बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर, तेज प्रताप और ओवैसी बदल सकते समीकरण

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बिहार चुनाव  में प्रशांत किशोर, तेज प्रताप और ओवैसी बदल सकते समीकरण

बिहार विधानसभा चुनाव में तीन अहम किरदार बदल सकते समीकरण

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। राज्य में 11 और 14 नवंबर को वोटिंग होगी, और 14 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। इस बार मुख्य मुकाबला NDA और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है। लेकिन तीन नेताओं—प्रशांत किशोर, तेज प्रताप यादव और असदुद्दीन ओवैसी—की भूमिका चुनावी समीकरण को बदलने में अहम हो सकती है।

प्रशांत किशोर का आक्रामक अभियान

जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रशांत किशोर ने एनडीए और महागठबंधन दोनों को अपने निशाने पर रखा है और आक्रामक प्रचार अभियान चला रहे हैं। उनकी मौजूदगी दोनों गठबंधनों के लिए चुनौती बन सकती है।

तेज प्रताप यादव की नई पार्टी

आरजेडी से बगावत करके तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई है। तेज प्रताप न केवल एनडीए बल्कि अपने भाई तेजस्वी यादव और महागठबंधन पर भी निशाना साध रहे हैं। उनके द्वारा यादव वोटों में सेंध लगाने की संभावना महागठबंधन के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

ओवैसी की सीमांचल पर नजर

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सीमांचल की 24 सीटों पर जोर लगा रहे हैं, जहां मुस्लिम आबादी काफी अधिक है। 2020 के चुनाव में ओवैसी ने महागठबंधन को सीमांचल में नुकसान पहुंचाया था। इस बार भी उनके प्रचार अभियान को लेकर महागठबंधन और एनडीए दोनों चिंतित हैं।

इन तीन नेताओं की गतिविधियां बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती हैं।