वैश्विक परिदृश्य में बदलाव पर जयशंकर का बड़ा बयान

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वैश्विक परिदृश्य  में बदलाव पर जयशंकर का बड़ा बयान

वैश्विक परिदृश्य में बदलाव पर जयशंकर का बड़ा बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित अरावली शिखर सम्मेलन में विश्व के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग, आपूर्ति शृंखलाओं और टैरिफ अस्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और चीन पर निशाना

जयशंकर ने कहा कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का एक तिहाई हिस्सा एक ही भौगोलिक क्षेत्र, विशेष रूप से चीन, में स्थानांतरित हो गया है। इसका प्रभाव आपूर्ति शृंखलाओं पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने इसे बदलते वैश्विक संतुलन का संकेत बताया।

अमेरिकी टैरिफ नीति और भारत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण विरोधी भावनाएं और टैरिफ अस्थिरता अलग-अलग देशों के व्यापारिक गणनाओं को प्रभावित कर रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में गिरावट के संदर्भ में यह टिप्पणी आई है।

राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति मुख्य रूप से राष्ट्रीय हित पर आधारित है। उन्होंने अतीत में भारत-सोवियत संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि हर समय भारत ने अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और टेक्नोलॉजी

जयशंकर ने बताया कि टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं। अमेरिका जीवाश्म ईंधन का मुख्य निर्यातक बन गया है, जबकि चीन नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी है। उन्होंने टेक्नोलॉजी नियंत्रण, कृत्रिम मेधा, और दुर्लभ खनिजों की बढ़ती मांग पर भी चर्चा की।

जयशंकर ने निष्कर्ष में कहा कि भारत को इन बदलावों के बीच अपनी रणनीति बनानी होगी और आगे बढ़ते रहना होगा।