उज्जैन: महामंडलेश्वर को हनीट्रैप में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश, साध्वी मंदाकिनी व साथी पर FIR

· 1 min read
उज्जैन: महामंडलेश्वर को हनीट्रैप में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश, साध्वी मंदाकिनी व साथी पर FIR

उज्जैन: महामंडलेश्वर को हनीट्रैप में फंसाने की साजिश का पर्दाफाश, साध्वी मंदाकिनी पुरी व साथी पर FIR

उज्जैन के प्रसिद्ध चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज को हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने पूर्व महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी पुरी और उनके साथी घनश्याम पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपियों पर महामंडलेश्वर की छवि खराब करने और उनसे अवैध वसूली का प्रयास करने का आरोप है।

बनारस की महिला को लालच देकर बनाया गया था साजिश का हिस्सा

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने बनारस की एक महिला को 50 हजार रुपए का लालच देकर अपनी टीम में शामिल किया था। उनकी योजना थी कि महिला के जरिए महामंडलेश्वर पर बलात्कार का झूठा आरोप लगवाया जाए, और फिर केस वापस लेने के बदले उन्हें ब्लैकमेल किया जाए। पुलिस की सक्रियता के चलते यह साजिश समय रहते उजागर हो गई।

महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार, रंगपंचमी के दिन दत्त अखाड़ा परिसर में कुछ संदिग्ध लोगों के पकड़े जाने की सूचना मिली थी। महंत आनंदपुरी महाराज ने पकड़े गए लोगों को पुलिस के हवाले किया, जिसमें एक महिला भी शामिल थी। पूछताछ के दौरान महिला ने पुलिस को बताया कि 27 फरवरी को घनश्याम पटेल उससे मिलने बनारस आया था। उसने 50 हजार रुपए का लालच देकर उज्जैन आकर महामंडलेश्वर के खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज कराने को कहा। जब महिला ने मना किया, तो उसे अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी गई। डर के कारण महिला घनश्याम के संपर्क में रही। घनश्याम ने उसके बेटे के मोबाइल पर 2000 रुपए भेजे और उज्जैन आने के लिए टिकट भी बुक कराया।

8 मार्च को रंगपंचमी के दिन घनश्याम पटेल अपने साथियों के साथ दत्त अखाड़ा परिसर पहुंचा था, जहां वह महिला के बयान रिकॉर्ड कर रहा था। इसी दौरान आनंदपुरी महाराज, पंडित लोकेश शर्मा और संजय गोस्वामी ने मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और महिला के बयान व मोबाइल की जांच के बाद साध्वी मंदाकिनी पुरी और घनश्याम पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

घनश्याम पटेल का पलटवार और महामंडलेश्वर का बयान

एफआईआर दर्ज होने के बाद घनश्याम पटेल ने भी महिला के कुछ वीडियो वायरल किए, जिनमें वह महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज पर गंभीर आरोप लगा रही है। पटेल ने सोशल मीडिया पर एक पत्र जारी करते हुए आरोप लगाया कि महिला ने उनके खिलाफ षड्यंत्र पूर्वक फर्जी एफआईआर कराई है, क्योंकि उन्होंने महिला का इंटरव्यू नहीं चलाया और एक लाख रुपए की एक्सटॉर्शन मनी नहीं दी। पटेल ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी महिला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की अपील की।

इस बीच, महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने कहा कि कुछ लोग चार धाम मंदिर पर कब्जा करना चाहते हैं, और इसी वजह से वे साजिश रचकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

साध्वी मंदाकिनी पुरी का आपराधिक रिकॉर्ड और धोखाधड़ी के अन्य मामले

पूछताछ में यह भी पता चला है कि साध्वी मंदाकिनी पुरी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह पहले भी जेल जा चुकी हैं। वर्तमान में उन पर धोखाधड़ी के कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।

महामंडलेश्वर की उपाधि दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी

निरंजनी अखाड़े के महंत सुरेश्वरानंद पुरी ने 6 मई 2024 को चिमनगंज मंडी थाने में मंदाकिनी पुरी उर्फ ममता जोशी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदाकिनी ने उन्हें श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर की उपाधि दिलाने का भरोसा देकर करीब साढ़े सात लाख रुपए ठगे। इसी तरह, 10 मई को जयपुर के महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर ने भी महाकाल थाने में मंदाकिनी पुरी के खिलाफ 8 लाख 90 हजार रुपए की ठगी का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर बनाने का झांसा दिया गया था।

आत्महत्या का प्रयास

उपाधि दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप सामने आने के बाद अखाड़े ने मंदाकिनी पुरी को निष्कासित कर दिया था। इसके बाद 7 मई को उन्होंने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था, और आईसीयू में उनका इलाज चला था।

हर्बल प्रोडक्ट मामले में भी शिकायत

जयपुर के एक व्यापारी ने भी मंदाकिनी पुरी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। व्यापारी ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी से शिकायत की कि मंदाकिनी ने उनकी कंपनी से हर्बल जूस खरीदे, उन पर अपनी फोटो लगाकर 'मां आरोग्यम मंदाकिनी' नाम से स्टॉक तैयार कराया, लेकिन इन सामानों का भुगतान नहीं किया। एक्सपायरी डेट निकलने के बाद पूरा माल कंपनी को वापस भेज दिया, जिससे व्यापारी को लगभग 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ।

मंदाकिनी कैसे बनी महामंडलेश्वर

ममता जोशी उर्फ मंदाकिनी पहले संतों के धार्मिक आयोजनों में रसोई का काम करती थीं। उन्होंने खुद को संन्यासी बताकर अनंतानंद महाराज की मदद से तत्कालीन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज से संपर्क साधा। 2016 में उज्जैन कुंभ के दौरान, उन्होंने खुद को अविवाहित संन्यासी बताकर और मंगलनाथ रोड पर जमीन, रेस्टोरेंट और आश्रम की झूठी जानकारी देकर संतों को अपनी बातों में फंसाया। इसके बाद, कुंभ के दौरान निरंजनी अखाड़े में हुए पट्टाभिषेक कार्यक्रम में मौजूद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

L. N. Bhargava