अजमेर दरगाह के लिए PM मोदी की चादर पर रोक की मांग, SC ने त्वरित सुनवाई ठुकराई

· 1 min read
अजमेर दरगाह के लिए PM मोदी की चादर पर रोक की मांग, SC ने त्वरित सुनवाई ठुकराई

अजमेर दरगाह के लिए पीएम मोदी की चादर पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित सुनवाई से इनकार

अजमेर शरीफ दरगाह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजी गई चादर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में इस चादर को दरगाह पर चढ़ाने से रोक लगाने की मांग की गई थी। यह चादर ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के मौके पर चढ़ाई जानी है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और तत्काल सुनवाई की मांग

यह अर्जी चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष पेश हुई। याचिकाकर्ता ने मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की, लेकिन बेंच ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि आज इस पर सुनवाई संभव नहीं है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में भी प्रधानमंत्रियों की ओर से अजमेर दरगाह के लिए चादर भेजने की परंपरा रही है और प्रधानमंत्री मोदी ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाया है।

याचिकाकर्ता की दलीलें और विवाद का संदर्भ

यह याचिका हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से दाखिल की गई है। गुप्ता उन मुकदमों में भी पक्षकार रहे हैं, जिनमें दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह एक हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से एक विवादित ढांचे पर चढ़ाने के लिए चादर भेजना गलत है और यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसा कदम है।

गुप्ता का तर्क है कि अजमेर दरगाह परिसर विवादित है और इस संबंध में ट्रायल कोर्ट में मामला लंबित है। उनका कहना है कि ऐसे समय में प्रधानमंत्री की ओर से चादर भेजना फेयर ट्रायल के अधिकार के खिलाफ है।

दरगाह को लेकर चल रहे दावे और अन्य कानूनी कदम

अजमेर दरगाह को लेकर समय-समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि वहां पहले भगवान शिव का मंदिर था। इस संबंध में अदालतों में मुकदमे लंबित हैं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से सर्वे कराने की मांग भी उठती रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस बार पीएम मोदी की ओर से भेजी गई चादर को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा दरगाह पर चढ़ाया जाना प्रस्तावित है। इसी के खिलाफ रोक लगाने की मांग सुप्रीम कोर्ट में की गई।

इसी मुद्दे पर ऐसी ही एक अर्जी अजमेर की स्थानीय अदालत में भी दाखिल की गई है, जिसमें तर्क दिया गया है कि जब तक परिसर विवादित है, तब तक सरकार की ओर से चादर चढ़ाने जैसे प्रतीकात्मक कदम न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है और प्रधानमंत्री द्वारा दरगाह के लिए चादर भेजने की स्थापित परंपरा का उल्लेख किया है। वहीं, याचिकाकर्ता न्यायिक प्रक्रिया और फेयर ट्रायल पर संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए अपने विरोध को कायम रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में इस पर आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि चादर चढ़ाने के कार्यक्रम पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

L. N. Bhargava