भोपाल मेट्रो में सफर के सख्त नियम, थूकने पर जुर्माना

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भोपाल मेट्रो में सफर के सख्त नियम, थूकने पर जुर्माना

भोपाल मेट्रो में सफर के सख्त नियम और जुर्माने की व्यवस्था

भोपाल मेट्रो की शुरुआत के साथ ही यात्रियों के लिए विस्तृत नियम और आचार संहिता लागू की गई है। सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सामान की सीमा से लेकर यात्री व्यवहार तक, कई प्रावधान तय किए गए हैं जिनका उल्लंघन करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।

सामान और प्रतिबंधित वस्तुओं पर स्पष्ट गाइडलाइन

मेट्रो में यात्रा करते समय यात्री अधिकतम 25 किलोग्राम वजनी सामान ही साथ ले जा सकते हैं। इससे अधिक वजन की अनुमति नहीं होगी, ठीक वैसे ही जैसे हवाई यात्रा में सामान की सीमा तय रहती है।

पालतू पशु-पक्षी के साथ यात्रा करने की अनुमति नहीं है। पेट्रोल, डीजल, हथियार, खुले बीड़ी-सिगरेट, माचिस, लाइटर, गुटखा, तंबाकू और सूखे ज्वलनशील पदार्थ जैसे सामान सख्ती से प्रतिबंधित हैं। मोबाइल फोन और स्मार्ट वॉच जैसे सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाए जा सकते हैं, लेकिन ड्रोन, सैटेलाइट फोन, पोर्टेबल और रेडियो संचार उपकरण तथा कैमरा मेट्रो में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

शराब की दो सीलबंद बोतलें ले जाने की छूट मिल सकती है, पर शर्त यह रहेगी कि वे खुली न हों और नियमों के अनुरूप हों।

किसको यात्रा की अनुमति नहीं

संक्रामक रोग से पीड़ित व्यक्ति, मानसिक रूप से अत्यधिक अस्थिर या असंयमी यात्री और नशे की हालत में मौजूद शराबी यात्रियों को मेट्रो में यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह प्रावधान अन्य यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

खेल उपकरणों के लिए विशेष प्रावधान

तीरंदाजी, मार्शल आर्ट, तलवारबाजी या नानचाकू जैसे खेल उपकरण मेट्रो में ले जाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्त है कि संबंधित सक्रिय खिलाड़ी या अधिकृत संचालक की अनुमति हो और उपकरण ढककर या ठीक से पैक करके लाए जाएं।

स्टेशनों और ट्रेनों में सीसीटीवी निगरानी

भोपाल मेट्रो का प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स तक बनाया गया है। इस रूट पर आठ स्टेशन हैं—सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स। सभी स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और मेट्रो ट्रेन के अंदर भी निगरानी की व्यवस्था है। यात्रियों की हर गतिविधि कैमरों में रिकॉर्ड होती रहेगी।

सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की एक सिक्योरिटी कंपनी के लगभग ढाई सौ गार्ड तैनात किए गए हैं। शुरुआती दिनों में कुछ यात्रियों ने कुछ गार्डों के व्यवहार की शिकायत मेट्रो अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी की है।

थूकने, बिना टिकट और इमरजेंसी बटन पर जुर्माना

मेट्रो के अंदर या स्टेशन परिसर में थूकने पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्री को सभी स्टेशनों का किराया देने के साथ अतिरिक्त 50 रुपये अलग से जमा करने होंगे।

सबसे सख्त प्रावधान इमरजेंसी बटन के दुरुपयोग पर है। बिना वजह इमरजेंसी बटन दबाने पर 200 रुपये से लेकर अधिकतम 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माने की राशि अलग-अलग मामलों और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर तय होगी।

अन्य प्रतिबंध और कानूनी प्रावधान

यात्रियों को मेट्रो स्टेशन या ट्रेन के अंदर किसी भी प्रकार का प्रदर्शन, विरोध या सभा करने की अनुमति नहीं है। कोच में तोड़फोड़ करना, लिखाई-चिपकाई करना, निर्देश के बावजूद कोच खाली करने से इनकार करना, आपत्तिजनक सामग्री साथ रखना या बिना अनुमति कोई सामान बेचने की कोशिश करना भी नियमों के खिलाफ है।

इन सभी उल्लंघनों पर मेट्रो रेलवे (परिचालन और अनुरक्षण) अधिनियम 2002 के तहत जुर्माने और जरूरत पड़ने पर सजा का प्रावधान है। सभी आठ स्टेशनों पर इन नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई है, ताकि यात्रियों को पहले से ही चेतावनी और मार्गदर्शन मिल सके।

जुर्माना वसूली और पुलिस कार्रवाई की व्यवस्था

स्टेशन मास्टर, कंट्रोलर और असिस्टेंट कंट्रोलर को मौके पर ही जुर्माना वसूलने के लिए अधिकृत किया गया है। यदि कोई यात्री जुर्माना भरने से इनकार करता है, तो उसे आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले किया जा सकता है।

भोपाल में मेट्रो सेवा की शुरुआत

घोषणा के लगभग सात साल बाद भोपाल देश का 26वां शहर बन गया है जहां मेट्रो ट्रेन शुरू हुई है। रविवार को पहले दिन करीब छह हजार लोगों ने मेट्रो में सफर किया और नए अनुभव का आनंद लिया।

औपचारिक शुभारंभ शनिवार को हुआ, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो में यात्रा की। पहले कमर्शियल रन में भी विभिन्न आयु वर्ग के लोग, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, बड़ी संख्या में शामिल हुए।

निष्कर्ष: नियम पालन से बनेगा सफर सुरक्षित और सहज

भोपाल मेट्रो को सुचारु, सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े लेकिन स्पष्ट नियम लागू किए हैं। यात्रियों के लिए यह आवश्यक है कि वे सामान की सीमा, प्रतिबंधित वस्तुओं, व्यवहार के नियम और जुर्माने से जुड़े प्रावधानों को समझकर उनका पालन करें। इससे न केवल उनका सफर बिना बाधा के पूरा होगा, बल्कि पूरे शहर के लिए यह नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बन सकेगी।

Sachin Saxena