सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत दी
कोर्ट ने ट्रायल में देरी को संवैधानिक उल्लंघन बताया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 9 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी लियाकत अली को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में असाधारण देरी ने न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है।
कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता घटना के समय किशोर था और अब तक 9 साल बीत गए। कोर्ट ने कहा कि बिना ट्रायल में प्रगति के किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना त्वरित सुनवाई और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
आरोपी की शिकायत
आरोपी लियाकत अली ने शिकायत की थी कि ट्रायल 'घोंघे की चाल' से चल रहा है और इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। अब तक अभियोजन पक्ष के 30 में से केवल 12 गवाहों की गवाही हो सकी है।
संवैधानिक प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि त्वरित सुनवाई का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 से जुड़ा है। कोर्ट ने आरोपी को अनुच्छेद 32 के तहत जमानत दी। जमानत की शर्तें संबंधित ट्रायल कोर्ट तय करेगा।
Adarsh Chaurasiya