ट्रम्प ने फिर दोहराई ग्रीनलैंड लेने की मांग, गोल्डन डोम और NATO का हवाला

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ट्रम्प ने फिर दोहराई ग्रीनलैंड लेने की मांग, गोल्डन डोम और NATO का हवाला

ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर दावा और गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद एक बार फिर ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की अपनी इच्छा दोहराई। ट्रम्प ने कहा कि गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की भू-स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है और किसी न किसी तरह समाधान निकाला जाएगा।

गोल्डन डोम प्रोजेक्ट और रणनीतिक महत्व

गोल्डन डोम अमेरिका का प्रस्तावित मिसाइल रक्षा प्रोजेक्ट है, जो इजराइल के आयरन डोम सिस्टम से प्रेरित है। इसका उद्देश्य चीन और रूस जैसे देशों से संभावित मिसाइल खतरों से अमेरिका की रक्षा करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 175 अरब डॉलर लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 1200 से अधिक सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है, जिनमें से 400 से 1000 सैटेलाइट्स दुश्मन मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए और लगभग 200 इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स उन मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही नष्ट करने के लिए तैनात की जाएंगी। ट्रम्प ने दावा किया है कि यह सिस्टम दुनिया के किसी भी हिस्से से छोड़ी गई मिसाइलों और अंतरिक्ष से होने वाले हमलों को रोकने में सक्षम होगा। उन्होंने इस प्रोजेक्ट की घोषणा अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के एक सप्ताह बाद की थी और कहा है कि सिस्टम 2029 तक काम करने लगेगा। इसकी कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के वरिष्ठ जनरल माइकल ग्यूटलेन के पास है।

व्हाइट हाउस बैठक और तीन पक्षों की स्थिति

व्हाइट हाउस में हुई बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड शामिल हुए। बैठक में कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ, लेकिन ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी, जिसकी बैठकें आने वाले हफ्तों में होंगी।

ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड ने कहा कि वे अमेरिका के साथ सहयोग और संबंध मजबूत करना चाहती हैं, लेकिन ग्रीनलैंड पर अमेरिकी शासन या गुलामी स्वीकार नहीं होगा। डेनमार्क के विदेश मंत्री रासमुसेन ने स्पष्ट कहा कि ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने का विचार डेनमार्क के हित में नहीं है और इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

ट्रम्प की चेतावनी और NATO की भूमिका पर बयान

ट्रम्प ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया तो रूस या चीन उस पर नियंत्रण की कोशिश कर सकते हैं और वे ऐसा कभी नहीं होने देंगे। उनके अनुसार, NATO को आगे आकर अमेरिका को ग्रीनलैंड अपने हाथ में लेने में मदद करनी चाहिए, जिससे NATO और अधिक मजबूत और प्रभावी हो जाएगा।

सोशल मीडिया के जरिए दबाव और यूरोपीय प्रतिक्रिया

बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें ग्रीनलैंड का झंडा लगे दो स्लेज दिखाए गए हैं। एक रास्ता व्हाइट हाउस और अमेरिकी झंडे की ओर जाता है, जबकि दूसरा अंधेरे और बिजली वाले क्षेत्र की ओर, जहां चीन और रूस के झंडे दिखाए गए हैं। तस्वीर पर कैप्शन था, "ग्रीनलैंड किस तरफ जाओगे?" इस दृश्य के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अमेरिका की ओर झुकने पर शांति और दूसरी ओर जाने पर खतरा हो सकता है।

इसी बीच, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बताया कि डेनमार्क के आग्रह पर स्वीडिश सशस्त्र बलों के कई अधिकारियों को ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास के लिए भेजा गया है। फ्रांस और जर्मनी ने भी ग्रीनलैंड में सैन्यकर्मी भेजने की घोषणा की है। जर्मन विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र की सुरक्षा के लिए डेनमार्क का समर्थन करने के लिए 13 लोगों की टीम भेजी जाएगी। नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने कहा कि नॉर्डिक देश आर्कटिक में NATO सदस्यों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए ग्रीनलैंड में दो सैन्यकर्मी भेजेंगे।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सैन्य स्थिति

ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है और उसकी रक्षा तथा विदेश नीति की प्राथमिक जिम्मेदारी डेनमार्क के पास है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और यहां की आबादी लगभग 57 हजार है। 2009 के बाद ग्रीनलैंड सरकार को तटीय सुरक्षा और कुछ विदेशी मामलों में सीमित अधिकार मिले हैं, लेकिन रक्षा और विदेश नीति के मुख्य निर्णय डेनमार्क के नियंत्रण में हैं।

ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिम में स्थित पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) अमेरिका द्वारा संचालित होता है, जहां करीब 150 से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह बेस मिसाइल चेतावनी प्रणाली, स्पेस मॉनिटरिंग और आर्कटिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा है। डेनमार्क की जॉइंट आर्कटिक कमांड भी ग्रीनलैंड में सक्रिय है, जिसमें लगभग 150 से 200 डेनिश सैन्य और नागरिक कर्मी शामिल हैं। ये निगरानी, खोज और बचाव अभियान तथा संप्रभुता की रक्षा जैसे कार्य करते हैं। इसी के तहत प्रसिद्ध सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल, एक छोटी एलीट यूनिट, कुत्तों की स्लेज के जरिए लंबी गश्त करती है।

डेनमार्क का सुरक्षा आकलन और रूस-चीन पर मतभेद

डेनमार्क ने ट्रम्प के इस दावे को खारिज किया कि चीन और रूस से ग्रीनलैंड को तत्काल बड़ा खतरा है। विदेश मंत्री रासमुसेन ने माना कि आर्कटिक में सुरक्षा स्थिति बदल रही है, लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी खुफिया जानकारी के अनुसार पिछले एक दशक में ग्रीनलैंड के आसपास कोई चीनी युद्धपोत नहीं आया है और चीन तथा रूस से तत्काल खतरा नहीं दिखता।

इसके बावजूद डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने घोषणा की कि वे आर्कटिक रक्षा को मजबूत करने के अपने वादे के तहत सहयोगियों की मदद से ग्रीनलैंड और आसपास के क्षेत्रों में सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि NATO की साझेदारी में इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति का विस्तार शुरू कर दिया गया है।

ग्रीनलैंड की राजनीतिक प्राथमिकता और अमेरिकी बिल

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कोपेनहेगन में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि ग्रीनलैंड को अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़े, तो वह डेनमार्क को चुनेगा। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी संसद में ग्रीनलैंड पर कब्जे से जुड़े बिल के पेश होने पर बहस चल रही है और ट्रम्प ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात कर रहे हैं।

12 जनवरी को अमेरिकी संसद में ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नामक बिल पेश किया गया, जिसका उद्देश्य अमेरिकी सरकार को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने और बाद में उसे अमेरिका का राज्य बनाने के लिए कानूनी अधिकार देना है। अगर यह बिल पारित होता है तो ग्रीनलैंड अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है। नीलसन के बयान पर ट्रम्प ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे उन्हें नहीं जानते और उनकी बात से सहमत नहीं हैं, और यह टिप्पणी ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री के लिए समस्या बन सकती है।

कुल मिलाकर, ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच रणनीतिक, राजनीतिक और सुरक्षा हितों का टकराव उभर कर सामने आया है। जहां ट्रम्प प्रशासन ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम प्रोजेक्ट और व्यापक सुरक्षा रणनीति में केंद्रीय भूमिका में देख रहा है, वहीं डेनमार्क और ग्रीनलैंड अपनी संप्रभुता और मौजूदा व्यवस्थाओं को बरकरार रखने पर जोर दे रहे हैं, भले ही वे NATO और सहयोगियों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हों।

Navjeet Kaur