अडाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपी 2,000 मशीन गन, LAC-LoC पर बढ़ेगी मारक क्षमता

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अडाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपी 2,000 मशीन गन, LAC-LoC पर बढ़ेगी मारक क्षमता

अडाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को 2,000 'प्रहार' लाइट मशीन गन की पहली खेप सौंपी

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को 2,000 'प्रहार' लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप सौंप दी है। ये 7.62 मिमी कैलिबर के हथियार ग्वालियर स्थित स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में बनाए गए हैं। सरकार इन हथियारों का उपयोग LAC और LoC पर सुरक्षा तथा मारक क्षमता बढ़ाने के लिए करेगी।

हथियारों की क्षमता और विवरण

'प्रहार' LMG की मारक क्षमता 1,000 मीटर तक है, जिससे दुश्मनों को दूर से ही निशाना बनाया जा सकता है। इन मशीन गन का वजन 8 किलोग्राम है और इनकी लंबाई 1100 मिमी है। ये एक मिनट में 700 राउंड फायरिंग कर सकती हैं।

समय से पहले डिलीवरी और परियोजना की प्रगति

अडाणी डिफेंस ने कुल 40,000 LMGs के ऑर्डर की पहली खेप निर्धारित समय से 11 महीने पहले सौंप दी है। कंपनी के CEO आशीष राजवंशी ने बताया कि बोली जमा करने से लेकर डिलीवरी तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगभग 6 साल लगे। कंपनी अगले 3 साल के भीतर पूरा ऑर्डर देने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जबकि पहले इसके लिए 7 साल से अधिक का समय तय था। रक्षा मंत्रालय के डीजी ए. अंबरासु ने समय से पहले डिलीवरी की सराहना करते हुए इसे तेजी से परियोजना पूरी करने की क्षमता का प्रमाण बताया।

सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर जोर

रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ए. अंबरासु ने सरकार द्वारा रक्षा उद्योग के साझेदारों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया। उन्होंने "गति" और "पैमाना" को रक्षा खरीद के दो महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार और निजी कंपनियों को साथ मिलकर काम करना होगा।

प्लांट की क्षमता और भविष्य की योजनाएं

ग्वालियर में स्थित यह केंद्र लगभग 100 एकड़ में फैला हुआ है और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 1 लाख हथियारों की है। इसमें इस्तेमाल होने वाली 90% से अधिक सामग्री देश में ही तैयार की जाती है। यहां एक अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज भी है। कंपनी के अनुसार, यह केंद्र हर साल लगभग 30 करोड़ छोटे कैलिबर के गोला-बारूद बनाने में सक्षम है, और बड़े व मध्यम कैलिबर के गोला-बारूद के उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की भी योजना है। भविष्य की योजना के तहत, यह केंद्र क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) हथियार बनाने के लिए भी तैयार है। कंपनी का लक्ष्य अप्रैल 2026 से हर महीने लगभग 1,000 LMG का उत्पादन शुरू करना है, ताकि पूरा ऑर्डर 3 साल से भी कम समय में पूरा किया जा सके।

हथियारों की सख्त जांच

कंपनी ने बताया कि हर हथियार को सेना में शामिल करने से पहले बैलिस्टिक टेस्ट, पर्यावरणीय जांच और अन्य तकनीकी मूल्यांकन सहित कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है, ताकि उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

Ravi Yadav