अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्रों-स्टाफ को मकान खाली का दबाव

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्रों-स्टाफ को मकान खाली का दबाव

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र और स्टाफ मकान मालिकों के दबाव में

दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन के बाद बढ़ी दिक्कतें

दिल्ली ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम जांच के दायरे में आने के बाद यहां पढ़ने और काम करने वाले छात्र एवं स्टाफ नई मुसीबत से जूझ रहे हैं। यूनिवर्सिटी के आसपास किराये पर रह रहे दर्जनों लोगों को मकान मालिकों ने घर खाली करने के लिए कह दिया है, जिससे उनके सामने अचानक रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

कैंपस से बाहर रहने वाले छात्रों और स्टाफ पर असर

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में दो हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, जिनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश से आती है। इनमें से कई छात्र और स्टाफ यूनिवर्सिटी हॉस्टल के बजाय आसपास के गांव धौज और फतेहपुरा तगा में किराये पर कमरों और पीजी में रहते हैं। हाल के घटनाक्रम के बाद इन इलाकों के मकान मालिक किरायेदारों पर कमरे खाली करने का दबाव बना रहे हैं।

धौज और फतेहपुरा तगा से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद

जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा डॉक्टर मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद 10 नवंबर को गांव धौज के एक किराये के कमरे से 360 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। बताया गया कि मुजम्मिल ने अपने एक दोस्त के रहने का बहाना बनाकर कमरे को दो महीने के लिए किराये पर लिया और वहां अमोनियम नाइट्रेट को सूटकेसों में छुपाकर रखा। इसी कमरे से 20 टाइमर और 20 बैटरी भी मिलीं।

उसी दिन यूनिवर्सिटी से कुछ दूरी पर स्थित गांव फतेहपुरा तगा में भी एक घर के कमरे से 2540 किलो विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। यह कमरा भी मुजम्मिल ने मस्जिद के मौलवी इश्तियाक के घर पर सामान रखने के नाम से किराये पर लिया था। दोनों गांव यूनिवर्सिटी के दाएं-बाएं स्थित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और संदेह का माहौल बन गया है।

जांच एजेंसियों की गतिविधियों से मकान मालिकों में डर

दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अन्य एजेंसियां अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टरों और स्टाफ से लगातार पूछताछ कर रही हैं। आतंकी नेटवर्क में शामिल बताई गई डॉक्टर शाहीन सईद, डॉक्टर मुजम्मिल शकील और सुसाइड बम्बर बने डॉक्टर उमर नबी के संपर्क में रहे लोगों की जांच अभी जारी है।

इसी पृष्ठभूमि में मकान मालिकों का मानना है कि वे किसी भी तरह की जांच या कानूनी उलझन में नहीं पड़ना चाहते। उनका तर्क है कि अल-फलाह से जुड़े लोगों की जगह अन्य किरायेदार मिल जाएंगे, इसलिए वे बाहरी छात्र और स्टाफ को जल्दी से जल्दी कमरे छोड़ने के लिए कह रहे हैं।

छात्र और स्टाफ अचानक बेघर होने की कगार पर

कई स्टाफ कर्मचारियों और छात्रों ने बताया कि उन्हें नवंबर का किराया खत्म होने के बाद से ही घर खाली करने के लिए कह दिया गया। लेकिन यूनिवर्सिटी शहर से काफी दूर होने और सरकारी परिवहन की कमी के कारण वे अन्य जगह शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं। शहर में रहकर रोजाना यूनिवर्सिटी आना मुश्किल और महंगा है, जबकि नजदीकी गांवों में ही अब कोई उन्हें नया कमरा देने के लिए तैयार नहीं है।

धौज गांव में साथियों के साथ रह रहे एक स्टाफ सदस्य के अनुसार, मकान मालिक लगातार दबाव बना रहा है, जबकि उन्हें अभी दूसरी जगह नहीं मिल सकी है। इसी तरह कई छात्र समूह में रहकर पढ़ाई कर रहे थे, जिन्हें अब कमरा छोड़ने के लिए चेतावनी दी गई है।

पुलिस से मदद की गुहार और वेरिफिकेशन का निर्देश

किरायेदारों को तत्काल कमरा खाली कराने के मामले फरीदाबाद पुलिस तक पहुंच गए हैं। पुलिस को अब तक करीब 12 शिकायतें मिली हैं, जिनमें छात्रों और स्टाफ ने बताया है कि अचानक नई व्यवस्था करना संभव नहीं है, इसलिए उन्हें कम से कम एक महीने का समय दिया जाए। शिकायतों के मुताबिक मकान मालिक उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं।

NIT डीसीपी मकसूद अहमद ने जानकारी दी कि मकान मालिकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने यहां रह रहे छात्रों और स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन कराएं, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न हो। पुलिस स्वयं भी शहर में किरायेदार वेरिफिकेशन अभियान चला रही है और जरूरतमंद लोगों की मदद का आश्वासन दे रही है।

निष्कर्ष: सुरक्षा जांच के बीच आवास की गंभीर समस्या

दिल्ली ब्लास्ट केस में अल-फलाह यूनिवर्सिटी और आसपास के गांवों का नाम सामने आने के बाद एक ओर जहां सुरक्षा एजेंसियां सख्त जांच कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर निर्दोष छात्रों और स्टाफ के सामने रहने की बड़ी समस्या पैदा हो गई है। मकान मालिक जांच से बचने के लिए उन्हें कमरे खाली करने पर मजबूर कर रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय की दूरी और परिवहन की कमी के चलते ये लोग विकल्प खोजने में असमर्थ हैं। ऐसे में जरूरी है कि जांच और सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन और पुलिस इन छात्रों और कर्मचारियों के आवास संबंधी संकट का भी संवेदनशील समाधान निकालें।

Ravi Yadav