क्रिसमस पर कैथेड्रल पहुंचे PM मोदी, राहुल ने भी दी बधाई

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क्रिसमस पर कैथेड्रल पहुंचे PM मोदी, राहुल ने भी दी बधाई

क्रिसमस पर पीएम मोदी का चर्च दौरा, नेताओं ने दी शुभकामनाएं

देशभर में क्रिसमस का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। राजधानी दिल्ली से लेकर पहाड़ी राज्यों और समुद्र तटीय इलाकों तक अलग-अलग आयोजनों के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक रंग दिखाई दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी संदेशों और कार्यक्रमों के जरिए लोगों को शुभकामनाएं दीं।

दिल्ली की कैथेड्रल चर्च में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रिसमस की सुबह दिल्ली स्थित कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्प्शन पहुंचे, जहां उन्होंने क्रिसमस मॉर्निंग प्रेयर में हिस्सा लिया। इस सर्विस के दौरान प्रार्थनाएं और कैरोल गाए गए। दिल्ली के बिशप रेव. डॉ. पॉल स्वरूप ने प्रधानमंत्री के लिए विशेष प्रार्थना की और देश में शांति, सद्भाव और करुणा की कामना की।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नागरिकों को क्रिसमस की बधाई देते हुए संदेश लिखा कि सभी को शांति, करुणा और आशा से भरे क्रिसमस की शुभकामनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यीशु मसीह की शिक्षाएं समाज में आपसी सद्भाव को मजबूत करें।

ईसाई समुदाय के कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी

पिछले कुछ वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से ईसाई समुदाय से जुड़े आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर क्रिसमस के मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था। साल 2024 में वह केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के घर डिनर पर गए और कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इन कार्यक्रमों के जरिए केंद्र सरकार और ईसाई समुदाय के बीच संवाद और संपर्क को रेखांकित किया जाता रहा है।

राहुल गांधी का वीडियो संदेश

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी क्रिसमस के अवसर पर अपना वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में वह क्रिसमस ट्री के पास खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कामना की कि यह त्योहार लोगों के जीवन में खुशी, आनंद, समृद्धि, प्रेम और करुणा लाए।

वीडियो कहां रिकॉर्ड किया गया, इसकी जानकारी साझा नहीं की गई है। राहुल गांधी हाल के दिनों में जर्मनी की यात्रा पर गए थे, जिसके बीच से उन्होंने यह त्योहार संबंधी संदेश भेजा।

अन्य राज्यों में क्रिसमस के रंग

कोलकाता और देहरादून में धार्मिक और कलात्मक रंग

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस कोलकाता के सेंट थॉमस ऑर्थोडॉक्स चर्च में आयोजित प्रार्थना सभा में शामिल हुए। यहां क्रिसमस के मौके पर प्रार्थना, भजन और सामूहिक प्रोग्राम हुए, जिनमें आम लोगों ने भी हिस्सा लिया।

उत्तarakhand के देहरादून में स्थित सेंट फ्रांसिस चर्च भी चर्चाओं में रहा। यह चर्च केवल अपनी सजावट और रौनक के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक कला के लिए भी प्रसिद्ध है। इसकी दीवारों पर बने आकर्षक चित्र द्वितीय विश्व युद्ध के एक युद्धबंदी द्वारा बनाए गए थे। कैद के दौरान बनाए गए इन चित्रों ने चर्च को कलात्मक और ऐतिहासिक पहचान दी है।

हिमाचल के पहाड़ों में पर्यटकों की भीड़

हिमाचल प्रदेश में इस बार व्हाइट क्रिसमस यानी बर्फबारी वाला क्रिसमस न के बराबर रहा, लेकिन इसके बावजूद शिमला, मनाली, कसौली, धर्मशाला और डलहौजी जैसे हिल स्टेशन पर्यटकों से भरे रहे। क्रिसमस से लेकर नए साल तक चलने वाली छुट्टियों के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट को चौबीसों घंटे खुला रखने की अनुमति दी है, ताकि देर रात पहुंचने वाले सैलानियों को भी भोजन और सुविधाएं मिल सकें।

पुरी बीच पर अनोखी सैंड आर्ट

ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने 1.5 टन सेब का इस्तेमाल करके सांता क्लॉज की अनोखी सैंड आर्ट तैयार की। यह इंस्टॉलेशन देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक बीच पर पहुंचे और तस्वीरें खींचते नजर आए। पारंपरिक रेत कला में फलों का इस्तेमाल इसे अलग और आकर्षक बनाता है।

छत्तीसगढ़ के चर्चों का ऐतिहासिक महत्व

छत्तीसगढ़ में लगभग 727 पंजीकृत चर्च हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे चर्चों को शामिल करें तो यह संख्या 900 से भी अधिक मानी जाती है। राज्य का पहला मिशनरी चर्च इम्मानुएल चर्च, 18वीं सदी में बलौदाबाजार के विश्रामपुर में स्थापित हुआ था। इसे ‘द सिटी ऑफ रेस्ट’ के नाम से जाना जाता है और यहां से ही प्रदेश में ईसाई धर्म की परंपरा का व्यापक प्रसार शुरू हुआ।

निष्कर्ष: विविधताओं के बीच साझा संदेश

क्रिसमस के इस अवसर ने देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को एक साथ उजागर किया। दिल्ली में प्रधानमंत्री की चर्च यात्रा हो या राहुल गांधी का डिजिटल संदेश, कोलकाता और देहरादून के चर्चों की परंपरा हो या हिमाचल और पुरी के पर्यटन स्थल, हर जगह प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश केंद्र में रहा। त्योहार ने एक बार फिर विविधताओं से भरे भारतीय समाज को साझा मूल्यों और आपसी सम्मान की डोर में जोड़ने का काम किया।

Ravi Yadav