उद्धव और राज ठाकरे 20 साल बाद साथ, BMC चुनाव के लिए गठबंधन
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने लगभग 20 साल बाद अपनी-अपनी पार्टियों शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच चुनावी गठबंधन का ऐलान किया है। दोनों नेता बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) सहित महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों के चुनाव एक साथ लड़ेंगे। यह निर्णय संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक किया गया।
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन की घोषणा
बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी और राज ठाकरे की सोच एक है, और यदि वे बंटेंगे तो बिखर जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र के लिए वे सब एक हैं। गठबंधन की घोषणा से पहले दोनों नेता शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे के स्मारक पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। करीब पांच महीने पहले दोनों के सार्वजनिक रूप से गले मिलने के बाद अब इस औपचारिक गठबंधन को महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
BMC और 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को मतदान
महाराष्ट्र में BMC सहित कुल 29 नगर निगमों के चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जा चुके हैं। इन सभी निकायों में 15 जनवरी को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे। BMC चुनाव को दोनों दलों की साख से जुड़ा माना जा रहा है, क्योंकि मुंबई की नगर राजनीति में शिवसेना की ऐतिहासिक पकड़ रही है और अब मनसे के साथ गठबंधन से समीकरण बदल सकते हैं।
उद्धव और राज ठाकरे के बीच दूरी की पृष्ठभूमि
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे कभी शिवसेना के अंदर मिलकर काम करते थे। 1989 में 21 वर्ष की उम्र में राज ठाकरे शिवसेना की स्टूडेंट विंग, भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष बने। 1993 तक उन्होंने बड़ी संख्या में युवाओं को अपने और शिवसेना के साथ जोड़ा, जिससे पूरे महाराष्ट्र में पार्टी का मजबूत जमीनी नेटवर्क खड़ा हुआ।
2002 तक राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे मिलकर शिवसेना को संभाल रहे थे। 2003 में महाबलेश्वर में हुए पार्टी अधिवेशन के दौरान बालासाहेब ठाकरे ने राज ठाकरे से कहा कि उद्धव ठाकरे को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए। इस पर राज ठाकरे ने अपने और अपने समर्थकों के भविष्य को लेकर सवाल उठाया। 2005 तक पार्टी के फैसलों पर उद्धव ठाकरे का दबदबा बढ़ता चला गया, जो राज ठाकरे को पसंद नहीं आया।
आखिरकार 9 मार्च 2006 को शिवाजी पार्क में हुए कार्यक्रम में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के गठन की घोषणा कर दी। उन्होंने मनसे को ‘मराठी मानुस की पार्टी’ बताते हुए दावा किया कि यही पार्टी महाराष्ट्र पर राज करेगी। इसी अलगाव के बाद दोनों नेताओं के रास्ते अलग हो गए थे।
फिर से एकजुट होने के राजनीतिक मायने
दो दशक पुराने मतभेदों के बाद BMC चुनाव के लिए हुआ यह गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) और मनसे का साथ आना स्थानीय निकाय चुनावों में नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर सकता है। BMC जैसे अहम निकाय में चुनावी साझेदारी से दोनों दलों की ताकत को जोड़कर भाजपा और अन्य प्रतिद्वंद्वी दलों को चुनौती देने की संभावनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
राज्य की निकाय राजनीति की पृष्ठभूमि
हाल के समय में महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, जिसे एनडीए का हिस्सा माना जाता है, को बड़ी जीत मिली है। 288 सीटों के नतीजों में महायुति को 207 सीटों पर सफलता मिली, जिसमें 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायत की सीटें शामिल थीं। इनमें भाजपा 117 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। ऐसे परिणामों की पृष्ठभूमि में उद्धव और राज ठाकरे का नया गठबंधन भविष्य के निकाय चुनावों में विपक्षी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे का यह गठबंधन न केवल BMC चुनाव में नए राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकता है, बल्कि ठाकरे परिवार की राजनीति में भी एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
Bhavanesh Soni