दिग्विजय सिंह ने की MP बासमती के लिए GI टैग की मांग, राज्यसभा से रिटायरमेंट पर भी बोले

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दिग्विजय सिंह  ने की  MP बासमती  के लिए  GI टैग  की मांग,  राज्यसभा से रिटायरमेंट  पर भी बोले

दिग्विजय सिंह ने उठाई MP के किसानों की आवाज, बासमती को GI टैग दिलाने की मांग

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने सरकारी आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है। दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि मध्य प्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती धान को एपीडा द्वारा जीआई टैग नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार मध्य प्रदेश की बासमती को जीआई टैग नहीं दिलवा पाती है तो वे अनशन भी करेंगे।

सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की कीमत तीन गुना है, लेकिन मध्य प्रदेश के किसान जीआई टैग न मिलने के कारण अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के दौरान जीआई टैग मिलने शुरू हुए थे, लेकिन 2016 में भाजपा सरकार आने के बाद मध्य प्रदेश को दिए गए जीआई टैग निरस्त कर दिए गए। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग प्राप्त है, जबकि मध्य प्रदेश के किसानों को इस अधिकार से वंचित रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने कुछ सालों में कई जगह जीआई टैग दिलाए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के 13-14 जिलों (श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर) के किसानों को यह लाभ नहीं मिल पा रहा है। दिग्विजय सिंह ने तीन माह पूर्व भी इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखा था और संसद के शीतकालीन सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया था।

रिटायरमेंट प्लान और राज्यसभा सदस्यता पर दिया स्पष्टीकरण

अपने रिटायरमेंट को लेकर दिग्विजय सिंह ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बैंक से रिटायर हुए एक ऐसे कपल का वीडियो मजाकिया लहजे में शेयर किया था, जो कार से पूरा भारत घूमने निकला है। उन्होंने अपनी पार्टी से अनुरोध किया है कि वे राज्यसभा के दूसरे कार्यकाल के बाद तीसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इसका यह मतलब नहीं है कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे जीवन की आखिरी सांस तक पार्टी का काम करते रहेंगे, लेकिन पार्टी उन्हें कहां जिम्मेदारी सौंपती है, यह पार्टी नेतृत्व, एआईसीसी और प्रदेश कांग्रेस पर निर्भर करता है।

दिग्विजय सिंह ने पिछले महीने ही कहा था कि वे अपनी राज्यसभा की सीट खाली कर रहे हैं, जिसका कार्यकाल जून में पूरा हो रहा है। वे दूसरी बार के राज्यसभा सांसद हैं। यह उनके द्वारा कांग्रेस के कब्जे वाली सीट पर संघर्ष को बढ़ा रहा है।

राजनीतिक यात्रा का संक्षिप्त अवलोकन

दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2003 में कांग्रेस की हार के बाद, उन्होंने 10 साल तक कोई चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया था। वे 2014 में राज्यसभा सदस्य बने और उसके बाद दूसरी बार जून 2020 में फिर राज्यसभा सांसद चुने गए थे।

Sachin Saxena