चुनाव आयोग ने SIR डेडलाइन 7 दिन बढ़ाई

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चुनाव आयोग ने SIR डेडलाइन 7 दिन बढ़ाई

12 राज्यों में SIR की समय सीमा बढ़ी, अब फाइनल लिस्ट 14 फरवरी 2026 को

चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी है। इसके साथ ही मतदाता सत्यापन से लेकर ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची जारी होने की सभी प्रमुख तिथियों में बदलाव किया गया है।

SIR प्रक्रिया की नई तारीखें और प्रगति

अब मतदाता जोड़ने और हटाने के लिए चल रहा एन्यूमरेशन पीरियड, यानी वोटर वेरिफिकेशन, 11 दिसंबर तक चलेगा। पहले यह समय सीमा 4 दिसंबर तक निर्धारित थी। इसी तरह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, जो पहले 9 दिसंबर को प्रकाशित होनी थी, अब 16 दिसंबर को जारी की जाएगी।

अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह वही सूची होगी जिसके आधार पर इन राज्यों में आगे होने वाले चुनावों में मतदान कराया जाएगा।

51 करोड़ मतदाताओं के लिए फॉर्म, 99.53% तक पहुंच

चुनाव आयोग के अनुसार SIR वाले 12 राज्यों में लगभग 51 करोड़ मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म तैयार किए गए हैं। इनमें से 99.53% फॉर्म घर-घर जाकर लोगों तक पहुंचाए जा चुके हैं। आयोग का कहना है कि लगभग 79% फॉर्म का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है, यानी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा एकत्र किए गए नाम, पते और अन्य विवरण ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किए जा चुके हैं।

SIR क्या है और क्यों जरूरी है?

SIR, चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची को व्यापक रूप से अपडेट किया जाता है। इसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो किसी दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। साथ ही मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरण में हुई त्रुटियों को सुधारा जाता है।

इस काम के लिए BLO घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाते हैं और जानकारी की पुष्टि करते हैं। SIR के तहत 12 राज्यों में लगभग 5.33 लाख BLO और राजनीतिक दलों की ओर से 7 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) तैनात किए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग का तर्क है कि 1951 से 2004 तक SIR की प्रक्रिया हो चुकी थी, लेकिन पिछले 21 साल की अवधि में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। माइग्रेशन, दो जगह नाम होना, मौत के बाद भी नाम बने रहना और विदेशी नागरिकों के नाम सूची में आ जाने जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए यह विशेष पुनरीक्षण जरूरी बताया जा रहा है, ताकि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं और कोई अयोग्य नाम सूची में शामिल न रहे।

विपक्ष के आरोप: BLO की मौतें और वोट चोरी पर सवाल

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष, खासकर कांग्रेस, लगातार हमलावर है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक काम के दबाव के कारण 20 दिनों में 26 BLO की मौत हुई है और इसे उन्होंने दिनदहाड़े हत्या के समान बताया।

उन्होंने गोंडा के BLO विपिन यादव का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उनके परिवार का कहना है कि उन पर पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के नाम मतदान सूची से हटाने का दबाव था। सुप्रिया ने SIR को वोट चोरी का एक ताकतवर तरीका बताया और प्रश्न किया कि इतनी जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी करने की क्या मजबूरी है।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी

SIR से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल की ओर से दायर याचिकाओं पर लगातार सुनवाई हो रही है। अदालत के समक्ष चुनाव आयोग ने दलील दी कि राजनीतिक दल SIR प्रक्रिया को लेकर जानबूझकर डर का माहौल बना रहे हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केरल सरकार की याचिका पर केंद्र सरकार और राज्य चुनाव आयोग से 1 दिसंबर तक जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। तमिलनाडु की याचिका पर 4 दिसंबर और पश्चिम बंगाल की याचिका पर 9 दिसंबर को सुनवाई तय है।

बेंच ने यह भी संकेत दिया कि यदि राज्य सरकारें मजबूत तथ्य और आधार रखती हैं, तो अदालत SIR की समय सीमा बढ़ाने का निर्देश दे सकती है। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि पहले कभी SIR इस तरह नहीं हुआ, चुनाव आयोग के फैसले को स्वतः चुनौती नहीं दी जा सकती।

मतदाताओं के लिए प्रक्रिया और दस्तावेज

SIR के दौरान BLO या BLA मतदाता के पास जाकर फॉर्म देते हैं। मतदाता को अपने नाम और पते सहित सभी विवरण की पुष्टि करनी होती है। यदि किसी व्यक्ति का नाम दो जगह मतदाता सूची में दर्ज है, तो उसे एक जगह से नाम कटवाना होगा। यदि नाम सूची में नहीं है, तो नया नाम जोड़ने के लिए फॉर्म भरना और आवश्यक दस्तावेज जमा करना जरूरी है।

यदि ड्राफ्ट मतदाता सूची से किसी का नाम कट जाता है, तो वह एक महीने के भीतर अपील कर सकता है। पहले स्तर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), फिर जिलाधिकारी (DM) और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक अपील का प्रावधान है।

दस्तावेज और आधार कार्ड की भूमिका

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को केवल पहचान के अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा, नागरिकता प्रमाण के रूप में नहीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बिहार के चुनाव अधिकारियों को यह व्यवस्था लागू करने के लिए कहा गया था।

साथ ही, बिहार की अद्यतन मतदाता सूची को 12 राज्यों में दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई है। यदि कोई व्यक्ति इन राज्यों में नाम जुड़वाना चाहता है और वह बिहार की SIR के बाद की मतदाता सूची का अंश प्रस्तुत करता है, जिसमें उसके माता-पिता के नाम दर्ज हों, तो उसे नागरिकता का अलग प्रमाण नहीं देना होगा; केवल जन्मतिथि का प्रमाण पर्याप्त माना जाएगा।

निष्कर्ष: बड़ी और संवेदनशील कवायद

SIR एक व्यापक और संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसमें करोड़ों मतदाताओं के अधिकार सीधे जुड़े हैं। चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे मतदाता नामों में हेरफेर और खास वर्गों को सूची से बाहर करने का खतरा मान रहा है।

समय सीमा बढ़ने से जहां प्रशासन को काम पूरा करने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय मिला है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में SIR के स्वरूप, पारदर्शिता और संभावित प्रभावों पर कानूनी और राजनीतिक बहस और तेज होगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी होने के बाद ही इस प्रक्रिया की वास्तविक तस्वीर और परिणाम पूरी तरह सामने आ पाएंगे।

Navjeet Kaur