संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, सदन में शांति की अपील
1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इसमें सरकार और विपक्ष के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आगामी सत्र को शांतिपूर्ण और सार्थक बनाने की उम्मीद जताई।
रिजिजू की अपील: ठंडे दिमाग से काम, गरमागरम टकराव से बचें
किरन रिजिजू ने कहा कि यह विंटर सेशन है, इसलिए सभी दलों से उम्मीद है कि वे ठंडे दिमाग से काम करेंगे और अनावश्यक गरमागरम बहस से बचेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात ध्यान से सुनेगी और कोशिश होगी कि संसद में सार्थक व विस्तृत चर्चा हो, बिना किसी बाधा के सदन की कार्यवाही चले। रिजिजू के मुताबिक, यदि सभी दल संयम और शांति के साथ काम करेंगे तो यह संसद के साथ देश के लिए भी फायदेमंद होगा।
SIR विवाद और चुनाव आयोग पर सवालों से दूरी
जब रिजिजू से बिहार के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मुद्दे और इससे जुड़ी संभावित बहस पर प्रश्न किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि वे नहीं बता सकते कि सरकार कौन-कौन से मुद्दे चर्चा के लिए लाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग अपना स्वतंत्र काम करता है और वे उसके प्रवक्ता नहीं हैं।
शीतकालीन सत्र का कार्यक्रम और संभावित बिल
शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। कुल 19 दिनों के इस सत्र में 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार की ओर से एटॉमिक एनर्जी बिल सहित लगभग 10 नए विधेयक पेश किए जा सकते हैं। विपक्ष पहले से ही संकेत दे चुका है कि वह SIR मुद्दे और चुनाव से जुड़े मामलों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगा।
पिछले मानसून सत्र की पृष्ठभूमि
इससे पहले मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला था। सत्र की शुरुआत में ही उस समय के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
मानसून सत्र लगभग पूरे समय बिहार के SIR मुद्दे पर विपक्ष के विरोध और हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा में लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण कई दिनों तक कोई काम नहीं हो सका। लोकसभा के लिए 120 घंटे चर्चा का समय तय था, लेकिन महज 37 घंटे ही काम हो पाया, जबकि राज्यसभा में केवल 41 घंटे चर्चा हो सकी। इसके बावजूद दोनों सदनों ने मिलकर 27 बिल पारित किए। इनमें गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सबसे अधिक चर्चा में रहा, जिसे आगे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर हुआ।
CEC के खिलाफ संभावित महाभियोग की तैयारी
आगामी शीतकालीन सत्र में विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। 18 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, राजद समेत आठ विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि महाभियोग लाने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना होता है, इसलिए मानसून सत्र में यह संभव नहीं होगा, लेकिन शीतकालीन सत्र में नोटिस दिया जाएगा। यह विवाद तब तेज हुआ जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 7 अगस्त को चुनाव आयोग पर वोट चोरी कराने के गंभीर आरोप लगाए। इसके जवाब में 17 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी से कहा कि वे या तो अपने आरोपों पर हलफनामा दें या फिर देश से माफी मांगें।
मानसून सत्र की प्रमुख घटनाएं
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा
21 जुलाई की रात जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। वे बीच सत्र में पद छोड़ने वाले पहले उपराष्ट्रपति बने।
Bihar SIR पर लगातार विरोध
मानसून सत्र के दूसरे दिन से ही विपक्ष ने बिहार SIR को लेकर संसद के भीतर और बाहर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। यह विरोध पूरे सत्र के दौरान जारी रहा, जिससे कई दिनों तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज प्रभावित हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर पर लंबी बहस
लोकसभा में 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे से अधिक समय तक विस्तार से बहस हुई। इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री को सीधे चुनौती दी कि वे सदन में कई मुद्दों पर स्पष्ट बयान दें।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी देश ने भारत को अपनी सुरक्षा संबंधी कार्रवाई करने से नहीं रोका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत रही। यह बहस मानसून सत्र की सबसे प्रमुख चर्चाओं में से एक मानी गई।
निष्कर्ष: सत्र सुचारु चलेगा या फिर से गतिरोध?
शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की शुरुआत तो दिखी, लेकिन SIR विवाद, चुनाव आयोग पर आरोप और संभावित महाभियोग प्रस्ताव जैसे मुद्दे सत्र के दौरान टकराव की आशंका भी पैदा करते हैं। किरेन रिजिजू की अपील है कि सभी दल शांति, संयम और ठंडे दिमाग से काम करें ताकि संसद अपना पूरा समय देश से जुड़े महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर खर्च कर सके। अब नजर इस बात पर होगी कि सत्र वास्तव में सहमति और संवाद के माहौल में चलता है या फिर मानसून सत्र की तरह हंगामे का शिकार बनता है।
Adarsh Chaurasiya