('बासमती' के बहाने 'दिग्विजय'की नई सियासी' पोजिशनिंग ') (सवाल दर सवाल )(राकेश अग्निहोत्री)

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('बासमती' के बहाने 'दिग्विजय'की नई सियासी' पोजिशनिंग ')
(सवाल दर सवाल )(राकेश अग्निहोत्री)

मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने की मांग उठाकर दिग्विजय सिंह ने सिर्फ किसानों की आवाज ही नहीं उठाई, बल्कि अपनी नई राजनीतिक पोजिशनिंग का भी संकेत दिया है.. राज्यसभा कार्यकाल समाप्ति के बाद भी वे पद से परे जनमुद्दों की राजनीति के जरिए सक्रिय और प्रभावी भूमिका में बने रहने का संदेश दे रहे हैं..मध्य प्रदेश की राजनीति में रंग पंचमी के दिन हुई दिग्विजय सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के बदलते सियासी रंग के बीच कई नए नए सवाल खड़े कर दिए हैं.. सवाल उम्र दराज दिग्विजय सिंह के नए जोश.. मुद्दा आधारित राजनीति पद प्रतिष्ठा से दूर लेकिन सियासत से संन्यास की अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए अपनी नई पोजिशनिंग को क्लियर कर दिया.. राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने की दहलीज पर खड़े कांग्रेस के वरिष्ठ इस नेता ने न सिर्फ प्रदेश के किसानों का मुद्दा उठाया बल्कि अपनी भविष्य की राजनीतिक भूमिका के भी संकेत दे दिए.. दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि मध्य प्रदेश के बासमती धान को जीआई टैग दिया जाए, क्योंकि इसके अभाव में प्रदेश के किसान अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद की सही कीमत नहीं पा रहे हैं.. उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाए तो वे किसानों के हक में अनशन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे..दिलचस्प बात यह रही कि यह मुद्दा ऐसे समय उठाया गया जब उनके राजनीति से संन्यास लेने की चर्चाएं तेज थीं और संसद का सत्र भी शुरू होने वाला है.. दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि वे राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल नहीं चाहते, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वे सक्रिय राजनीति या जन मुद्दों से दूर हो जाएंगे.. बासमती के सवाल के बहाने उन्होंने किसानों के हितों को केंद्र में रखते हुए यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में उनकी राजनीति पद से ज्यादा मुद्दों और जनसंघर्ष के इर्द-गिर्द दिखाई दे सकती है..

