भोपाल में दिसंबर से मेट्रो सेवा, शुरुआती सात दिन मुफ्त यात्रा
राजधानी भोपाल में मेट्रो का कमर्शियल रन दिसंबर में शुरू होने वाला है, जिसके बाद आम यात्री नियमित रूप से मेट्रो में सफर कर सकेंगे। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अंतिम निरीक्षण कर ग्रीन सिग्नल दे चुकी है। इसके साथ ही किराया संरचना और टिकटिंग सिस्टम को लेकर भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
किराया संरचना: 7 दिन फ्री, फिर छूट के साथ सफर
अधिकारियों के अनुसार, भोपाल मेट्रो में शुरुआत के सात दिन तक यात्रियों के लिए यात्रा पूरी तरह मुफ्त रहेगी। इसके बाद तीन महीने तक टिकटों पर क्रमशः 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट अवधि समाप्त होने के बाद न्यूनतम किराया 20 रुपए और अधिकतम किराया 80 रुपए तय होने की संभावना है। एमपी नगर स्टेशन पर प्रस्तावित किराया सूची भी चस्पा की जा चुकी है, हालांकि मेट्रो कॉरपोरेशन ने आधिकारिक रूप से किराया सार्वजनिक नहीं किया है।
इंदौर मेट्रो के लिए 31 मई को लागू किए गए किराया मॉडल को ही भोपाल में भी अपनाने की बात कही जा रही है। अधिकतम 80 रुपए का किराया तब लागू होगा जब ऑरेंज लाइन का पूरा रूट संचालन के लिए तैयार हो जाएगा।
ऑरेंज लाइन रूट और फेजवार काम
भोपाल में मेट्रो की ऑरेंज लाइन का कुल प्रस्तावित रूट लगभग 16 किलोमीटर है, जो एम्स से करोंद तक जाएगा। वर्तमान में 6.22 किलोमीटर का प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच तैयार किया गया है और इसी हिस्से पर मेट्रो को चलाया जाना है।
पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेज सुभाषनगर से करोंद तक बनाया जा रहा है, जिसे पूरा होने में अगले दो से तीन साल का समय लगने का अनुमान है।
ट्रायल रन और मेट्रो की रफ्तार
सुभाषनगर से एम्स तक के ट्रैक पर मेट्रो कोच का ट्रायल रन जारी है। ट्रायल के दौरान मेट्रो की न्यूनतम रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा और अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति पर भी मेट्रो को दौड़ाया जा रहा है, ताकि तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच की जा सके।
ऑटोमैटिक सिस्टम अटका, अब मैन्युअल टिकटिंग व्यवस्था
भोपाल मेट्रो में टिकट सिस्टम फिलहाल ऑनलाइन ऑटोमैटिक न होकर मैन्युअल रहेगा। यह व्यवस्था ट्रेन की तरह होगी, जहां यात्री काउंटर से टिकट लेकर प्रवेश कर सकेंगे। इंदौर मेट्रो में भी इस समय यही सिस्टम लागू है।
भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने की जिम्मेदारी तुर्किए की कंपनी ‘असिस गार्ड’ को दी गई थी, जिसमें किराया कार्ड के जरिए भुगतान और गेट के ऑटोमैटिक खुलने-बंद होने का पूरा सिस्टम शामिल था। यह कंपनी सिस्टम के रखरखाव की भी जिम्मेदार थी।
‘असिस गार्ड’ का टेंडर रद्द, नई कंपनी के लिए प्रक्रिया जारी
‘असिस गार्ड’ से जुड़ा मामला पिछले चार महीने से चर्चा में था। अगस्त में इस कंपनी का टेंडर रद्द कर दिया गया और अब नई कंपनी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पूरी प्रक्रिया दो से तीन महीने में पूरी होने की उम्मीद है।
इसी विवाद के कारण इंदौर में पहले से लग रहा ऑटोमैटिक सिस्टम अधूरा रह गया और वहां पिछले छह महीनों से ट्रेन जैसा मैन्युअल टिकट सिस्टम लागू है। मेट्रो के कर्मचारी ही टिकट वितरण और जांच का काम संभाल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब यही विकल्प भोपाल मेट्रो के लिए भी व्यावहारिक है, इसलिए मैन्युअल टिकट सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है और उसके लिए आवश्यक स्टाफ तैनात किया जा रहा है।
निष्कर्ष: चरणबद्ध शुरुआत, भविष्य में ऑटोमैटिक सिस्टम की संभावना
कुल मिलाकर भोपाल जल्द ही मेट्रो सिटी के रूप में एक नया कदम बढ़ाने जा रहा है। शुरुआती चरण में यात्रियों को सात दिन मुफ्त यात्रा और उसके बाद रियायती किराया का लाभ मिलेगा। फिलहाल मैन्युअल टिकटिंग सिस्टम से संचालन शुरू किया जाएगा, जबकि भविष्य में नई कंपनी के चयन के बाद ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू किए जाने की संभावना बनी रहेगी।
Gulzar Ahmad