भोपाल-इंदौर- महेश्वर बनेंगे क्रिएटिव सिटी, टूरिज्म में उछाल

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भोपाल-इंदौर- महेश्वर बनेंगे क्रिएटिव सिटी, टूरिज्म में उछाल

मध्यप्रदेश में पर्यटन को नया आयाम: क्रिएटिव सिटी और अद्वैत लोक की तैयारी

मध्यप्रदेश सरकार पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास और नवाचार के जरिए राज्य को वैश्विक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की तैयारी में है। भोपाल, इंदौर और महेश्वर को क्रिएटिव सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि ओंकारेश्वर को अद्वैत लोक के रूप में सजाया जा रहा है।

पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और होम स्टे से आमदनी

पर्यटन और संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के अनुसार, पिछले साल मध्यप्रदेश में 14 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल रहे। यह संख्या लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाती है, जो देश में सर्वाधिक है।

राज्य में फिलहाल 400 होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीणों ने लगभग 7 करोड़ रुपए की आय अर्जित की है। सरकार का लक्ष्य कुल 1000 होम स्टे विकसित करने का है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को और अधिक मजबूत किया जा सके।

क्रिएटिव सिटी, सांस्कृतिक लोक और बड़े प्रोजेक्ट

सरकार की प्राथमिकता भोपाल, इंदौर और महेश्वर को क्रिएटिव सिटी के रूप में विकसित करना है। साथ ही 900 करोड़ रुपए की लागत से 20 सांस्कृतिक और धार्मिक लोकों का निर्माण किया जा रहा है।

ओंकारेश्वर में अद्वैत लोक का विकास चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। पहले चरण में आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है, जबकि दूसरे चरण में अद्वैत लोक के विस्तृत निर्माण के लिए 2424 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।

निवेश, आयोजन और अवसंरचना विकास

पर्यटन निवेश को बढ़ावा देने के लिए रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव और मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट जैसे बड़े आयोजनों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से लगभग 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके लिए 500 नए होटलों के जरिए लगभग 20 हजार कमरे और 500 मार्ग सुविधा केंद्र विकसित किए जाएंगे। साथ ही समावेशी और सुरक्षित पर्यटन के लिए 50 हजार महिलाओं और बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

तीर्थ पर्यटन और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना

पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत लगभग 25 हजार तीर्थ यात्रियों को लाभ पहुंचाया गया है। वर्ष 2024-25 में 20 ट्रेनों के माध्यम से 16 हजार तीर्थयात्रियों को यात्रा करवाई गई। अगले वर्ष 8 ट्रेनों से 6400 यात्रियों को तीर्थदर्शन कराने की योजना है।

अब तक 25 विमानों के जरिए 800 से अधिक यात्री तीर्थ यात्रा कर चुके हैं, जिससे हवाई तीर्थ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

धार्मिक-पौराणिक पहल: रामचंद्र वनगमन पथ और कृष्ण पाथेय

सरकार ने भगवान राम को समर्पित श्री रामचंद्र वनगमन पथ की परिकल्पना को जमीन पर उतारने की दिशा में कार्य किया है। इसके साथ ही भगवान कृष्ण पर केंद्रित श्री कृष्ण पाथेय योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान दोनों को मजबूती मिलेगी।

साहित्यिक गजेटियर और संग्रहालयों की नई श्रृंखला

मंत्री लोधी ने बताया कि पूरे प्रदेश के जिलों के साहित्यिक गजेटियर तैयार किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में 15 जिलों के साहित्यिक गजेटियर पूरा किए जा चुके हैं।

उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, सागर, पन्ना, जबलपुर, महेश्वर सहित कई स्थानों पर स्थानीय विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए संग्रहालयों की नई श्रृंखला विकसित की जा रही है। संस्कृति के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने पिछले दो वर्षों में आठ विश्व कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। इसी अवधि में 132 शासन-संरक्षित मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया है।

यूनेस्को विश्व धरोहर और नई संभावनाएं

भारत के कुल 69 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में से 15 मध्यप्रदेश में स्थित हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 के लिए मध्यप्रदेश के 15 और स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है।

ओरछा, मांडू और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए नामांकन दस्तावेज भेजे जा चुके हैं। भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट के लिए भी शीघ्र ही नॉमिनेशन डोजियर प्रस्तुत किया जाएगा।

कन्वेंशन सेंटर, होटल, रिसॉर्ट और कौशल विकास

भोपाल स्थित कुशाभाऊ कन्वेंशन सेंटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिस पर लगभग 99.38 करोड़ रुपए खर्च होंगे। उज्जैन में हेरिटेज होटल सम्राट विक्रमादित्य, शहडोल में सरसी आइलैंड और पचमढ़ी में होटल निलाम्बर स्काई लाइन का संचालन शुरू किया गया है।

राज्य में तीन नए फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट स्थापित किए गए हैं। चंदेरी में देश का पहला क्राफ्ट टूरिज्म विलेज विकसित किया गया है, जबकि महेश्वर और कुक्षी घाट में भी कार्य प्रारंभ हो चुका है। पिछले दो वर्षों में 8 हजार से अधिक कमरों वाले नए होटल और रिसॉर्ट विकसित किए गए हैं।

निष्कर्ष: पर्यटन से मजबूत होती अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान

मध्यप्रदेश सरकार पर्यटन, संस्कृति और विरासत संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाते हुए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। क्रिएटिव सिटी, अद्वैत लोक, धार्मिक पथ, होम स्टे, नए होटल और यूनेस्को धरोहर प्रयासों के माध्यम से न केवल राज्य की पहचान मजबूत हो रही है, बल्कि रोजगार, निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिल रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में पर्यटन को राज्य की जीडीपी का प्रमुख स्तंभ बनाया जाए।

Pushpendra Chaubey