भोपाल मेट्रो कमर्शियल रन की तैयारियां अंतिम चरण में
भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दिसंबर में कमर्शियल रन शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही शहर को अपनी पहली मेट्रो सेवा नियमित रूप से मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अब उद्घाटन के स्वरूप और तारीख को लेकर अंतिम मंथन चल रहा है।
उद्घाटन की तारीख और कार्यक्रम के दो विकल्प
भोपाल मेट्रो के कमर्शियल रन की संभावित तारीख 21 दिसंबर तय की गई है, हालांकि 20 दिसंबर को भी शुरुआत की संभावना बनी हुई है। सरकार और प्रशासन दो प्लान पर काम कर रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल आते हैं तो वे तीन कोच की फूलों से सजी मेट्रो में बैठकर सुभाष नगर से एम्स तक का सफर कर सकते हैं और मार्ग का निरीक्षण करेंगे।
दूसरा विकल्प यह है कि इंदौर मेट्रो की तरह ही भोपाल मेट्रो का उद्घाटन भी वर्चुअल तरीके से किया जाए। ऐसे में कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मेट्रो में सफर करेंगे। आयोजन को लेकर बीजेपी संगठन, राज्य सरकार और अफसरों के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं।
सुरक्षा मंजूरी और तकनीकी तैयारियां पूरी
कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम पहले ही भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर को सुरक्षा संबंधी मंजूरी दे चुकी है। टीम 12 से 15 नवंबर तक भोपाल में रही और डिपो, ट्रैक, स्टेशन, ट्रेन कोच और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत निरीक्षण किया। नट-बोल्ट तक की जांच के बाद हरी झंडी दे दी गई।
मेट्रो से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर के लिए आवश्यक सभी तकनीकी काम पूरे हो चुके हैं। स्टेशनों पर कुछ निर्माण कार्य जरूर शेष हैं, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि इनका कमर्शियल रन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। स्टेशन के बाहर सड़क और पहुंच मार्गों को दुरुस्त करने पर तेजी से काम चल रहा है, खासतौर पर सुभाष नगर, रानी कमलापति, एमपी नगर, केंद्रीय स्कूल, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स स्टेशनों के आसपास।
कड़े सुरक्षा इंतजाम और स्टेशन पर व्यवस्थाएं
प्रधानमंत्री के संभावित आगमन और कमर्शियल रन की शुरुआत को देखते हुए सभी मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। स्टेशनों पर निजी सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए गए हैं और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
स्टेशन परिसर के डिजाइन में वाणिज्यिक उपयोग की योजना भी शामिल है। बताया जा रहा है कि कई स्टेशनों के नीचे आउटलेट्स और अन्य सुविधाओं के लिए जगह का प्रावधान किया जा रहा है, जिसके कारण पार्किंग के लिए अलग से स्थान उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से स्टेशन तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
किराया, छूट और टिकट व्यवस्था
भोपाल मेट्रो के किराया ढांचे को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है। एमपी नगर स्टेशन पर किराया सूची भी चिपका दी गई है, हालांकि मेट्रो कॉर्पोरेशन की ओर से आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। इंदौर मेट्रो की तरह ही भोपाल में भी पहले सात दिन तक यात्रियों को मुफ्त सफर का प्रस्ताव है। इसके बाद शुरुआती तीन महीने तक टिकट पर क्रमशः 75, 50 और 25 प्रतिशत की छूट दिए जाने की योजना है।
छूट अवधि समाप्त होने के बाद न्यूनतम किराया 20 रुपए और अधिकतम 80 रुपए तय किए जाने की तैयारी है। अधिकतम किराया तब लागू होगा जब ऑरेंज लाइन का पूरा रूट चालू हो जाएगा। अभी सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर ही सेवा शुरू की जाएगी।
टिकटिंग सिस्टम फिलहाल मैनुअल रहेगा
भोपाल मेट्रो में फिलहाल मैनुअल टिकटिंग सिस्टम लागू रहेगा। यात्री रेलवे की तरह काउंटर से टिकट लेकर यात्रा करेंगे। ऑनलाइन या ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम अभी शुरू नहीं हो पाएगा। इसका कारण यह है कि भोपाल और इंदौर दोनों मेट्रो के लिए ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने का ठेका जिस तुर्की कंपनी को दिया गया था, उसका कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया गया है।
