भोपाल के खानूगांव में दूषित पानी की सप्लाई, 22 वार्ड डेंजर जोन में
कुएं में सीवेज घुसने से 2000 लोगों तक गंदा पानी
भोपाल के खानूगांव क्षेत्र में लंबे समय से सीवेज का पानी पेयजल स्रोत में मिल रहा है। वार्ड की पार्षद रेहाना सुल्तान के प्रतिनिधि मोहम्मद जहीर के अनुसार, सीवेज का पानी सीधे एक कुएं में जा रहा है और वहीं से करीब 2000 लोगों को पानी सप्लाई किया जा रहा है। इस संबंध में लगभग 15 दिन पहले लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
स्थानीय प्रतिनिधि का कहना है कि अधिकारी अब फोन कॉल भी रिसीव नहीं कर रहे, जिसके कारण क्षेत्र के लोग मजबूरन गंदा पानी पी रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो दूषित पानी के कारण बड़ा हादसा हो सकता है और वे जल्द ही विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।
इंदौर जैसी त्रासदी का खतरा और पुरानी पाइपलाइन की समस्या
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत का मामला सामने आ चुका है। इसी तरह की आशंका अब भोपाल में भी जताई जा रही है, जहां कई स्थानों पर पेयजल सप्लाई में सीवेज का पानी मिलना सामने आया है। नगर निगम की जांच में भी अलग-अलग लाइनों में सीवेज और पीने के पानी के मिश्रण की पुष्टि हुई है, जिसके बाद वाल्व और लीकेज की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है।
जांच में यह भी पता चला है कि भोपाल के करीब 22 वार्ड ऐसे हैं, जहां लगभग 400 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइपलाइन सीवेज लाइन के समानांतर या साथ-साथ बिछी हुई है। इनमें नवीबाग और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र जैसे बड़े इलाकों की लगभग 5 लाख की आबादी शामिल है।
पुरानी लोहे की पाइपलाइन और बड़े निवेश की जरूरत
नगर निगम के अनुसार, इन क्षेत्रों में बिछी अधिकांश पाइपलाइन पुरानी लोहे की है, जो अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुकी है। इसी वजह से यहां लीकेज की घटनाएं सबसे ज्यादा देखी जा रही हैं। इस जर्जर पाइपलाइन को बदलने के लिए निगम को लगभग 500 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई जा रही है। शहर के कुल 2.71 लाख नल कनेक्शन में से लगभग 75 हजार कनेक्शन की लाइनों को बदलना जरूरी माना गया है।
इसके साथ ही अमृत-2 योजना के तहत शहर में 750 किलोमीटर नई पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है, ताकि पुरानी लाइनों के कारण होने वाले रिसाव और दूषित पानी की समस्या को कम किया जा सके।
पांच जोन में सबसे ज्यादा परेशानी
रिपोर्ट के अनुसार, शहर के पांच जोन में पानी की पाइपलाइन काफी पुरानी हो चुकी है और वहीं पर दिक्कत ज्यादा सामने आ रही है। जोन-3 में बाबू जगजीवन राम, नारियलखेड़ा और गीतांजलि, जोन-4 में जेपी नगर, मोतीलाल नेहरू और इब्राहिम गंज, जोन-5 में रॉयल मार्केट, बाग मुंशी हुसैन, शाहजहांनाबाद, लाल बहादुर शास्त्री, मोती मस्जिद और इस्लामपुर शामिल हैं।
जोन-16 में गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, राजीव गांधी, भोपाल मेमोरियल, भानपुर और जोन-17 में बड़वाई, छोला, रूसल्ली, करोंद और नवीबाग जैसे इलाकों में भी पाइपलाइन की समस्या गंभीर बताई गई है। इसके अलावा देवकी नगर, अंबेडकर नगर और चौकसे नगर में भी लीकेज की समस्या सबसे अधिक है।
सैंपल जांच और पुरानी बस्तियों की संरचनात्मक दिक्कत
शहर में अब तक पेयजल के एक हजार से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं। नगर निगम का दावा है कि इनमें से एक भी सैंपल जांच में फेल नहीं हुआ है। हालांकि, पुराने भोपाल के ज्यादातर इलाकों में जगह की कमी के कारण सीवेज लाइन के साथ ही पानी की पाइपलाइन बिछाई गई है। लोहे की पुरानी पाइपलाइन होने की वजह से इन क्षेत्रों में लीकेज की समस्या बढ़ गई है, जो भविष्य में दूषित पानी के खतरे को जन्म दे सकती है।
पानी की वर्तमान और भविष्य की जरूरत
नगर निगम के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2040 में भोपाल में प्रतिदिन लगभग 514 मिलियन लीटर पीने के पानी की आवश्यकता होगी। इस भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अगले तीन साल में जलापूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगभग 448 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
वर्तमान में शहर में प्रतिदिन करीब 450 मिलियन लीटर पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो आवश्यकता के अनुरूप बताया गया है। फिलहाल लगभग 85 प्रतिशत क्षेत्र, मुख्य रूप से वैध कॉलोनियां, नगर निगम की पाइपलाइन से पानी प्राप्त कर रहे हैं। अवैध कॉलोनियों में निगम द्वारा पानी की सप्लाई नहीं की जाती।
शहर में इस समय 2.71 लाख वैध नल कनेक्शन हैं, जिन्हें बढ़ाकर लगभग 3.10 लाख तक करने की योजना है। कनेक्शन बढ़ने और नेटवर्क विस्तार के बाद प्रतिदिन 514 मिलियन लीटर पानी सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया है।
खानूगांव और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मांग है कि दूषित पानी की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि इंदौर जैसी त्रासदी दोबारा न दोहराई जाए और पेयजल व्यवस्था सुरक्षित व विश्वसनीय बन सके।
Amit Pateria