बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ भीड़ हिंसा की एक और घटना सामने आई है। सात दिनों के भीतर दूसरे हिंदू युवक की हत्या ने कानून व्यवस्था और अफवाहों के माहौल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल की भीड़ ने हत्या की
राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में बुधवार रात लगभग 11 बजे 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार अमृत पर जबरन वसूली और आपराधिक गिरोह चलाने के आरोप थे, और उसके खिलाफ पांगशा थाने में दो आपराधिक मामले, जिनमें एक हत्या का मामला भी शामिल है, दर्ज थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमृत लंबे समय से जबरन वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। रिपोर्टों के अनुसार वह काफी समय भारत में छिपा रहा और हाल ही में गांव लौटा था। 24 दिसंबर की रात वह अपने साथियों के साथ गांव के निवासी शाहिदुल इस्लाम के घर कथित रूप से पैसे लेने गया। घरवालों ने शोर मचाकर मदद मांगी तो ग्रामीण जुट गए और अमृत को पकड़कर उसकी बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उसके साथी भाग निकले, जबकि सलीम नामक एक व्यक्ति हथियारों के साथ पकड़ा गया।
दीपू चंद्र दास की हत्या के आरोप झूठे साबित होते दिख रहे हैं
इस घटना से कुछ दिन पहले 18 दिसंबर की रात ढाका के पास हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने हत्या कर दी थी और उसके शव को पेड़ से लटकाकर जला दिया था। उस मामले की जांच में बड़ा मोड़ आया है।
दीपू पर सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया गया था कि उसने फेसबुक पर ऐसी टिप्पणी की है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। लेकिन बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि अब तक जांच में ऐसी कोई पोस्ट या आपत्तिजनक टिप्पणी का प्रमाण नहीं मिला है। कंपनी कमांडर मोहम्मद शम्सुज्जमान ने स्थानीय अखबार को बताया कि दीपू के खिलाफ ईशनिंदा के आरोप को सबूतों से साबित नहीं किया जा सका है।
इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि अफवाह किसने और किस तरह से फैलाई, जिसके बाद फैक्ट्री और आसपास के इलाके में हिंसा भड़की।
फैक्ट्री से घर तक, भीड़ ने दीपू को घसीटकर मार डाला
दीपू मेमनसिंह जिले के भालुका इलाके में स्थित पायनियर निटवेयर्स नामक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। वहीं से अफवाह फैली कि उसने ईशनिंदा की है। यह बात फैक्ट्री से बाहर भी पहुंच गई और रात करीब नौ बजे तक फैक्ट्री के बाहर बड़ी भीड़ जमा हो गई।
भीड़ फैक्ट्री के भीतर घुसी, दीपू को बाहर खींचकर ले गई और लात-घूंसों, डंडों से उसे बुरी तरह पीटा। उसके कपड़े फाड़ दिए गए और पिटाई के दौरान ही उसकी मौत हो गई। बाद में उसके गले में रस्सी डालकर शव को सड़क किनारे पेड़ से लटकाया गया और आग लगा दी गई।
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भड़की हिंसा
दीपू की हत्या ऐसे समय में हुई जब पूरे बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ा हुआ था। इंकिलाब मंच के 32 वर्षीय छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत के बाद राजधानी ढाका सहित कई शहरों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।
हादी अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ चले छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से थे और उन्हें हसीना व भारत विरोधी नेता माना जाता था। 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी। बाद में इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मृत्यु हो गई।
उनकी मौत के बाद भड़के समर्थकों ने ढाका में दो बड़े अखबारों द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों पर हमला किया और आगजनी की। आरोप है कि नेता इलियास हुसैन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों से राजबाग इलाके में इकट्ठा होने की अपील की थी, जहां इन अखबारों के दफ्तर स्थित हैं। हादी अपनी तकरीरों में इन अखबारों को हिंदू पक्षधर और सेक्युलर लाइन के लिए आलोचना का निशाना बनाते रहे थे।
निष्कर्ष: भीड़तंत्र, अफवाह और अल्पसंख्यकों की असुरक्षा
लगातार दो घटनाओं ने बांग्लादेश में भीड़तंत्र, सोशल मीडिया अफवाहों और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक तरफ अमृत मंडल की हत्या को स्थानीय लोग आपराधिक गतिविधियों की प्रतिक्रिया बता रहे हैं, वहीं दीपू चंद्र दास के मामले में शुरुआती जांच यह दिखा रही है कि धार्मिक भावनाएं भड़काने के नाम पर फैलाई गई अफवाहें जानलेवा साबित हुईं।
कानून-व्यवस्था बहाल करने, अफवाहों पर नकेल कसने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। जांच एजेंसियों के लिए यह भी अहम होगा कि वे न केवल सीधे हिंसा में शामिल लोगों को, बल्कि झूठी सूचनाएं फैलाने वालों को भी जवाबदेह ठहराएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Arvind Vishwakarma