दीपोत्सव 2023: छह दिन का भव्य आयोजन
इस साल दीपोत्सव का आयोजन छह दिनों तक किया जाएगा। 18 अक्टूबर से शुरू होकर यह भव्य पर्व 23 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे प्रमुख पर्व इस आयोजन का हिस्सा होंगे। जयादित्य पंचांग के संपादक पं. अमित शर्मा और आचार्य मुदित ने इस बार के दीपोत्सव से जुड़ी तिथियों और शुभ मुहूर्त की जानकारी साझा की है।
धनतेरस: 18 अक्टूबर
धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का विशेष योग बन रहा है। शाम 5:09 बजे से उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा, जो व्यवसाय, आत्मबल और शक्ति को बढ़ाने वाला है। यह दिन खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
रूप चौदस: 19 अक्टूबर
रूप चौदस 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। परंपरा के अनुसार, सूर्यास्त के बाद चार बत्तियों वाला दीपक जलाने से नरक से मुक्ति मिलती है। साथ ही, उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है।
दीपावली: 20 अक्टूबर
दीपावली का मुख्य पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन अमावस्या दोपहर 2:27 बजे से शुरू होगी और प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा। पं. अमित शर्मा के अनुसार, प्रदोषकाल, वृषभ लग्न और सिंह लग्न में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
कार्तिक अमावस्या: 21 अक्टूबर
21 अक्टूबर को कार्तिक अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन पितरों का श्राद्ध और दान-पुण्य करना चाहिए। हालांकि, इस दिन प्रदोषकाल में अमावस्या नहीं होने के कारण लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त नहीं मिलेगा।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव: 22 अक्टूबर
22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।
भाई दूज: 23 अक्टूबर
दीपोत्सव का अंतिम पर्व भाई दूज 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाइयों का तिलक करती हैं और उनके दीर्घायु की कामना करती हैं। भाई अपनी बहनों के घर जाकर भोजन करते हैं। साथ ही, यम तर्पण और यम पूजा भी इस दिन की परंपराओं का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
दीपोत्सव 2023 भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। छह दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व और धार्मिक मान्यता है। शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखते हुए पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने से यह पर्व और भी मंगलमय बनता है।