विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 से 5 दिसंबर तक, बड़े कानून संशोधन प्रस्तावित
विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 से 5 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल चार बैठकें निर्धारित की गई हैं। सरकार इस सत्र में दो महत्वपूर्ण विधायी बदलावों के प्रस्ताव ला रही है, जिनमें नगरपालिका अधिनियम में संशोधन और दुकान-संस्थान (शॉप एंड एस्टाब्लिशमेंट) संशोधन विधेयक 2025 में बदलाव प्रमुख हैं।
नगरपालिका अध्यक्षों का चुनाव अब जनता सीधे करेगी
प्रस्तावित संशोधन के तहत नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया बदलेगी। अभी तक इन अध्यक्षों का चुनाव पार्षद करते थे, लेकिन नई व्यवस्था में मेयर की तरह पालिका और परिषद के अध्यक्षों को जनता सीधे चुनेगी।
इसके साथ ही राइट टू रिकॉल की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इस प्रावधान के तहत यदि जनता को किसी अध्यक्ष के कामकाज से नाराजगी हो, तो वह मतदान के माध्यम से उस अध्यक्ष को पद से हटा भी सकेगी।
दुकान एवं प्रतिष्ठान कानून में सख्ती और साप्ताहिक अवकाश
सरकार दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में भी महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार दुकानदारों और कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश देना होगा, जिससे श्रमिकों को नियमित आराम मिल सके।
दुकान खोलने के लिए गुमास्ता लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को सख्त किया जाएगा। साथ ही लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। वर्तमान में यह फीस 100 से 500 रुपये के बीच है, जिसे बढ़ाकर 5,000 रुपये किया जाएगा। बड़ी दुकानों और उन होटलों, जो आयकर के दायरे में आते हैं, से इससे भी अधिक फीस लेने की तैयारी है।
सत्र में 1497 सवाल, विभागों ने भेजे जवाब
इस सत्र के दौरान विधायकों ने कुल 1497 प्रश्न विधानसभा में रखे हैं। इनमें 907 सवाल ऑनलाइन और 590 सवाल ऑफलाइन भेजे गए हैं। सभी विभाग अपने-अपने जवाब पहले ही विधानसभा को भेज चुके हैं, जिससे प्रश्नकाल के दौरान इन पर चर्चा हो सकेगी।
कफ सिरप से बच्चों की मौत और खाद वितरण जैसे मुद्दे छाए रहने की संभावना
सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का मामला प्रमुख रहेगा। इसके अलावा किसानों को खाद वितरण से जुड़ी समस्याएं भी सत्र में उठाई जा सकती हैं।
सत्र की अवधि पर विपक्ष की आपत्ति
विपक्ष ने शीतकालीन सत्र की अवधि को लेकर आपत्ति जताई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल चार दिन का सत्र बहुत कम है और इतने कम समय में जनता से जुड़े सभी मुद्दों को पूरी तरह से उठाना संभव नहीं हो पाएगा।
सरकार की ओर से प्रस्तावित कानून संशोधनों और विपक्ष की आपत्तियों के बीच यह शीतकालीन सत्र कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और नीतिगत बहसों का मंच बनने की संभावना लिए हुए है।
Faraz Khan