भोपाल के बड़े तालाब में अब डल झील जैसे शिकारे
भोपाल के बड़े तालाब में अब श्रीनगर की डल झील जैसा अनुभव मिल सकेगा। यहां मध्यप्रदेश पर्यटन निगम ने 20 नए शिकारे शुरू किए हैं, जिनका औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इसके साथ ही राजधानी को वॉटर टूरिज्म के नए हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने खुद शिकारे की सैर की
शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर शिकारों को रवाना किया और स्वयं भी शिकारे में बैठकर बड़े तालाब की सैर की। उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
सैर के दौरान मुख्यमंत्री ने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे और फलों का नाश्ता किया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से साड़ी और जैकेट भी खरीदी, जिससे इस नए जल-पर्यटन मॉडल और स्थानीय उत्पादों को प्रत्यक्ष समर्थन का संदेश गया।
किराया, समय और सुविधाएं
हर शिकारे में चार से छह लोग बैठ सकते हैं। चार लोगों के लिए 20 मिनट की सवारी का किराया 300 रुपये रखा गया है, जबकि छह लोगों के लिए 20 मिनट का किराया 450 रुपये होगा। इन शिकारों का आनंद सुबह 9 बजे से सूर्यास्त तक लिया जा सकेगा।
सैर के दौरान नाविक यात्रियों को बड़े तालाब के इतिहास, भोपाल की विरासत और आसपास के पर्यावरण से जुड़ी जानकारी भी देंगे। इससे पर्यटकों को मनोरंजन के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलेगा।
पर्यावरण हितैषी तकनीक से तैयार शिकारे
सभी 20 शिकारे आधुनिक और प्रदूषण रहित तकनीक से बनाए गए हैं। इनका निर्माण फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन (एफआरपी) और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से किया गया है, जो पानी के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती। इससे तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता सुरक्षित रहेगी।
ये शिकारे एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा तैयार किए गए हैं, जिसने इससे पहले केरल, पश्चिम बंगाल और असम में भी पर्यटकों के लिए शिकारे बनाए हैं। इस तकनीक से स्थानीय झीलों को बिना प्रदूषण बढ़ाए पर्यटन के लिए उपयोग में लाने की कोशिश की गई है।
स्थानीय उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट और बर्ड वॉचिंग
शिकारे सिर्फ सैर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें तैरते हुए बाजार और खानपान के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इन पर हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, स्थानीय व्यंजन, ऑर्गेनिक सब्जियां और फल खरीदने की सुविधा होगी।
इसके साथ ही बर्ड वॉचिंग के लिए भी व्यवस्था की गई है। सवारी के दौरान दूरबीन की मदद से पर्यटक तालाब और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद पक्षियों को नजदीक से देख सकेंगे और साथ ही भोपाल के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।
डल झील की तर्ज पर भोपाल का वॉटर टूरिज्म
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि ये शिकारे कश्मीर की डल झील की तर्ज पर तैयार किए गए हैं, ताकि भोपाल आने वाले पर्यटकों को वैसा ही अनुभव मिल सके। मध्यप्रदेश पर्यटन निगम का लक्ष्य राजधानी को वॉटर-टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करना है, क्योंकि यहां पहले से ही बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी पर्यटक बोट क्लब आते रहे हैं।
इससे पहले 13 जून 2024 को नगर निगम ने प्रायोगिक रूप से एक शिकारा चलाया था। अब एक साथ 20 शिकारे उतारकर इस पहल को विस्तार दिया गया है।
एनजीटी के आदेश के बाद नई व्यवस्था
करीब दो साल पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब), नर्मदा नदी और प्रदेश की अन्य जलाशयों में क्रूज और मोटरबोट संचालन पर रोक लगा दी थी। डीजल व उसके इंजन से निकलने वाले उत्सर्जन को इंसानों और जलीय जीवों के लिए खतरनाक मानते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया।
एनजीटी के आदेश के बाद बड़े तालाब में चलने वाला लेक प्रिंसेज क्रूज, जलपरी मोटरबोट और लगभग 20 अन्य मोटरबोटें बंद कर दी गई थीं। इससे रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटक मायूस हो रहे थे और केवल सामान्य नावों के माध्यम से ही तालाब की सैर कर पा रहे थे। अब इन नए शिकारों के शुरू होने से पर्यटकों को एक सुरक्षित और आकर्षक विकल्प मिल गया है।
राजनीतिक उपस्थिति और विपक्ष की भूमिका
कार्यक्रम के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के सभी विधायकों को आमंत्रित किया गया था। हालांकि कांग्रेस की ओर से सिर्फ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ही कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जब भी सरकार कोई अच्छा काम करती है तो उसकी सराहना की जानी चाहिए, चाहे राजनीतिक मतभेद कुछ भी हों।
शिकारे की पारंपरिक पहचान और भोपाल में महत्व
शिकारा सामान्यतः लकड़ी की नाव होती है, जो विशेष रूप से श्रीनगर की डल झील के लिए प्रसिद्ध है। इसका उपयोग लोगों के आवागमन, पर्यटन और सामान ढोने जैसे कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है। आमतौर पर एक शिकारा में आधा दर्जन लोग बैठ सकते हैं और इसे पीछे बैठे चालक द्वारा चलाया जाता है।
देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक डल झील में शिकारों की सवारी के लिए जाते हैं। अब भोपाल के बड़े तालाब में ऐसे ही शिकारे शुरू होने से यहां आने वाले स्थानीय और बाहरी दोनों तरह के पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा और राजधानी का पर्यटन परिदृश्य और समृद्ध होगा।
निष्कर्ष: पर्यावरण-सुरक्षा के साथ पर्यटन को बढ़ावा
बड़े तालाब में 20 पर्यावरण हितैषी शिकारों की शुरुआत से भोपाल को नया पर्यटन आकर्षण मिला है। एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप प्रदूषण रहित तकनीक अपनाकर न केवल झील की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प और खाद्य संस्कृति को भी नया मंच मिला है। आने वाले समय में यह पहल राजधानी को प्रमुख वॉटर-टूरिज्म गंतव्य के रूप में स्थापित कर सकती है।
Pushpendra Chaubey