आरएसएस शताब्दी पर डाक टिकट और सिक्का जारी, होसबाले ने जताया आभार

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आरएसएस शताब्दी  पर डाक टिकट और सिक्का जारी, होसबाले ने जताया आभार

आरएसएस की शताब्दी पर डाक टिकट और सिक्का जारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को संगठन की 100 वर्षों की यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विरोध के बावजूद आरएसएस ने लोगों के स्नेह और समर्थन के कारण सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बनने की दिशा में प्रगति की है। इस अवसर पर उन्होंने सरकार द्वारा आरएसएस की शताब्दी के उपलक्ष्य में डाक टिकट और सिक्का जारी करने के प्रति आभार व्यक्त किया। होसबाले ने इसे संघ के निस्वार्थ कार्यों को मान्यता के रूप में देखा।

आरएसएस का विचार: भारत का विचार

होसबाले ने कहा कि आरएसएस का विचार भारत की जड़ों, संस्कृति और सभ्यता में समाया हुआ है। उन्होंने बताया कि 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संगठन की स्थापना की गई थी। तब से संघ कार्यकर्ताओं ने व्यक्ति के चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण के मिशन पर काम किया। उन्होंने संघ की यात्रा को दिलचस्प बताया और कहा कि देश की जनता द्वारा संगठन के विचारों को समर्थन और स्वीकृति मिलने के कारण ही यह इतनी दूर पहुंचा है।

देशभक्ति और अनुशासन का प्रतीक

होसबाले ने कहा कि आज संघ को देशभक्ति, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने बताया कि आरएसएस समाज को संगठित करने और उसके पुरुषार्थ को जागृत करने का प्रयास कर रहा है ताकि वह हर चुनौती का सामना कर सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले दशकों में भारत की वैश्विक छवि को सुधारने में संघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'पंच परिवर्तन' और आत्मनिर्भर भारत

आरएसएस ने 'पंच परिवर्तन' एजेंडे के तहत भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने, सही पारिवारिक मूल्यों को अपनाने, सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने और नागरिक कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया। होसबाले ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आग्रह किया।

वैश्विक मंच पर भारत का विमर्श

होसबाले ने कहा कि भारत के बारे में दुनिया का विमर्श सकारात्मक और सत्य पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि संघ के प्रयासों ने देश और सरकारों की छवि को बदलने में मदद की है। उन्होंने भारत के वैश्विक विमर्श को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर आरएसएस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि संगठन भारतीय संस्कृति और समाज के उत्थान के लिए काम करता रहेगा।