दूषित पानी कांड पर RSS दफ्तर में गुप्त बैठक, कलेक्टर-मेयर पर कांग्रेस के सवाल

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दूषित पानी कांड पर RSS दफ्तर में गुप्त बैठक, कलेक्टर-मेयर पर कांग्रेस के सवाल

इंदौर में दूषित पानी से मौतें और RSS दफ्तर में देर रात बैठक पर सियासी तूफान

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हो रही मौतों के बीच कलेक्टर शिवम वर्मा और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव बुधवार देर रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे। इस मुलाकात ने प्रशासन और राजनीति दोनों स्तरों पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं।

RSS कार्यालय में डेढ़ घंटे की वन-टू-वन चर्चा

सूत्रों के अनुसार कलेक्टर और महापौर की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक वन-टू-वन चर्चा हुई। बताया गया कि बातचीत में भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों, प्रशासनिक तालमेल की कमी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर फोकस रहा। सूत्रों का दावा है कि मामले को ठीक से नहीं संभाल पाने पर महापौर को बैठक में कड़ी फटकार भी झेलनी पड़ी।

जानकारी के मुताबिक महापौर रामबाग स्थित नए संघ कार्यालय ‘सुदर्शन’ सरकारी वाहन से पहुंचे थे। उन्हें छोड़कर शासकीय वाहन वापस लौट गया और बैठक समाप्त होने के बाद महापौर अपने निजी वाहन से लौटे।

महापौर का स्पष्टीकरण: ‘सहज ही संघ कार्यालय आया था’

बैठक के बाद बाहर निकलते समय महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि वे संघ कार्यालय आते-जाते रहते हैं और इस बार भी सहज रूप से ही वहां पहुंचे थे। उन्होंने मुलाकात को सामान्य बताया, जबकि सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रशासनिक समन्वय और इंदौर की छवि सुधारने पर जोर दिया गया।

इंदौर की छवि सुधारने और राहत कार्यों पर जोर

सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान यह चर्चा भी हुई कि आगे ऐसी स्थिति न बने कि प्रशासनिक तालमेल की कमी का मुद्दा उठे। अधिकारियों से अपेक्षा जताई गई कि वे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बात सुनकर उनके साथ तालमेल से काम करें।

चर्चा का मुख्य फोकस इंदौर की छवि को ‘स्वच्छ’ करने पर रहा। विशेष रूप से भागीरथपुरा में हालात सामान्य करने, हर जरूरतमंद तक पहुंचने और बीमारों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही न होने पर जोर दिया गया।

कांग्रेस का हमला: प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल

कांग्रेस ने इस मुलाकात को लेकर प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया ने आरोप लगाया कि जब नलों से जहर बह रहा है और जनता मर रही है, तब प्रशासन लाचार दिखाई दे रहा है और कलेक्टर संघ कार्यालय जाकर राजनीतिक निष्ठा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक मर्यादा का घोर उल्लंघन बताया और कहा कि कलेक्टर का संघ कार्यालय जाना प्रशासन और सत्ताधारी संगठन के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करता है।

चौरसिया के अनुसार यह स्थिति दिखाती है कि भाजपा शासन में संवैधानिक पद स्वतंत्र न रहकर राजनीतिक एजेंडे के उपकरण बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर संघ कार्यालय में ‘सलामी’ दे रहे हैं और इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।

पहले से ही एक्शन मोड में BJP संगठन

भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के मामले में भारतीय जनता पार्टी संगठन पहले ही सक्रिय हो चुका है। इंदौर में भाजपा के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने बंद कमरे में बैठक की थी, जिसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव, स्थानीय पार्षद कमल वाघेला, एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा और संगठन के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे शामिल हुए थे।

सूत्रों के अनुसार इस बैठक में हितानंद शर्मा ने निर्देश दिए कि सभी लोग आपसी तालमेल से काम करें और बेवजह की बयानबाजी से दूर रहें। इसी मामले को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी दिल्ली जाकर उच्च नेतृत्व से चर्चा कर चुके हैं। इसके बाद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगा दी गई है।

भागीरथपुरा में मौतों और बीमारी का बढ़ता आंकड़ा

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से मौतों का सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार यहां मौतों का आंकड़ा 18 तक पहुंच चुका है। हाल में 70 वर्ष से अधिक उम्र की हरकू बाई कुंवर की मौत हो गई, जिनके परिजनों का कहना है कि दूषित पानी पीने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इससे पहले 17 मौतों की पुष्टि हो चुकी थी और सरकार ने भी क्षेत्र में महामारी फैलने की बात स्वीकार की है।

जानकारी के मुताबिक विभिन्न अस्पतालों के आईसीयू में कई मरीज भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है। कुल दर्जनों मरीज अब भी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जबकि इससे पहले एक समय पर भर्ती मरीजों की संख्या कई सौ तक पहुंच गई थी। अलग-अलग अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को एक जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी चल चुकी है और कई मरीजों को बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में स्थानांतरित किया गया।

जहरीले पानी से फैली दहशत और जांच

दूषित पानी से जुड़ी खबरों के कारण इंदौर के लोगों में गहरी दहशत फैल गई है। कुछ छात्र और कामकाजी लोग शहर छोड़कर अपने घर लौटने लगे हैं। एक मामले में सिवनी जिले के 18 वर्षीय युवक आदित्य मिश्रा की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे जबलपुर इलाज के लिए ले गए, जहां जांच में वह हेपेटाइटिस-ए पॉजिटिव पाया गया।

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने समाचार एजेंसी को दिए बयान में कहा था कि भागीरथपुरा क्षेत्र में फैले संक्रमण की जांच एम्स भोपाल और आईसीएमआर की टीम कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि एपिडेमिक कैसे फैला।

प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक दबाव

दूषित पानी से मौतों के मामले में राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की है। इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर भेज दिया गया। इसके अलावा एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया।

घटना के विरोध में कांग्रेस पूरे प्रदेश में घंटा बजाकर प्रदर्शन कर चुकी है। प्रभावित क्षेत्र में एक बच्चे की मौत के बाद लोगों, विशेष रूप से माताओं में भारी भय का माहौल है और कई महिलाएं अपने बच्चों को लेकर अस्पतालों की ओर दौड़ती नजर आईं।

निष्कर्ष: स्वास्थ्य आपदा के बीच निष्पक्षता पर बहस

भागीरथपुरा में दूषित पानी से लगातार हो रही मौतें इंदौर के लिए गंभीर स्वास्थ्य और प्रशासनिक संकट बन गई हैं। एक ओर सरकार और प्रशासन राहत, इलाज और जांच के कदम उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर कलेक्टर और महापौर की देर रात RSS कार्यालय में हुई बैठक ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इसे प्रशासन और सत्तारूढ़ संगठन के गठजोड़ का प्रमाण बता रही है, जबकि सत्ता पक्ष और जुड़े अधिकारी इसे समन्वय और हालात सुधारने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट, प्रशासनिक कदम और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तय करेंगी कि इस संकट को किस तरह याद किया जाएगा।

Janmejay Chaturvedi