(डिलीवरी..परफॉर्मेंस और मिनिस्टर अचीवमेंट पर मोहन तैयार कर रहे रिपोर्ट कार्ड)(समीक्षा बैठकों के जरिए मोहन सरकार ने भविष्य के राजनीतिक बदलावों के संकेत भी दिए..) (राकेश अग्निहोत्री ..सवाल दर सवाल)

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(डिलीवरी..परफॉर्मेंस और मिनिस्टर अचीवमेंट पर मोहन तैयार कर रहे रिपोर्ट कार्ड)(समीक्षा बैठकों के जरिए मोहन सरकार ने भविष्य के राजनीतिक बदलावों के संकेत भी दिए..) (राकेश अग्निहोत्री ..सवाल दर सवाल)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ... मोहन यादव ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठकों का जो सिलसिला शुरू किया है, उसने सत्ता और संगठन दोनों के भीतर नए राजनीतिक संकेत दे दिए हैं... यह केवल योजनाओं की प्रगति जानने वाली सामान्य प्रशासनिक कवायद नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे “डिलीवरी... डिसिप्लिन और परफॉर्मेंस मॉडल” के रूप में देखा जा रहा है...पहले संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ संवाद... फिर मंत्रियों के राजनीतिक और प्रशासनिक रिपोर्ट कार्ड की पड़ताल... और अब विभागवार समीक्षा के जरिए मुख्यमंत्री यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर किस मंत्री का प्रदर्शन सरकार की छवि को मजबूत कर रहा है और कौन सरकार की गति पर सवाल खड़े कर रहा है...सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि अब केवल राजनीतिक संतुलन नहीं, बल्कि अचीवमेंट... जवाबदेही और परिणाम भी भविष्य तय करेंगे... भाजपा के घोषणा पत्र से लेकर मुख्यमंत्री की घोषणाओं तक... योजनाओं की जमीनी हकीकत क्या है...अधिकारी और मंत्री तालमेल में हैं या नहीं...? और क्या सरकार की उपलब्धियां जनता तक राजनीतिक लाभ में बदल रही हैं...? इन्हीं सवालों के जवाब खोजने के लिए मोहन सरकार की यह बड़ी एक्सरसाइज आगे बढ़ रही है...राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित मंत्रिमंडल विस्तार... पीढ़ी परिवर्तन और नए सत्ता संतुलन की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है... ✅✅ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठकों का जो सिलसिला शुरू किया है.. वह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं अधिक रणनीतिक महत्व रखता दिखाई दे रहा है... पहले ही व्यक्तिगत तौर पर विधायक, कार्यकर्ता और जनता की नजर से अपने मिनिस्टरों का फीडबैक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ले चुके हैं.. नई एक्सरसाइज के साथ पहले ही दिन छह विभागों की समीक्षा, मंत्रियों की मौजूदगी में अधिकारियों से सीधा फीडबैक, और उसके बाद इस अभ्यास को निरंतर जारी रखने का संकेत यह बताता है कि सरकार केवल योजनाओं की प्रगति नहीं देख रही, बल्कि सत्ता, संगठन और सरकार के समन्वय का नया ढांचा भी तैयार कर रही है...सवाल यह है कि आखिर इस समीक्षा का वास्तविक संदेश क्या है...? ढाई साल यानी आधा कार्यकाल पूरा करने पर यह औपचारिक चिंतन मंथन है.. या फिर नई जमावट की एक नई कवायत.. आखिर टाइमिंग क्या मायने रखती है..क्या यह केवल विभागीय कामकाज की मॉनिटरिंग है, या फिर इसके भीतर भविष्य की राजनीति, मंत्रिमंडल विस्तार, जवाबदेही और सत्ता संतुलन की नई पटकथा छिपी हुई है...?दरअसल, इस पूरी कवायद को यदि राजनीतिक घटनाक्रमों की कड़ियों से जोड़कर देखा जाए, तो तस्वीर काफी स्पष्ट होने लगती है... मुख्यमंत्री डॉ... मोहन यादव की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात, उसके बाद संगठन के शीर्ष नेताओं राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जमवाल, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह के साथ लगातार संवाद, फिर पंच परमेश्वर जैसी बैठकों में सत्ता और संगठन की संयुक्त मौजूदगी… यह सब संकेत देता है कि भाजपा मध्य प्रदेश में सरकार के दूसरे चरण की नई दिशा तय