यमुना एक्सप्रेसवे महापंचायत में किसानों का अल्टीमेटम, 14 जनवरी तक मांगें मानो वरना लखनऊ कूच

· 1 min read
यमुना एक्सप्रेसवे महापंचायत में किसानों का अल्टीमेटम, 14 जनवरी तक मांगें मानो वरना लखनऊ कूच

यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों की महापंचायत, मांगें न मानीं तो लखनऊ कूच की तैयारी

यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर सोमवार को जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की बड़ी महापंचायत हुई। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा और आगरा जिलों के एक हजार से अधिक किसान शामिल हुए। महापंचायत में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों की मांगों को आवाज देते हुए सरकार और प्राधिकरणों को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया।

64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और विकसित भूखंड की मुख्य मांग

करीब पांच घंटे चली इस महापंचायत में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण से प्रभावित किसानों के लिए 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। इसके साथ ही किसानों ने 10 फीसदी विकसित भूखंड, आबादी निस्तारण और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता पर रखने की बात कही। टिकैत ने कहा कि जिले में जमीनों का सर्किल रेट बढ़ाया जाए और नोएडा एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों को रोजगार में 70 फीसदी हिस्सेदारी दी जाए।

पुस्तैनी आबादी बचाने और मकान के लिए जमीन की मांग

राकेश टिकैत ने किसानों की पुस्तैनी आबादी को न हटाने की मांग की और कहा कि परिवार बढ़ने से मकान बनाने की समस्या गंभीर हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोएडा एयरपोर्ट बनकर तैयार हो जाने के बावजूद प्रभावित किसानों को न तो 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा मिला है और न ही रोजगार व मकान निर्माण के लिए जमीन का लाभ दिया गया है। उनके अनुसार, एयरपोर्ट चालू होने के बाद किसानों की बात और कठिनाई से सुनी जाएगी, इसलिए अभी समाधान जरूरी है।

प्रशासन का आश्वासन और चरणबद्ध समाधान की बात

महापंचायत के दौरान एडीएम एलए बच्चू सिंह, यमुना प्राधिकरण के ओएसडी शैलेंद्र कुमार सिंह और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी राम नयन सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की। अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं के चरणबद्ध समाधान का आश्वासन दिया। एडीएम एलए ने बताया कि सर्किल रेट बढ़ाने की प्रक्रिया पर काम जारी है और नए साल में इसकी घोषणा की जाएगी।

14 जनवरी की डेडलाइन और आगे की आंदोलन रणनीति

किसान नेताओं ने अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन और प्राधिकरण को 14 जनवरी तक का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगे की रणनीति तय की जाएगी। राकेश टिकैत ने कहा कि यदि सरकार बात नहीं मानेगी तो 22 जनवरी के बाद लखनऊ की ओर एक ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा, जिसमें एक गांव से एक ट्रैक्टर और 10 लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के लिए 15 दिन का राशन लेकर डेरा डालने की तैयारी की जाएगी और जनवरी में प्रयागराज में होने वाले शिविर में विस्तृत रणनीति तय होगी।

अरावली को लेकर चेतावनी, प्रदर्शन की भी तैयारी

महापंचायत के दौरान अरावली की पहाड़ियों की नई परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद पर भी राकेश टिकैत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अरावली हमारी धरोहर है और यदि कोई इसे नष्ट करने की कोशिश करेगा तो किसान इसे बचाने के लिए प्रदर्शन करेंगे और वहीं जाकर बैठेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक डेरा डालकर विरोध किया जाएगा।

सुरक्षा और ट्रैफिक के लिए सख्त इंतजाम

महापंचायत को देखते हुए जीरो प्वाइंट और आसपास के क्षेत्रों में कई थानों की पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई। ट्रैफिक पुलिस भी जाम की स्थिति से बचने के लिए अलर्ट रही। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ किसानों से संवाद की कोशिश की गई, जबकि किसान नेतृत्व ने अपनी मांगों पर जल्द और ठोस निर्णय की अपेक्षा दोहराई।

Gulzar Ahmad