दिल्ली-मुंबई एअर इंडिया फ्लाइट की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग
दिल्ली से मुंबई के लिए उड़ान भरने वाली एअर इंडिया की एक फ्लाइट को तकनीकी खराबी के कारण उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। बोइंग 777-300ER विमान के एक इंजन में गंभीर समस्या आने के बावजूद पायलटों ने दूसरे इंजन की मदद से विमान को सुरक्षित उतार लिया और सभी यात्री सुरक्षित रहे।
टेक-ऑफ के बाद इंजन में ऑइल प्रेशर शून्य
एअर इंडिया की AI-887 फ्लाइट ने सुबह 6:10 बजे दिल्ली से मुंबई के लिए उड़ान भरी थी। टेक-ऑफ के बाद फ्लैप रिट्रैक्शन के दौरान क्रू ने दाहिने इंजन में ऑइल प्रेशर तेजी से कम होते देखा, जो बाद में शून्य हो गया। इसे विमानन मानकों के अनुसार बेहद गंभीर तकनीकी स्थिति माना जाता है, क्योंकि ऑइल प्रेशर खत्म होने पर इंजन के मूविंग पार्ट्स तक लुब्रिकेशन नहीं पहुंच पाता और इंजन के ओवरहीट होकर फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
स्थिति को देखते हुए क्रू ने तुरंत निर्णय लेते हुए विमान को वापस दिल्ली की ओर मोड़ दिया। फ्लाइट ने लगभग 40 मिनट हवा में रहने के बाद सुबह 6:52 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग की। विमान में करीब 335 यात्री सवार थे, जिन्हें बाद में दूसरे विमान से गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की गई।
एक इंजन पर भी सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता
आधुनिक वाणिज्यिक विमान दोहरे इंजन से लैस होते हैं और इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाता है कि एक इंजन फेल होने की स्थिति में भी दूसरा इंजन विमान को सुरक्षित रूप से नजदीकी हवाई अड्डे तक ले जा सके। इस घटना में भी पायलटों ने प्रभावित इंजन की पावर घटाकर या उसे बंद करके केवल दूसरे इंजन के भरोसे विमान को नियंत्रित रखा और सुरक्षित लैंड कराया।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, टेक-ऑफ के बाद विमान कुछ समय तक हवा में रहा और फिर यू-टर्न लेकर दिल्ली लौट आया। विमानन नियामक सूत्रों ने बताया कि इस विमान के पुराने रिकॉर्ड की भी समीक्षा की गई, लेकिन तेल की खपत या अन्य पैरामीटर्स में कोई असामान्य बात पहले दर्ज नहीं मिली थी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA की जांच
घटना के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एअर इंडिया से इस फ्लाइट से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही विमानन नियामक डीजीसीए को पूरी तकनीकी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इंजन में ऑइल प्रेशर शून्य होने की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
मंत्रालय ने एयरलाइन को यह भी निर्देश दिया कि सभी यात्रियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और उन्हें अगली उपलब्ध फ्लाइट्स में समायोजित किया जाए। एयरलाइन की ओर से प्रभावित यात्रियों को रीरूटिंग और अन्य सुविधाएं देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
निष्कर्ष: त्वरित निर्णय से टला बड़ा हादसा
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि तकनीकी खराबी के बावजूद प्रशिक्षित पायलट, आधुनिक विमानन मानक और दोहरे इंजन की क्षमता बड़ी दुर्घटनाओं को टालने में अहम भूमिका निभाते हैं। समय पर समस्या की पहचान, तुरंत यू-टर्न लेने का फैसला और इमरजेंसी लैंडिंग की सुरक्षित प्रक्रिया ने 335 यात्रियों की जान की हिफाजत की। अब जांच एजेंसियां इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि इंजन के ऑइल प्रेशर में अचानक आई कमी का कारण क्या था, ताकि उड़ान सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जा सके।
Amit Pateria