रंग पंचमी के दिन तमाम अटकलों के बीच भोपाल में राज्यसभा सांसद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा अचानक बुलायी गई पत्रकार वार्ता ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी.. दिग्विजय ने इस बार मुद्दा उठाया मध्य प्रदेश के बासमती चावल का.. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाला उचित दाम नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश के बासमती को जीआई टैग नहीं दिया गया है..दिग्विजय ने कहा कि प्रदेश के 13 से ज्यादा जिलों में उगने वाला बासमती चावल गुणवत्ता में किसी से कम नहीं है, लेकिन एपीडा की सूची में इन जिलों को शामिल नहीं किया गया। उनका कहना है कि अगर मध्य प्रदेश के बासमती को जीआई टैग मिल जाए तो किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन गुना तक ज्यादा कीमत मिल सकती है..उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मध्य प्रदेश के बासमती को तत्काल जीआई टैग दिया जाए.. दिग्विजय सिंह ने चेतावनी भी दी कि यदि इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगे..उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय जीआई टैग की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन 2016 के बाद भाजपा सरकार आने के बाद मध्य प्रदेश के दावे को आगे नहीं बढ़ाया गया.. वर्तमान में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती को जीआई टैग मिला हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश के किसान इस लाभ से वंचित हैं,इस पत्रकार वार्ता में दिग्विजय सिंह ने अपनी राजनीति को लेकर भी बड़ा संकेत दिया, हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था जिसमें रिटायरमेंट के बाद एक दंपति कार से भारत यात्रा पर निकलता है.. उस वीडियो को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या दिग्विजय सिंह भी राजनीति से संन्यास लेने की तैयारी कर रहे हैं..लेकिन इस पर उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया है कि वे राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे राजनीति से दूर हो जाएंगे। उनका कहना था कि वे जीवन की आखिरी सांस तक कांग्रेस और जनहित के मुद्दों के लिए काम करते रहेंगे..उन्होंने याद दिलाया कि वे पहले भी 2003 में चुनाव हारने के बाद 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ने का संकल्प ले चुके हैं.. लेकिन राजनीति और जनसंघर्ष से कभी दूर नहीं हुए..गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और पिछले दो कार्यकाल से राज्यसभा सांसद हैं, उनका मौजूदा कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है,ऐसे समय में जब कांग्रेस में नई पीढ़ी को आगे लाने की चर्चा चल रही है, तब दिग्विजय सिंह की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कई राजनीतिक संकेत दे रही है..सवाल आखिर दिग्गी राजा के इरादे क्या हैं?
भोपाल में रंग पंचमी के दिन की गई यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक किसान मुद्दे की प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं थी..यह दरअसल तीन महत्वपूर्ण राजनीति का संकेत देती है..किसानों की राजनीति
कांग्रेस की आंतरिक राजनीति
दिग्विजय सिंह की व्यक्तिगत राजनीतिक भूमिका.. बासमती का मुद्दा..किसानों के जरिए राजनीतिक जमीन अपने और पार्टी के लिए मजबूत करना..मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में खेती का बड़ा विस्तार हुआ है.. खासतौर पर नर्मदा और चंबल क्षेत्र में बासमती धान की खेती तेजी से बढ़ी है..समस्या यह है कि जीआई टैग न मिलने के कारण इस क्षेत्र के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में वह पहचान नहीं मिलती जो पंजाब या हरियाणा के किसानों को मिलती है..दिग्विजय सिंह ने इसी आर्थिक असमानता को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है..अगर यह मुद्दा बड़ा बनता है तो इससे सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं..ग्वालियर-चंबल क्षेत्र,नर्मदांचल क्षेत्र..मध्य प्रदेश के करीब 13–14 जिले
यह वही क्षेत्र हैं जहां किसान राजनीति हमेशा प्रभावशाली रही है..दिग्विजय सिंह का संदेश साफ है,अगर सरकार किसानों के हित में फैसला नहीं करती तो वे संघर्ष करेंगे..संसद सत्र से ठीक पहले इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की टाइमिंग भी बेहद दिलचस्प रही..सोमवार से संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है और ठीक उसके पहले भोपाल में यह मुद्दा उठाया गया..इसका मतलब साफ है..राज्यसभा सांसद के तौर पर यह मुद्दा संसद में भी उठाया जा सकता है..कांग्रेस इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी उठा सकती है..किसानों के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा जा सकता है..दिग्विजय सिंह भले राज्यसभा से विदा लेने वाले हों, लेकिन वे अभी भी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं.. क्यों पिछले कुछ दिनों से एक चर्चा तेज थी कि दिग्विजय सिंह सक्रिय राजनीति से पीछे हट सकते हैं..कारण भी स्पष्ट क्यों कि राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने वाला..कांग्रेस में नई पीढ़ी को आगे लाने की बात राहुल गांधी के हस्तक्षेप से सामने आ रहेफैसला बता रहे.. यही नहींउनका सोशल मीडिया पोस्ट..लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ संदेश दिया..राजनीति से संन्यास नहीं, सिर्फ पद से दूरी..यह फर्क बहुत महत्वपूर्ण है.. सवालअगर वे चुनावी राजनीति से थोड़ा पीछे हटते हैं तो भी वे रणनीतिक सलाहकार और आंदोलनकारी नेता की भूमिका निभा सकते हैं..दिग्विजय सिंह ने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो वे अनशन पर बैठ जाएंगे तो छुपे राजनीतिक संकेतों को जोड़ें तो एक नई तस्वीर बनती है..दिग्विजय सिंह शायद अब चुनावी राजनीति से थोड़ा दूर लेकिन जनआंदोलनों के जरिए सक्रिय ऐसी भूमिका तलाश रहे हैं..यह भूमिका उन्हें एक मार्गदर्शक,मोरल पॉलिटिकल लीडर की तरह स्थापित कर सकती है..निष्कर्ष यही निकाला जा सकता है..
भोपाल की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ बासमती चावल की बात नहीं थी..
यह दिग्विजय सिंह की नई राजनीतिक पोजिशनिंग का संकेत भी थी..उन्होंने तीन संदेश दिए.. किसानों के मुद्दे पर संघर्ष जारी रहेगा..राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे.. पद भले खत्म हो जाए, लेकिन भूमिका खत्म नहीं होगी.. संदेश कांग्रेस नेतृत्व के लिए कि वह तय करें कि केंद्र या राज्य में उनकी भूमिका क्या होगी इरादे संन्यास लेने के बिल्कुल नहीं है..इसलिए सवाल यही है..क्या दिग्गी राजा अब आंदोलन की राजनीति की राह पकड़ रहे हैं?या फिर बासमती के बहाने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी नई भूमिका तय कर रहे हैं?आने वाले महीनों में इसका जवाब साफ हो जाएगा..

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