बिहार चुनाव से पहले SIR पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मामला पूरी तरह से केंद्रीय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, "हम हर काम अपने हाथ में क्यों लें? चुनाव आयोग के पास अपना तंत्र है, उसे काम करने दिया जाए।" कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि वे क्यों चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट हर मामले को अपने नियंत्रण में ले।
प्रभावित लोगों की सूची मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि देश में कुछ लोग अनधिकृत रूप से रह रहे हो सकते हैं, जो अपनी पहचान उजागर होने के डर से सामने नहीं आना चाहेंगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे कम से कम 100 ऐसे लोगों की सूची प्रस्तुत करें, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं लेकिन उन्हें कोई आदेश नहीं मिला।
चुनाव आयोग को सुझाव
कोर्ट ने चुनाव आयोग से मौखिक रूप से कहा कि वह 3.66 लाख हटाए गए नामों और 21 लाख जोड़े गए नामों का पूरा विवरण तैयार करे। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर तय की है।
बिहार चुनावों के मद्देनजर SIR का मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इस संदर्भ में बेहद अहम मानी जा रही है।