बाबरी मस्जिद विवाद पर बंगाल में सियासी टकराव

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बाबरी मस्जिद विवाद पर बंगाल में सियासी टकराव

बंगाल में बाबरी मस्जिद नाम पर मस्जिद को लेकर सियासी संग्राम

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद बनाने के टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के ऐलान से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर खुद उनकी पार्टी के विधायक और प्रवक्ता उनके दावों को झूठा और चुनावी स्टंट बता रहे हैं, तो दूसरी ओर हुमायूं 6 दिसंबर को मस्जिद की नींव रखने पर अड़े हुए हैं।

टीएमसी विधायकों का आरोप: जमीन ही नहीं, सिर्फ राजनीति

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से टीएमसी विधायक हसनुज्जमां शेख का आरोप है कि हुमायूं कबीर ने मस्जिद के लिए कोई जमीन खरीदी ही नहीं है। उनके अनुसार, अगर हुमायूं वास्तव में मस्जिद बनाना चाहते, तो शांति से जमीन खरीदकर नींव रख देते, लेकिन वे लगातार शोर मचाकर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

हसनुज्जमां का कहना है कि जिस इलाके में मस्जिद के शिलान्यास की बात कही जा रही है, वह तीन विधायकों के क्षेत्र में आता है। हुमायूं अब आरोप लगा रहे हैं कि बेलडांगा के विधायक हसनुज्जमां शेख और रेजिनगर के विधायक रबीउल आलम चौधरी किसानों को डरा-धमका कर उन्हें जमीन नहीं बेचने दे रहे हैं। इसके जवाब में दोनों विधायक साफ कह रहे हैं कि हुमायूं के पास न जमीन है, न असली निर्माण की मंशा, केवल सियासी माहौल गरम करने का एजेंडा है।

रेजिनगर से टीएमसी विधायक रबीउल आलम चौधरी ने भी हुमायूं के सभी दावों को खारिज किया और कहा कि वह लगातार बयान देकर मीडिया का ध्यान खींचना चाहते हैं और बाद में कहानी गढ़ते हैं कि अन्य विधायक उनके काम में बाधा डाल रहे हैं।

हुमायूं कबीर की जिद: जमीन ली है, सब 6 दिसंबर को दिखाऊंगा

इन आरोपों के बीच हुमायूं कबीर का दावा है कि उन्होंने पहले ही मस्जिद के लिए जमीन ले ली है, लेकिन वे किसी को एग्रीमेंट दिखाने को तैयार नहीं हैं। उनसे जब जमीन के कागज दिखाने और पार्टी विधायकों के आरोपों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सबकुछ 6 दिसंबर को शिलान्यास स्थल पर ही बताया और दिखाया जाएगा।

हुमायूं का कहना है कि 6 दिसंबर को मस्जिद की नींव रखी जाएगी, उसके बाद तीन महीने में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की मंजूरी ली जाएगी और लगभग तीन साल में मस्जिद का निर्माण पूरा हो जाएगा। वे बार-बार इस सवाल से बचते रहे कि यदि जमीन पहले से खरीदी जा चुकी है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा।

मस्जिद का नाम बाबरी रखने को लेकर हुमायूं का तर्क है कि यह उनका फैसला है, और वे इसे मुसलमानों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विरोध करने वालों को वे राजनीतिक विरोधी के रूप में दिखाकर खुद को समुदाय का नेता साबित करना चाहते हैं।

टीएमसी का रुख: पार्टी से निष्कासन और बीजेपी संपर्क के आरोप

विवाद बढ़ने के बाद टीएमसी ने हुमायूं कबीर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया। पार्टी प्रवक्ता मानव जायसवाल ने कहा कि ममता बनर्जी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं कि हुमायूं ने इस तरह का ऐलान किसके कहने पर किया और क्या इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा काम कर रहा है।

मानव जायसवाल के मुताबिक, प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि हुमायूं कबीर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के संपर्क में थे। उन्होंने यह भी कहा कि हुमायूं पहले भी भाजपा में रह चुके हैं और उनके पुराने रिश्तों की जांच की जा रही है। हालांकि, आधिकारिक निष्कर्ष आंतरिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे।

टीएमसी ने स्पष्ट किया कि पार्टी का मस्जिद अथवा मंदिर निर्माण जैसे धार्मिक संस्थानों से कोई सीधा लेना-देना नहीं है और यह काम संबंधित धार्मिक संस्थाओं का होता है। पार्टी ने अपने विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वह सभी समुदायों के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के लिए समान रूप से काम करती है।

बीजेपी की प्रतिक्रिया: सवाल टीएमसी से, आरोपों पर चुप्पी

टीएमसी के आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता श्रीरूपा भट्टाचार्या ने कहा कि स्पष्टीकरण सबसे पहले टीएमसी को देना चाहिए कि उनके ही विधायक ने इतना विवादित ऐलान कैसे कर दिया और उसे अचानक सस्पेंड क्यों करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कोई भी किसी पर भी आरोप लगा सकता है, इसलिए भाजपा इन आरोपों का जवाब देने को बाध्य नहीं है।

पिछले एक साल से जारी विवाद और भड़काऊ बयान

हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने का विवाद नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी छोटी मस्जिद बनाने की घोषणा की थी। बाबरी नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति उठने के बाद भी वे इसे मुसलमानों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते रहे।

इसके बाद भाजपा ने मुर्शिदाबाद में राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा, हालांकि स्थानीय भाजपा नेताओं ने इसे मस्जिद के जवाब के रूप में देखने से इनकार किया। विवाद तब और गहरा गया, जब नवंबर 2025 में हुमायूं ने घोषणा की कि वे 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे और रोकने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। उन्होंने एक और बयान में कहा कि यदि 100 मुसलमान शहीद होंगे तो वे अपने साथ 500 लोगों को ले जाएंगे।

हुमायूं कबीर पहले भी भड़काऊ बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने एक सभा में हिंदुओं को धमकाने वाला भाषण दिया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया और टीएमसी ने आधिकारिक रूप से उनसे दूरी बना ली थी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि: टीएमसी, निष्कासन और बीजेपी में सफर

हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर भी विवादों से भरा रहा है। 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उन्हें टीएमसी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया था। इसके बाद वे 2018 में भाजपा में शामिल हो गए। निष्कासन की अवधि पूरी होने के बाद वे फिर से टीएमसी में लौटे और मुर्शिदाबाद के भरतपुर से विधायक बने।

अब बाबरी नाम से मस्जिद बनाने के ताजा विवाद ने एक बार फिर उनकी राजनीतिक निष्ठा और मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और टीएमसी उन्हें भाजपा का पुराना साथी और संभावित एजेंट बताकर दूरी बना रही है।

निष्कर्ष: मस्जिद, जमीन और राजनीति के बीच उलझा विवाद

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद नाम से मस्जिद बनाने की घोषणा ने जमीन, धार्मिक भावनाओं और दलों की राजनीति को एक साथ खड़ा कर दिया है। एक ओर हुमायूं कबीर बिना दस्तावेज दिखाए 6 दिसंबर को नींव रखने पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय टीएमसी विधायक और पार्टी नेतृत्व उन्हें झूठ बोलकर माहौल भड़काने वाला नेता बता रहे हैं।

फिलहाल मामला जांच, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक रणनीति के बीच फंसा हुआ है। 6 दिसंबर को वास्तव में मस्जिद की नींव रखी जाती है या इसे केवल चुनावी और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का हथियार बनाया जाता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।

L. N. Bhargava