छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन सृजन अभियान अंतिम चरण पर, जिलाध्यक्षों की नियुक्ति जल्द

· 1 min read
छत्तीसगढ़ में  कांग्रेस संगठन सृजन अभियान  अंतिम चरण पर, जिलाध्यक्षों की नियुक्ति जल्द

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान अंतिम चरण में

छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी में संगठन सृजन अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया तेजी से चल रही है। राज्य के लगभग 80% जिलों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी जिलों में यह कार्य दीपावली तक पूरा कर लिया जाएगा। यह प्रक्रिया कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका में लाने के उद्देश्य से की जा रही है।

महत्वपूर्ण बैठकें और चर्चा

संगठन सृजन अभियान को लेकर कांग्रेस में दो महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं। पहली बैठक ऑनलाइन माध्यम से हुई, जिसमें एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, पीसीसी चीफ दीपक बैज और सभी पर्यवेक्षक शामिल हुए। इस बैठक में पूरे प्रदेश में चल रहे अभियान की समीक्षा की गई। दूसरी बैठक रायपुर शहर के दावेदारों के साथ हुई, जिसमें पर्यवेक्षक प्रफुल्ल गडाधे ने व्यक्तिगत रूप से चर्चा की। उन्होंने दावेदारों की पृष्ठभूमि, पार्टी में उनकी भूमिका और आपराधिक रिकॉर्ड जैसे पहलुओं पर जानकारी ली। रायपुर ग्रामीण के दावेदारों और अन्य संगठनों से जुड़े लोगों से भी प्रफुल्ल गडाधे ने पहले दिन चर्चा की थी।

जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया

प्रदेश में 41 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए 17 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। इन पर्यवेक्षकों को अपने-अपने जिलों के लिए 6-6 नामों का पैनल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। ये पैनल कांग्रेस हाईकमान को भेजे जाएंगे। इसके बाद हाईकमान द्वारा इन पैनलों की समीक्षा की जाएगी और अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

पर्यवेक्षकों की भूमिका

पर्यवेक्षकों की टीम में कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। इनमें सप्तगिरि उल्का, अजय कुमार लल्लू, सुबोध कांत सहाय, उमंग सिंगार, आरसी खूंटिया, राजेश ठाकुर, विवेक बंसल, नितिन राउत, श्याम कुमार बर्वे, प्रफुल्ल गडाधे, चरण सिंह सप्रे, विकास ठाकरे, हिना कावरे, रीता चौधरी, रिहाना रियाज चिश्ती, अजमतउल्लाह हुसैनी और सीताराम लांबा जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी पर्यवेक्षक फील्ड विज़िट, इंटरव्यू और मूल्यांकन के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

हाईकमान की सहमति से होगा अंतिम फैसला

जिलाध्यक्षों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए हाईकमान की सहमति आवश्यक होगी। पर्यवेक्षकों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में दावेदारों की मजबूती, जनाधार, संगठनात्मक अनुभव और विवादों का पूरा लेखा-जोखा शामिल किया जाएगा। यह प्रक्रिया पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक प्रणाली को बढ़ावा देने और संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अभियान से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का संगठन और अधिक मजबूत होने की संभावना है। दीपावली तक प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पार्टी के लिए एक नई संरचना तैयार होगी, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।