लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, 10 घंटे की चर्चा निर्धारित
नई दिल्ली: विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 से अधिक सांसदों ने मतदान किया, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे पेश करने की अनुमति दे दी। अब इस प्रस्ताव पर सदन में 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा होगी।
विपक्ष ने लगाया पक्षपात का आरोप, सदन में हंगामे के बीच पेश हुआ प्रस्ताव
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध, भारत पर इसके असर और देश के ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। विपक्ष ने 'देश को बचाना है, मोदी को हटाना है', 'मोदी सरकार शेम-शेम' और 'वोट चोर गद्दी छोड़' जैसे नारे भी लगाए, साथ ही चुनाव आयोग पर भी वोट की दलाली करने के आरोप लगाए।
विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी और आप सांसद संजय सिंह ने, पश्चिम एशिया के युद्ध के भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर एलपीजी कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों पर चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सरकार पर इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसदों ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है और विपक्ष केवल निचले स्तर की राजनीति कर रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव का संवैधानिक आधार और राजनीतिक समीकरण
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 94(c) लोकसभा को यह अधिकार देता है कि सदन का बहुमत चाहे तो प्रस्ताव पारित करके स्पीकर को पद से हटा सकता है। इसके लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना आवश्यक होता है। नोटिस लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को दिया जाता है। प्रस्ताव को पारित करने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है। हालांकि, मौजूदा लोकसभा में NDA के पास 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जिसके कारण इस प्रस्ताव का पारित होना बेहद कठिन माना जा रहा है। चर्चा और मतदान की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ओम बिरला सदन में मौजूद तो रहेंगे, लेकिन वे स्वयं अध्यक्षता नहीं करेंगे, बल्कि सदन के सदस्य के रूप में अपनी बात रख सकेंगे और मतदान कर सकेंगे।
यह अविश्वास प्रस्ताव संसद में चल रहे लगातार हंगामे और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। आगामी 10 घंटे की चर्चा के दौरान इन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर गहन बहस होने की उम्मीद है, हालांकि प्रस्ताव के अंतिम परिणाम पर सत्ताधारी गठबंधन के संख्याबल का स्पष्ट प्रभाव रहेगा।
Gulzar Ahmad