वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम फैसला

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वक्फ कानून  पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम फैसला

वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) कानून की वैधता पर दायर याचिकाओं पर सोमवार को अंतरिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगाई है। यह फैसला तीन दिनों की सुनवाई के बाद लिया गया, जिसमें याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार की दलीलों पर विचार किया गया।

याचिकाओं और दलीलों का विवरण

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने वक्फ कानून को मुसलमानों के अधिकारों के खिलाफ बताया और इसे अंतरिम रूप से रोकने की मांग की थी। वहीं, केंद्र सरकार ने इसे संवैधानिक और समाज के हित में बताया। याचिकाकर्ताओं ने वक्फ को धर्म का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इसे चुनौती दी, जबकि केंद्र ने इसे धर्म का अनिवार्य हिस्सा न मानकर एक परोपकारी दान के रूप में देखने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पांच प्रमुख याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और अन्य संगठनों की याचिकाएं शामिल थीं। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने और याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन ने बहस की।

कानून का विरोध और समर्थन

इस कानून को लेकर बहस अप्रैल 2025 में इसके लागू होने के बाद से जारी है। केंद्र ने इसे संसद द्वारा पारित और संवैधानिक बताया, जबकि याचिकाकर्ताओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कहा। कोर्ट ने फिलहाल कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगाई है, जबकि अन्य प्रावधान प्रभावी रहेंगे।

अंततः, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वक्फ कानून पर अस्थायी राहत प्रदान करता है और आगे की सुनवाई में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे संबंधित विवादों पर अभी और चर्चा की संभावना है।