजा है।

अयातुल्ला खामेनेई की 28 फरवरी को इजराइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन जंग की वजह से इसे टाल दिया गया था।

अब इसकी शुरुआत 4 जुलाई से होगी। उनके शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा।

अधिकारियों को उम्मीद है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं।पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिकी रिसर्च संस्था प्यू रिसर्च सेंटर की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध के दौरान पाकिस्तान एकमात्र मुस्लिम-बहुल देश रहा जहां अमेरिका को लेकर लोगों की राय बेहतर हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने से पाकिस्तान में अमेरिका की छवि सुधरी।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तानियों को ट्रम्प पर भरोसा है। सर्वे में 82% पाकिस्तानियों ने कहा कि उन्हें ट्रम्प पर भरोसा नहीं है, जबकि सिर्फ 12% ने उन पर विश्वास जताया।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 76% पाकिस्तानी मानते हैं कि अमेरिका उनके देश के आंतरिक मामलों में दखल देता है। यानी अमेरिका को लेकर सकारात्मक सोच बढ़ी है, लेकिन उसके इरादों और नेतृत्व को लेकर संदेह अब भी कायम है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत 29 या 30 जून को स्विट्जरलैंड में फिर शुरू हो सकती है। यह बातचीत दोनों देशों के बीच हाल में हुए संघर्षविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए हो रही है।

रूबियो ने ईरान को चेतावनी भी दी और कहा कि अमेरिका की ओर से दी गई प्रतिबंधों में राहत अस्थायी है। अगर ईरान ने स्विट्जरलैंड वार्ता में किए गए वादे पूरे नहीं किए तो राष्ट्रपति ट्रम्प के पास प्रतिबंध फिर से लागू करने का विकल्प मौजूद है।

Pushpendra Chaubey