कड़ाके की सर्दी से मध्यप्रदेश बेहाल, कई जिलों में स्कूल बंद और यातायात प्रभावित
मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे के कारण आम जनजीवन पर बड़ा असर पड़ा है। राज्य के 24 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है, जबकि 4 जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। शेष 27 जिलों में अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, जिसके कारण वहां के बच्चों को तेज ठंड में नियमित समय पर स्कूल जाना पड़ रहा है।
कोहरे और ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें, कई जगह विजिबिलिटी बेहद कम
राजधानी भोपाल में सोमवार सुबह दृश्यता केवल 20 मीटर तक सीमित रही और कोहरा सुबह 11 बजे तक छाया रहा। घने कोहरे और ठंड की वजह से दिन और रात, दोनों समय के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पचमढ़ी में बर्फ जमने की जानकारी दी गई, जबकि नौगांव प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान मात्र 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
सोमवार को अधिकतम तापमान के आंकड़ों में भोपाल और श्योपुर में 18.4 डिग्री, दतिया और खजुराहो में 18.6 डिग्री, नौगांव में 19 डिग्री, रीवा में 19.4 डिग्री, दमोह और टीकमगढ़ में 19.5 डिग्री, ग्वालियर और पचमढ़ी में 19.6 डिग्री और सीधी में 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नरसिंहपुर में 20.2, मलाजखंड और सतना में 20.3, जबलपुर में 20.4, नर्मदापुरम में 21, धार में 21.4, उमरिया में 21.5, सागर में 21.6, इंदौर और शिवपुरी में 22, रतलाम में 22.2 और उज्जैन में 22.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
कोहरे का असर 21 से अधिक जिलों में, सड़क हादसा भी
घने कोहरे का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई दिया। खजुराहो, गुना, नर्मदापुरम, रायसेन, दमोह, सागर, जबलपुर, नौगांव, दतिया, धार, ग्वालियर, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन, रीवा, सतना, श्योपुर, बालाघाट, उमरिया, सीधी, मंडला और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में कोहरा छाया रहा।
बड़वानी में सोमवार सुबह घने कोहरे के कारण दूध टैंकर पलट गया, जिसमें हेल्पर की मौके पर मौत हो गई।
इंदौर में हवाई यातायात पर असर, दिल्ली रूट की ट्रेनें भी लेट
इंदौर में बदलते मौसम और घने कोहरे ने लगातार तीसरे दिन हवाई सेवाओं को प्रभावित किया। सोमवार सुबह इंदौर एयरपोर्ट पर पहली फ्लाइट सामान्य समय 6:40 बजे की बजाय 8:54 बजे लैंड हो सकी। घने कोहरे के कारण सुबह की 10 से अधिक उड़ानें एक से तीन घंटे की देरी से संचालित हुईं।
रेल यातायात भी इससे अछूता नहीं रहा। दिल्ली से आने वाली ट्रेनों के समय पर खासा असर देखा गया। मालवा एक्सप्रेस, सचखंड एक्सप्रेस, शताब्दी समेत कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चलीं। मालवा एक्सप्रेस अपने तय समय से 3 घंटे से अधिक लेट रही।
न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे, कई शहर जमने के करीब
सर्द हवाओं के चलते अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। दतिया में 4.4 डिग्री, राजगढ़ और खजुराहो में 5.4 डिग्री, मलाजखंड में 5.5 डिग्री, उमरिया में 5.7 डिग्री और मंडला तथा पचमढ़ी में 5.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों में भोपाल का न्यूनतम तापमान 6.8 डिग्री, इंदौर 8.6 डिग्री, ग्वालियर 6.4 डिग्री, उज्जैन 9.5 डिग्री और जबलपुर 9 डिग्री सेल्सियस रहा।
इस बार नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने तोड़े रिकॉर्ड
मध्यप्रदेश में इस बार नवंबर और दिसंबर की सर्दी ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिए। जानकारी के अनुसार, नवंबर में 84 साल की सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि जनवरी में भी प्रदेश में कड़ाके की ठंड बने रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी में प्रदेश के कई हिस्सों में माइनस के आसपास तापमान गिरने के घटनाक्रम पहले भी दर्ज हो चुके हैं और इस बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा और शीतलहर की स्थितियां रहने की आशंका है।
जनवरी क्यों रहती है ठंड के लिए खास
