भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन आज से, 8 स्टेशन पर सीमित ट्रिप, पार्किंग संकट

· 1 min read
भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन आज से, 8 स्टेशन पर सीमित ट्रिप, पार्किंग संकट

भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू, शहर बना देश का 26वां मेट्रो शहर

भोपाल में मेट्रो रेल की कमर्शियल सेवा आज 21 दिसंबर से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर इसका उद्घाटन किया। इस शुरुआत के साथ भोपाल देश का 26वां शहर बन गया है, जहां मेट्रो की कमर्शियल सेवा शुरू हुई है।

कमर्शियल ऑपरेशन की टाइमिंग और ट्रिप

मेट्रो का कमर्शियल रन आज सुबह 9 बजे एम्स स्टेशन से शुरू हुआ। मेट्रो सेवा सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी और पूरे दिन में कुल 17 ट्रिप संचालित की जाएंगी। इनमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 9 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। शुरुआती चरण में हर 75 मिनट पर एक ट्रेन उपलब्ध होगी। यह फ्रीक्वेंसी सुरक्षा, परिचालन और संभावित यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए तय की गई है, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है।

कौन-कौन से स्टेशन होंगे कनेक्ट

इस चरण में कुल 8 स्टेशन—एम्स, अलकापुरी, डीआरएम, आरकेपीएम, एमपी नगर, डीबी मॉल, केंद्रीय स्कूल और सुभाषनगर—पर से यात्री मेट्रो में सफर कर सकेंगे। मेट्रो रूट पर चलते समय यात्रियों को स्टेशनों पर ऑडियो अनाउंसमेंट के जरिए अगला स्टेशन और दरवाजे किस ओर खुलेंगे, इसकी जानकारी दी जाएगी।

यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन सुविधाएं

यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए हर स्टेशन पर एक समय में अधिकतम 500 यात्रियों को प्रवेश दिया जाएगा, ताकि प्लेटफॉर्म और कॉरिडोर पर अत्यधिक भीड़ न हो। सभी स्टेशनों पर एस्केलेटर, लिफ्ट और रैंप की व्यवस्था की गई है। सुभाषनगर, डीबी मॉल और एमपी नगर स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज बनाए गए हैं, ताकि दोनों ओर से आने-जाने वाले यात्री आसानी से स्टेशन तक पहुंच सकें।

रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन को फुट ओवरब्रिज के माध्यम से रेलवे स्टेशन से जोड़ा गया है, जिससे रेल यात्रियों को सीधे मेट्रो तक पहुंचने की सुविधा मिलती है। इसी तरह एम्स स्टेशन पर भी फुट ओवरब्रिज के जरिए यात्रियों की एंट्री को एम्स कैंपस तक जोड़ा गया है, ताकि उन्हें अतिरिक्त घूमना न पड़े।

प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और सुरक्षा प्रबंधन

सभी स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) लगाए गए हैं। ट्रेन रुकने और उसके दरवाजों के प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर के साथ सही तरीके से अलाइन होने के बाद ही पीएसडी और कोच के दरवाजे एक साथ खुलते हैं। इससे यात्रियों के ट्रैक पर गिरने की आशंका कम होती है और समय प्रबंधन बेहतर बनता है।

टिकटिंग सिस्टम और किराया संरचना

फिलहाल सभी स्टेशनों पर टिकट ऑनलाइन के बजाय मैन्युअल रूप से काउंटर से दिए जाएंगे। यात्री को सफर से पहले टिकट काउंटर से टिकट लेकर ही मेट्रो में प्रवेश करना होगा। किराया संरचना तीन जोन में विभाजित है और कुल 8 स्टेशनों को शामिल किया गया है। पहले दो स्टेशनों तक का किराया 20 रुपये, 3 से 5 स्टेशनों के लिए 30 रुपये और 6 से 8 स्टेशनों के लिए 40 रुपये रखा गया है।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई यात्री डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन तक जाता है तो उसे 20 रुपये चुकाने होंगे, जबकि डीबी मॉल से एम्स तक की यात्रा करने पर 40 रुपये किराया देना होगा। इससे पहले इंदौर में 31 मई को मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था, जहां शुरुआती 7 दिन यात्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी और एक महीने तक किराए में 25% से 75% तक की छूट मिली थी। ऐसी उम्मीद थी कि भोपाल में भी यह मॉडल अपनाया जाएगा, लेकिन यहां किराए में ऐसी कोई छूट नहीं दी गई।

पार्किंग की कमी और यात्रियों की चिंता

मेट्रो शुरू होने से शहर में आधुनिक परिवहन की सुविधा तो मिल गई है, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था बड़ा चुनौतीपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। सभी 8 स्टेशनों पर औपचारिक पार्किंग उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को अपनी गाड़ियां दूसरों की पार्किंग या सड़क किनारे खड़ी करनी पड़ेंगी।

जहां प्राइवेट पार्किंग उपलब्ध है, वहां पार्किंग चार्ज कई मामलों में मेट्रो के किराए से भी अधिक है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। कुछ स्टेशनों जैसे सुभाषनगर, डीबी मॉल और एम्स पर सीमित संख्या में वाहन खड़े हो सकते हैं, लेकिन केंद्रीय स्कूल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी में पर्याप्त जगह नहीं है। मेट्रो कॉरपोरेशन आसपास के क्षेत्रों को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा है, हालांकि वहां भी अधिकतम कुछ गाड़ियों को ही स्थान मिल सकेगा।

मेट्रो एमडी कृष्ण एस. चैतन्य के अनुसार टू-व्हीलर पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है और प्रयास है कि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।

भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति

भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। एम्स से सुभाषनगर के बीच 6.22 किलोमीटर के हिस्से को प्राथमिकता कॉरिडोर के रूप में 2018 में शुरू किया गया था। सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन तक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशनों पर कुछ काम अभी जारी है। रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं।

भोपाल में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो यात्रा की थी। हाल ही में हुए औपचारिक शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सुभाषनगर से एम्स तक मेट्रो यात्रा की, जिसमें 30 स्कूली बच्चों सहित करीब 300 लोग शामिल रहे।

निष्कर्ष

भोपाल मेट्रो की शुरुआत से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। सीमित फ्रीक्वेंसी, मैन्युअल टिकटिंग और पार्किंग की कमी जैसी चुनौतियां फिलहाल मौजूद हैं, लेकिन परियोजना के आगे बढ़ने के साथ सुविधाओं के विस्तार और सुधार की संभावना जताई जा रही है। इससे शहरवासियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक यात्रा का विकल्प मिलने की उम्मीद है।

Sharad Shrivastava