करीब चार महीने तक विवादों में रहने के बाद अगस्त में कंपनी का टेंडर कैंसिल किया गया और नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने और लग सकते हैं, इसलिए शुरुआती चरण में मैनुअल टिकट ही जारी किए जाएंगे।
पार्किंग की कमी और पिक-एंड-ड्रॉप मॉडल
ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पार्किंग की अनुपलब्धता है। आठों स्टेशनों पर नियमित पार्किंग की सुविधा नहीं होगी। यहां केवल पिक-एंड-ड्रॉप की व्यवस्था रहेगी, यानी वाहन से यात्री को उतारने और चढ़ाने की ही अनुमति होगी, गाड़ी खड़ी करके रखने की नहीं।
डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल और इंदौर के ज्यादातर मेट्रो स्टेशनों के लिए पार्किंग का अलग प्रावधान नहीं है। रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि केवल अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होने पर ही स्टेशन पर पार्किंग बनाई जा सकती है। चूंकि अधिकतर स्टेशन मुख्य सड़कों पर बने हैं और नीचे सड़क के ऊपर से मेट्रो गुजर रही है, इसलिए सरकारी जमीन की कमी के कारण बड़े पार्किंग क्षेत्र संभव नहीं हो पाए।
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि शहर का समग्र मोबिलिटी प्लान इस तरह बनाया गया है कि यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए 500 मीटर से ज्यादा न चलना पड़े। इसके लिए बस, ऑटो और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मेट्रो से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि स्टेशन से उतरते ही दूसरी सुविधा आसानी से मिल सके।
कॉरिडोर, रूट और निर्माण की वर्तमान स्थिति
भोपाल में पहली मेट्रो लाइन एम्स से करोंद तक लगभग 16 किलोमीटर लंबी है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच करीब 6.22 किलोमीटर हिस्से को प्रायोरिटी कॉरिडोर घोषित किया गया था, जहां 2018 से काम तेज किया गया। सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक का काम पूरा हो चुका है, जबकि अलकापुरी, एम्स और डीआरएम स्टेशनों के कुछ हिस्सों पर अंतिम चरण के कार्य चल रहे हैं।
रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं, ताकि मेट्रो लाइन बिना बाधा के गुजर सके। प्रायोरिटी कॉरिडोर पर कमर्शियल रन शुरू होने के बाद ध्यान ऑरेंज लाइन के दूसरे फेज सुभाष नगर से करोंद तक केंद्रित किया जाएगा। साथ ही, ब्लू लाइन के भदभदा से रत्नागिरी तक के हिस्से पर भी तेजी से काम बढ़ाने की योजना है।
ट्रायल रन और गति परीक्षण
सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो का ट्रायल रन लगातार किया जा रहा है। परीक्षण के दौरान मेट्रो को न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलाया जा रहा है। बीच-बीच में 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर भी मेट्रो की क्षमताओं को परखा गया है।
भोपाल में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक यात्रा की थी। इस ट्रायल के बाद से सुरक्षा और तकनीकी जांच की प्रक्रिया लगातार जारी रही, जिसका परिणाम अब कमर्शियल रन के रूप में सामने आ रहा है।
निष्कर्ष: भोपाल के लिए मेट्रो युग की शुरुआत
सुरक्षा मंजूरी, ट्रायल रन, किराया मॉडल और बुनियादी तैयारियों के साथ भोपाल मेट्रो अब नियमित संचालन की दहलीज पर है। उद्घाटन की सटीक तारीख और स्वरूप का ऐलान भले ही अभी अंतिम न हो, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि दिसंबर के तीसरे सप्ताह में शहर को अपनी पहली मेट्रो सेवा का तोहफा मिल जाएगा।
पार्किंग की कमी और अस्थायी मैनुअल टिकटिंग सिस्टम जैसी चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सरकार और मेट्रो कॉर्पोरेशन का दावा है कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करके इन दिक्कतों को कम किया जाएगा। प्रायोरिटी कॉरिडोर के बाद अन्य फेज पूरे होने पर मेट्रो शहर के यातायात के स्वरूप को बदलने वाली महत्वपूर्ण सुविधा बन सकती है।
Sachin Saxena