कर रही है... यह भी ध्यान देने योग्य है कि डॉ... मोहन यादव को जो मंत्रिमंडल मिला, वह पूरी तरह उनकी पसंद का नहीं माना गया... सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए जो कैबिनेट बनी, उसमें कई चेहरे संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं के आधार पर शामिल हुए... ऐसे में अब डेढ़ वर्ष के आसपास के कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री यदि मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, उनकी प्रशासनिक पकड़, जनता में छवि, विवादों और राजनीतिक उपयोगिता का मूल्यांकन कर रहे हैं, तो इसे स्वाभाविक रूप से भविष्य की तैयारी माना जाएगा... सवाल यह भी है कि समीक्षा बैठकों में मंत्रियों के साथ अधिकारियों की मौजूदगी का विशेष महत्व क्या है...? यदि भाजपा की कार्यशैली में पिछले कुछ वर्षों में “परफॉर्मेंस आधारित राजनीति” का मॉडल मजबूत हुआ है... केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जो प्रशासनिक शैली रही है, उसमें योजनाओं की जमीनी स्थिति, समयबद्ध क्रियान्वयन और राजनीतिक परिणाम—तीनों को साथ जोड़कर देखा जाता है... मध्य प्रदेश में अब वही मॉडल अधिक स्पष्ट रूप से लागू होता दिखाई दे रहा है... डॉ मोहन यादव निगम मंडल आयोग और प्राधिकरण में नियुक्तियों का काम लगभग पूरा कर भाजपा संगठन नई पुरानी पीढ़ी के नेता नीति निर्धारक और आम कार्यकर्ता को संदेश दे चुके.. संगठन पर पकड़ उसे भरोसे में लेकर मोहन ने अपने इरादे जाता दिए.. ऐसे में मंत्रियों के साथ अलग-अलग फोरम पर अलग-अलग बिंदु पर चर्चा का महत्व और बढ़ जाता है.. शायद सट्टा संगठन से आगे भविष्य की बीजेपी का चेहरा बनाकर स्थापित हो रहेमुख्यमंत्री यह जानना चाहते हैं कि भाजपा के घोषणा पत्र में किए गए वादों और स्वयं उनके द्वारा की गई घोषणाओं की वास्तविक स्थिति क्या है...? योजनाएं फाइलों में चल रही हैं या जमीन पर...? मंत्री केवल बयान दे रहे हैं या परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं...? अधिकारी विभागीय लक्ष्य पूरे कर पा रहे हैं या नहीं...? और सबसे बड़ा सवाल क्या जनता तक सरकार की उपलब्धियों का राजनीतिक लाभ पहुंच रहा है...?यहीं से इस समीक्षा का राजनीतिक पक्ष शुरू होता है... दरअसल, भाजपा 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर चुकी है... संगठन की एक्सरसाइज किस संदेश को और पुख्ता करती है.. राष्ट्रीय नेतृत्व मोदी शाह की नजर और टारगेट पर भले ही मध्य प्रदेश प्राथमिकता नहीं बना हुआ है.. लेकिन फीडबैक से इनकार नहीं किया जा सकता.. शायद मध्य प्रदेश में लगातार सरकार में रहते एंटी इनकम में सी जैसी कई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए संघ और संगठन यह समझता है कि केवल मोदी फैक्टर के भरोसे हर चुनाव नहीं जीता जा सकता... बिहार पांडिचेरी खासतौर से असम और पश्चिम बंगाल में जिस तरह मुख्यमंत्री को ताकत दी गई उसके बाद राजस्थान छत्तीसगढ़ के साथ मध्य प्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को भी एक नई पहचान के साथ स्थापित करने की कवायत शुरू हो चुकी है.. क्यों कि राज्यों में स्थानीय नेतृत्व की विश्वसनीयता, सरकार की छवि और योजनाओं का असर भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है... इसलिए मोहन सरकार के सामने अब “डिलीवरी और डिसिप्लिन” दोनों की चुनौती है... माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के गृह जिलों, प्रभार वाले जिलों और विभागीय कामकाज को जोड़कर एक प्रकार का राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया है... यह केवल प्रशासनिक मूल्यांकन नहीं, बल्कि राजनीतिक उपयोगिता की भी समीक्षा है... कौन मंत्री संगठन के साथ तालमेल में है...? कौन अपने क्षेत्र में प्रभावी है...? किसके विभाग में विवाद अधिक हैं...? किसकी कार्यशैली सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रही है...? और कौन मंत्री भविष्य की राजनीति में उपयोगी साबित हो सकता है...? इन सवालों के जवाब ही आने वाले समय की राजनीति तय करेंगे...यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में अब मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं... भाजपा में अक्सर बड़े बदलाव अचानक होते हैं, लेकिन उनकी तैयारी लंबे समय तक चलती रहती है... डॉ... मोहन यादव की यह समीक्षा उसी तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है... मुख्यमंत्री संभवतः यह संदेश देना चाहते हैं कि अब सरकार केवल राजनीतिक संतुलन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ेगी... यह संदेश केवल मंत्रियों के लिए नहीं, बल्कि अधिकारियों के लिए भी है...मुख्यमंत्री की बैठकों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वे सीधे विभागीय अधिकारियों से संवाद कर रहे हैं... इससे प्रशासनिक तंत्र को यह संकेत गया है कि मुख्यमंत्री अब हर विभाग की वास्तविक स्थिति से सीधे अवगत रहेंगे... यानी केवल फाइलों और प्रस्तुतियों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी रिपोर्ट और राजनीतिक फीडबैक के आधार पर निर्णय होंगे... इससे नौकरशाही में भी जवाबदेही बढ़ने की संभावना है... साथ ही यह कवायद भाजपा संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण है... पार्टी लंबे समय से यह चाहती रही है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल रहे... कई बार यह शिकायत सामने आती रही कि मंत्री और अधिकारी संगठन के कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं देते... अब यदि समीक्षा में राजनीतिक फीडबैक भी शामिल है, तो इसका मतलब साफ है कि संगठन की रिपोर्ट भी सरकार के फैसलों को प्रभावित करेगी... एक और महत्वपूर्ण पहलू “पीढ़ी परिवर्तन” का है... भाजपा लगातार नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है... मध्य प्रदेश में भी इसका संकेत दिखाई देता है... ऐसे में यदि भविष्य में कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में अवसर मिले और कुछ वरिष्ठ या विवादित मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए, तो उसे इसी रणनीति का हिस्सा माना जाएगा... मोहन सरकार यह भी समझती है कि केंद्र में मोदी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के साथ राज्यों की उपलब्धियों को भी राष्ट्रीय राजनीति से जोड़कर प्रस्तुत किया जाएगा... भाजपा “डबल इंजन सरकार” की अवधारणा को केवल नारे तक सीमित नहीं रखना चाहती... इसलिए मध्य प्रदेश में भी सरकार की उपलब्धियों, निवेश, धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं, अधोसंरचना और कल्याणकारी योजनाओं को नए तरीके से पैकेज करने की तैयारी दिखाई दे रही है... यानी यह समीक्षा केवल वर्तमान का आकलन नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक ब्रांडिंग की तैयारी भी है... एक्सरसाइज कई चरणों में ऐसे में अंततः सबसे बड़ा सवाल यही है कि डॉ... मोहन यादव किसे क्यों संदेश देना चाहते हैं...? केंद्र को यह संदेश कि मध्य प्रदेश सरकार परिणाम देने वाली सरकार है...संगठन को यह संदेश कि सरकार समन्वय और अनुशासन के साथ चल रही है...मंत्रियों को यह संदेश कि प्रदर्शन ही भविष्य तय करेगा...अधिकारियों को यह संदेश कि अब जवाबदेही तय होगी...और जनता को यह संदेश कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की समीक्षा भी कर रही है... यही कारण है कि यह विभागीय समीक्षा केवल प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चल रहे बड़े राजनीतिक मंथन का हिस्सा मानी जा रही है... आने वाले महीनों में यदि मंत्रिमंडल विस्तार, विभागीय फेरबदल, नए चेहरों की एंट्री या कुछ बड़े प्रशासनिक फैसले दिखाई दें, तो उसकी पटकथा संभवतः इन्हीं बैठकों में लिखी जा रही होगी...

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