चैत्र नवरात्र आज से शुरू: नौ दिन की साधना लाएगी पूर्ण फल

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चैत्र नवरात्र  आज से शुरू:  नौ दिन  की साधना लाएगी  पूर्ण फल

आज से चैत्र नवरात्र शुरू: नौ दिन भक्तों को देंगे पूर्ण फल

आज से चैत्र नवरात्र का पावन पर्व प्रारंभ हो रहा है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण अमावस्या युक्त प्रतिपदा गुरुवार को पड़ रही है, जिसके साथ ही कलश स्थापना और सिद्धि संकल्प की शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार, इस बार पूरे नौ दिनों की नवरात्रि होने से भक्तों को पूर्ण फल की प्राप्ति होगी।

घटस्थापना के शुभ मुहूर्त और नियम

ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम ने बताया कि सूर्योदय के साथ ही घटस्थापना के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। दोपहर 12 बजे का अभिजीत मुहूर्त और सायंकाल का प्रदोषकाल भी सिद्धि साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, माता का आगमन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि में चंद्रमा की उपस्थिति में होगा, जबकि चैत्र शुक्ल नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि के चंद्रमा में आदिशक्ति का गमन होगा।

घटस्थापना के लिए कुछ विशेष धार्मिक नियम बताए गए हैं। प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय के बाद का समय शुभ माना जाता है, और सूर्योदय से लगभग चार घंटे के भीतर कलश स्थापना करना सर्वोत्तम है। यदि प्रात:काल में चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो, तो उस समय स्थापना नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की जा सकती है। देवी का आवाहन, नित्य पूजन और विसर्जन प्रात:काल में करना शुभ फलदायी होता है।

देवी के नौ स्वरूपों की आराधना और धार्मिक महत्व

नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री की आराधना होती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है और वे जीवन में नई शुरुआत व आशा का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शक्ति और शांति की प्राप्ति होती है। यह पर्व आत्मसंयम, साधना और सकारात्मक परिवर्तन का भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।

Pushpendra Chaubey