भोपाल में रजक समाज का बड़ा प्रदर्शन: पूरे प्रदेश में एससी दर्जे की मांग
संयुक्त मोर्चा रजक समाज के नेतृत्व में गुरुवार को राजधानी भोपाल में एक बड़े आंदोलन का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सभा स्थल पर धरना दिया और स्पष्ट किया कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं आकर उनकी बात नहीं सुनते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने एहतियाती तौर पर बैरिकेडिंग की है, वहीं दोपहर बाद सीएम हाउस की ओर कूच करने की भी चेतावनी दी गई है।
एक प्रदेश में दो तरह का आरक्षण: सामाजिक अन्याय
संयुक्त मोर्चा के वरिष्ठ संयोजक कैलाश नाहर ने इस असमानता को सामाजिक अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में रजक समाज को केवल भोपाल, सीहोर और रायसेन, इन तीन जिलों में अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा प्राप्त है, जबकि प्रदेश के शेष 52 जिलों में इसी समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है। नाहर ने राज्य शासन से पूरे प्रदेश में एक समान रूप से अनुसूचित जाति का दर्जा लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी मांगों को लेकर समाज ने 400 से 500 किलोमीटर की पैदल यात्राएं की हैं और मुख्यमंत्री निवास पर ओएसडी से मिलकर भी अपनी बात रखी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इस बार बिना मुख्यमंत्री की अनुमति और ठोस आश्वासन के वे आंदोलन स्थल से नहीं हटेंगे।
क्षेत्रीय बंधन हटाने की मांग और 70-75 साल का संघर्ष
युवा प्रदेश संयोजक मोनू लक्ष्मण रजक ने समाज की मुख्य मांग को 'क्षेत्रीय बंधन हटाने' की बताया। उन्होंने कहा कि देश के आजाद होने के बावजूद रजक समाज आज भी बंधनों में जकड़ा हुआ महसूस करता है क्योंकि उनकी श्रेणी अनुसूचित जाति में होने के बावजूद सरकार ने क्षेत्रीय बंधन लगा रखा है। मोनू ने बताया कि यह संघर्ष आज का नहीं, बल्कि पिछले 70-75 वर्षों से चला आ रहा है, जिसे समाज के वरिष्ठजन और अब युवा पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को कई बार आमंत्रित किया गया, लेकिन समाज को समय नहीं दिया गया। मोनू ने यह भी चेतावनी दी कि यद्यपि वे शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र हुए हैं और प्रशासन भी बैरिकेड लगाकर मौजूद है, यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन का स्वरूप और बड़ा हो सकता है।
Vivek Singh