मौसम विभाग के मुताबिक, जैसे मानसून के चार महीनों (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से जुलाई और अगस्त सबसे अहम माने जाते हैं और इन्हीं दो महीनों में लगभग 60 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश हो जाती है, उसी तरह कड़ाके की ठंड के लिए दिसंबर और जनवरी सबसे महत्वपूर्ण महीने हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से सर्द हवाएं अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश की ओर आती हैं, जिसके कारण तापमान में तेज गिरावट और शीतलहर वाली स्थिति बनती है।
पिछले 10 साल के आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर जनवरी में कई बार मावठा (ठंडी फुहार या बारिश) भी दर्ज की जाती है। पिछले साल जनवरी में कई जिलों में बारिश हुई थी और इस बार नए साल की शुरुआत में ही कई स्थानों पर बादल छाए रहे।
प्रदेश के बड़े शहरों में जनवरी की ऐतिहासिक सर्दी
भोपाल में शून्य के करीब पारा
राजधानी भोपाल में जनवरी के महीने में अक्सर कड़ाके की ठंड पड़ती है। यहां दिन में कभी-कभी हल्की गर्माहट और बारिश का ट्रेंड भी देखा गया है। 18 जनवरी 1935 को रात का तापमान रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वहीं 26 जनवरी 2009 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
पिछले 10 वर्षों में से 7 साल जनवरी में बारिश दर्ज की जा चुकी है। 24 घंटे में सबसे अधिक 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी, जबकि जनवरी 1948 में एक महीने में कुल 3.8 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
इंदौर में तापमान माइनस 1.1 डिग्री तक गया
इंदौर में जनवरी की सर्दी का रिकॉर्ड माइनस तापमान तक पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 को यहां का न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड माना जाता है। 27 जनवरी 1990 को दिन का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस रहा।
इंदौर में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है, जब 3 इंच से अधिक पानी गिरा था। उसी वर्ष जनवरी माह में कुल लगभग 4 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
जबलपुर में भी कड़ाके की सर्दी और बारिश
जबलपुर में भी जनवरी में ठंड और बारिश का मजबूत ट्रेंड देखा जाता है। 7 जनवरी 1946 को यहां रात का न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। 7 जनवरी 1973 को दिन का अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
जबलपुर में 24 जनवरी 1919 को 24 घंटे में 2.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी और उसी वर्ष जनवरी में कुल 8 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा इलाका
उत्तर से आने वाली सर्द हवाओं की वजह से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका माना जाता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड रहता है। पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड के अनुसार, 2018 में ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री तक चला गया था।
ग्वालियर में जनवरी के महीने में बारिश भी होती रही है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच 9 वर्षों में जनवरी में बारिश दर्ज की गई। 24 घंटे में सर्वाधिक 2.1 इंच बारिश 8 जनवरी 1926 को रिकॉर्ड की गई, जबकि 1948 में जनवरी माह में कुल 3.1 इंच वर्षा हुई थी।
उज्जैन में जीरो डिग्री का रिकॉर्ड
उज्जैन में भी उत्तरी हवाओं का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसकी वजह से यहां कड़ाके की सर्दी पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को यहां का न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। पिछले 10 वर्षों में जनवरी में तापमान 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है।
उज्जैन में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है, जब लगभग डेढ़ इंच के करीब (सवा इंच) पानी गिरा था। वर्ष 1994 में जनवरी माह में कुल 2.2 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
निष्कर्ष: आगे भी तेज ठंड और कोहरे की आशंका
मध्यप्रदेश में इस समय ठंड, घने कोहरे और शीतलहर का दौर जारी है। कई जिलों में स्कूल बंद करने या समय बदलने जैसे कदम उठाए गए हैं, जबकि परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हैं। मौसम विभाग के अनुमान और पिछले वर्षों के रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि जनवरी के शेष दिनों में भी प्रदेश को कड़ाके की सर्दी, घने कोहरे और बीच-बीच में बारिश का सामना करना पड़ सकता है।
Pushpendra Chaubey