भोपाल में एग्जॉटिक सब्जियों की खेती का तेजी से विस्तार
भोपाल और आसपास के इलाकों में पारंपरिक सब्जियों की जगह अब ब्रोकली, जुकीनी, लेट्यूस और अन्य एग्जॉटिक सब्जियों की खेती तेजी से बढ़ रही है। छोटे कैफे से लेकर फाइव स्टार होटलों तक हर जगह इन सब्जियों की मांग बढ़ने से खेती का रुझान बदल गया है।
सात साल में रकबा 7 एकड़ से बढ़कर 70 एकड़ से ज्यादा
उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक आर.के. सागर के अनुसार लगभग सात साल पहले भोपाल में एग्जॉटिक सब्जियों की खेती केवल 7 एकड़ में होती थी। अब यह क्षेत्रफल बढ़कर 70 एकड़ से अधिक हो चुका है। किसानों की बढ़ती दिलचस्पी, होटलों-रेस्तरां से मिल रही लगातार मांग और सरकारी योजनाओं ने इस खेती को नई रफ्तार दी है।
लांबाखेड़ा बना नर्सरी और उत्पादन हब
भोपाल से सटे लांबाखेड़ा क्षेत्र में न सिर्फ एग्जॉटिक सब्जियों की खेती हो रही है, बल्कि उनकी उन्नत पौध भी तैयार की जा रही है। यहां से सीहोर, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम समेत प्रदेश के करीब 15 जिलों के किसानों को पौधे सप्लाई किए जा रहे हैं। इससे भोपाल धीरे-धीरे एग्जॉटिक वेजिटेबल का नर्सरी और उत्पादन हब बनता दिख रहा है।
एक किसान की जमीन 2 एकड़ से बढ़कर 20 एकड़
लांबाखेड़ा के किसान किशन मौर्य इस बदलाव की मिसाल हैं। वे बताते हैं कि सात साल पहले वे केवल 2 एकड़ में एग्जॉटिक सब्जियां उगाते थे, जबकि अब उनका रकबा बढ़कर 20 एकड़ तक पहुंच गया है। उनकी उपज की मांग नासिक, रायपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों से भी आने लगी है।
कई तरह की एग्जॉटिक सब्जियां हो रही हैं तैयार
भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में ब्रोकली, जुकीनी, लेट्यूस (बर्गर लेट्यूस), लोलो रोसो, रेड कैबेज (लाल पत्ता गोभी), बोक चोय, इटेलियन बेसिल, रॉकेट लीफ, चेरी टमाटर, पार्सले और बेबी कॉर्न जैसी कई एग्जॉटिक फसलें उगाई जा रही हैं।
तकनीक और बाजार की समझ से बढ़ी आमदनी
एग्रीकल्चर और हॉर्टिकल्चर विशेषज्ञ योगेश द्विवेदी के अनुसार एग्जॉटिक सब्जियों की खेती ने साबित किया है कि सही तकनीक, सरकारी सहयोग और बाजार की समझ के साथ किसान कम जमीन में भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। उनके मुताबिक भोपाल में आया यह बदलाव आने वाले समय में युवा किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार कर रहा है।
भोपाल के आसपास के मुख्य उत्पादन क्षेत्र
एग्जॉटिक सब्जियों की खेती लांबाखेड़ा, रतुआ, रातीबड़, नीलबड़, मंडीदीप, सलामतपुर और सोनकच्छ जैसे क्षेत्रों में फैल रही है। इन इलाकों में बढ़ती पैदावार के साथ स्थानीय और बाहरी बाजारों की आपूर्ति भी मजबूत हो रही है।
निष्कर्ष
तेजी से बदलती खाद्य आदतें और होटल उद्योग की मांग ने भोपाल के किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर एग्जॉटिक सब्जियों की ओर मोड़ दिया है। सात साल में हुए रकबे के इस विस्तार ने न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाई है, बल्कि भोपाल को प्रदेश में एग्जॉटिक सब्जियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।
Ravi Yadav