बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान मौत मामले में CBI जांच का आदेश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने FIR दर्ज करने और जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश भी दिया है। दिशा सालियान (28) की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत (34) भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे।
दिशा की मौत मामले की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद 2023 में इसे दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए नए सिरे से जांच की मांग की थी। उनका आरोप है कि दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई और मामले को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR की मांग भी की थी।
हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश
हाईकोर्ट ने CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले की जांच की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सतीश सालियान का बयान दर्ज करने और उसके आधार पर FIR दर्ज करने को कहा है। मालवणी पुलिस को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने होंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ FIR में नाम होने से कोई व्यक्ति आरोपी नहीं माना जाएगा। जब तक जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री या सबूत नहीं मिलते, तब तक उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। अगर जांच में कुछ नहीं मिलता है तो CBI को सारांश रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिशा के पिता सतीश सालियान ने कहा कि वे 6 साल से इसका इंतजार कर रहे थे। खुश होने की कोई वजह नहीं है क्योंकि उन्होंने अपनी बेटी को खोया है, लेकिन आज उन्हें राहत महसूस हो रही है। उन्होंने हाथ जोड़कर जज के प्रति आभार जताया।
वकील का दावा और कोर्ट के सवाल
सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने कहा कि CBI पहले सतीश सालियान का बयान दर्ज करेगी और फिर FIR दर्ज कर जांच शुरू करेगी। ओझा के मुताबिक, FIR में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह, उद्धव ठाकरे, सचिन वाजे और पिछली SIT के उन सदस्यों के नाम भी आरोपी के तौर पर दिए गए हैं, जिन पर मामले को दबाने का आरोप है। ओझा ने यह भी कहा कि अगर CBI की रिपोर्ट नकारात्मक आती है, तो परिवार को उस पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, पंचनामा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समेत जांच के कई पहलुओं पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि परिवार के संदेह जताने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने पहले ADR दर्ज की थी और बाद में मौत को आत्महत्या बताया। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि ADR की जांच इतनी लंबी क्यों चली। कोर्ट को बताया गया कि दिशा का पोस्टमॉर्टम एक डॉक्टर ने किया था, जबकि दिशा-निर्देशों के मुताबिक दो डॉक्टर होने चाहिए थे। रिपोर्ट में सिर, हाथ, पैर और छाती पर चोटों का जिक्र था।
पुलिस ने कहा कि रेप या यौन हमले के सबूत नहीं मिले और गवाहों व फॉरेंसिक जांच के आधार पर दिशा के खुद इमारत से छलांग लगाने की बात सामने आई थी। 2025 के हलफनामे में भी पुलिस ने इसे आत्महत्या बताते हुए साजिश से इनकार किया था। मुंबई पुलिस ने अक्टूबर 2020 में दिशा की मौत को आत्महत्या मानकर जांच बंद कर दी थी। पुलिस के मुताबिक, दिशा तनाव में थीं, घटना से पहले शराब के नशे में थीं और उनके मंगेतर ने भी किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था। 2023 में बनाई गई SIT के निष्कर्ष भी शुरुआती जांच से मेल खाते बताए गए थे।
भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे ने दिशा के साथ गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाया था और मामले की CBI जांच की मांग भी की थी। भाजपा सांसद नारायण राणे ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उनसे दिशा सालियान केस में उनके बेटे आदित्य ठाकरे का नाम नहीं लेने को कहा था। उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया था। दिशा और सुशांत की मौत के बीच सिर्फ छह दिन का अंतर होने के कारण दोनों मामले चर्चा में जुड़े रहे, हालांकि दोनों घटनाओं के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई थी।
Janmejay Chaturvedi