मध्यप्रदेश में नपाध्यक्षों के सीधे चुनाव और दुकानदार-कामगारों के साप्ताहिक अवकाश का रास्ता साफ
मध्यप्रदेश सरकार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक इन निकायों के अध्यक्षों का चुनाव पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता था, लेकिन प्रस्तावित संशोधन के बाद अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही, राइट टू रिकॉल की व्यवस्था भी लागू की जाएगी, जिसके तहत यदि मतदाता अध्यक्ष के काम से असंतुष्ट हों तो मतदान के जरिए उन्हें पद से हटाने का अधिकार रखेंगे।
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में दो अहम विधेयक पेश होंगे
सरकार एक दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में दो प्रमुख विधेयक पेश करेगी। पहला विधेयक नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद के प्रत्यक्ष चुनाव और राइट टू रिकॉल से जुड़ा है। दूसरा विधेयक दुकानों और प्रतिष्ठानों से संबंधित कानून में संशोधन का है, जिसके माध्यम से व्यापार एवं दुकान से जुड़े नियमों को डिजिटल और आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी है।
दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को कैबिनेट की मंजूरी
पिछले हफ्ते हुई कैबिनेट बैठक में दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को मंजूरी दी गई। इसके तहत दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 को वर्तमान जरूरतों के अनुसार डिजिटल रूप में बदला जाएगा। अब सभी दुकानों, प्रतिष्ठानों, होटलों, रेस्टोरेंटों और अन्य व्यापारिक इकाइयों का पंजीकरण केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।
नई व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सेल्फ-सर्टिफिकेशन आधारित होगी और कागजी प्रमाणपत्र की जगह डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। संबंधित दुकान या प्रतिष्ठान शुरू होने के 30 दिन के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। जारी डिजिटल प्रमाणपत्र को प्रतिष्ठान में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना भी जरूरी होगा।
ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सभी प्रक्रियाएं
संशोधित व्यवस्था के तहत श्रम विभाग से संबंधित सभी प्रक्रियाएं एक ही ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पूरी की जाएंगी। किसी दुकान या प्रतिष्ठान को बंद करने की स्थिति में उसके संचालक को 10 दिन के भीतर पोर्टल पर इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा। जैसे ही यह सूचना दर्ज होगी, उस प्रतिष्ठान का रजिस्ट्रेशन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
नई शुल्क संरचना के तहत रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिकतम 2,500 रुपये तक निर्धारित किया गया है। यदि कर्मचारियों की संख्या या अन्य महत्वपूर्ण विवरणों में बदलाव होता है, तो उसे सात दिन के भीतर पोर्टल पर अपडेट करना होगा।
दुकानदारों और कामगारों के लिए सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश
दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार प्रदेश के सभी दुकानदारों और कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश देना होगा। यह प्रावधान सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर लागू होगा। इसके साथ ही, दुकान खोलने और संचालन के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा।
सरकार का कहना है कि साप्ताहिक अवकाश की अनिवार्यता से कामगारों के स्वास्थ्य, बेहतर कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। श्रम विभाग के अनुसार, इन संशोधनों का उद्देश्य श्रम कानूनों को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है, ताकि कामगारों और नियोक्ताओं दोनों को सुविधाजनक व्यवस्था मिल सके।
मोहन कैबिनेट में अनुपूरक बजट और अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में एक दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए करीब 9,000 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को भी मंजूरी दी गई। इसी बैठक में नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव को प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराए जाने से संबंधित विधेयक को भी स्वीकृति दी गई।
विधानसभा से दोनों विधेयक पारित होने के बाद इन्हें पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके बाद नपाध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता के हाथ में होगा और दुकानों एवं प्रतिष्ठानों से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होंगी, जबकि कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश का अधिकार सुनिश्चित हो जाएगा।
Sharad Shrivastava