अमेरिका टैरिफ न घटाए, भारत पर 'सेक्शन 301' से दबाव का नया दांव?

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अमेरिका टैरिफ न घटाए, भारत पर 'सेक्शन 301' से दबाव का नया दांव?

अमेरिका का टैरिफ नहीं घटाएगा? भारत पर 'सेक्शन 301' से दबाव बनाने की तैयारी!

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता के बीच, अमेरिकी सरकार 'सेक्शन 301' के तहत भारत पर फिर से भारी टैरिफ और प्रतिबंध लगाने का रास्ता तलाश रही है। यह कानून अमेरिका को किसी भी देश की व्यापार नीतियों की जांच करने और 'अनुचित व्यापार व्यवहार' पाए जाने पर कार्रवाई करने की शक्ति देता है।

'सेक्शन 301' की शक्ति और दायरे

'सेक्शन 301' अमेरिकी Trade Act 1974 का हिस्सा है, जिसके तहत Office of the United States Trade Representative (USTR) किसी भी देश की व्यापार नीतियों की जांच कर सकता है। अगर अमेरिका को लगता है कि कोई देश 'अनुचित व्यापार व्यवहार' कर रहा है, तो वह अतिरिक्त टैरिफ, आयात प्रतिबंध या अन्य व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है। यह कानून अत्यंत लचीला है और अमेरिका किसी विशेष सेक्टर या उत्पाद को निशाना बना सकता है।

किन भारतीय सेक्टर्स पर खतरा?

वर्तमान अमेरिकी जांच में भारत समेत 16 बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। स्टील, एल्यूमिनियम, ऑटोमोबाइल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, मशीनरी, सेमीकंडक्टर और सोलर मॉड्यूल जैसे भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र अमेरिकी रडार पर हैं। 'सेक्शन 301' के तहत कार्रवाई से भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार महंगा हो सकता है।

ट्रंप सरकार की बदली रणनीति

फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'रेसिप्रोकल टैरिफ' मॉडल को झटका दिए जाने के बाद, अमेरिका ने पहले सेक्शन 122 का सहारा लिया था। लेकिन सेक्शन 122 की अस्थायी प्रकृति और कानूनी चुनौतियों की संभावना के कारण, अब ट्रंप प्रशासन 'सेक्शन 301' की ओर लौट रहा है, जो एक अधिक आक्रामक और दीर्घकालिक हथियार माना जाता है।

भारत टैरिफ कटौती क्यों चाहता है?

भारत पहले लगभग 18% टैरिफ दरों पर बातचीत कर रहा था, जो बाद में अमेरिकी अदालती फैसले और सेक्शन 122 के कारण लगभग 10% तक आ गई। भारत चाहता है कि यह कम दरें बरकरार रहें, क्योंकि उच्च टैरिफ निर्यात क्षेत्र पर दबाव बढ़ाएगा और अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे।

अमेरिका कैसे बना सकता है दबाव?

'सेक्शन 301' जांच पूरी होने के बाद, अमेरिका सेक्टर-आधारित नई ड्यूटी लगा सकता है। इससे भविष्य में स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटो जैसे क्षेत्रों पर अलग से अधिक टैक्स लगाया जा सकता है। अमेरिका इस कानूनी रास्ते का उपयोग करके भारत से अधिक बाजार पहुंच, कम आयात शुल्क और व्यापारिक रियायतें मांग सकता है, प्रभावी रूप से 'सेक्शन 301' को एक 'प्रेशर टूल' के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।

रूस से तेल खरीद का मुद्दा

रूस से तेल खरीदने का मुद्दा भी इस विवाद में महत्वपूर्ण है। पहले अमेरिका ने भारत के कुछ निर्यातों पर अतिरिक्त 25% ड्यूटी लगाई थी, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा था। हालांकि, अतिरिक्त शुल्कों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, पर 'सेक्शन 301' जांच नए जोखिम पैदा कर रही है।

ट्रेड डील पर संभावित असर

यदि अमेरिका 'सेक्शन 301' का आक्रामक तरीके से उपयोग करता है, तो भारत के लिए बातचीत मुश्किल हो सकती है। भारत अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा करना चाहता है, जबकि अमेरिका बाजार में अधिक पहुंच चाहता है। आने वाले हफ्ते भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो यह तय करेंगे कि दोनों देश समझौते की ओर बढ़ते हैं या नया व्यापारिक तनाव शुरू होता है।

Satyam Tripathi