यूपी धर्मांतरण कानून पर SC के सवाल, देश की धर्मनिरपेक्षता का किया जिक्र

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यूपी  धर्मांतरण कानून  पर SC के सवाल, देश की  धर्मनिरपेक्षता  का किया जिक्र

यूपी धर्मांतरण कानून पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कानून में सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता और हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह कानून धर्म परिवर्तन प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी के दखल को बढ़ाने के लिए बनाया गया है।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता पर जोर

बेंच ने भारत की धर्मनिरपेक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना और धर्मनिरपेक्ष प्रकृति अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि संविधान को उसकी 'महान और दिव्य' दृष्टि के अनुसार पढ़ा और समझा जाना चाहिए। साथ ही, बेंच ने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के फैसले का जिक्र करते हुए बताया कि धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न अंग है।

प्रक्रिया और निजता पर सवाल

कोर्ट ने धर्मांतरण प्रक्रिया की कठोरता और निजता के उल्लंघन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद घोषणा करने की अनिवार्यता व्यक्तिगत गोपनीयता के खिलाफ है। बेंच ने कहा कि यह सोचना जरूरी है कि किसी को यह बताने की आवश्यकता क्यों है कि उसने धर्म परिवर्तन किया है और वह अब किस धर्म को मानता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उत्तर प्रदेश धर्मांतरण अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर विचार नहीं किया जा सकता। फिर भी, उन्होंने इस मामले में गहराई से सोचने की आवश्यकता पर बल दिया।

L. N. Bhargava