फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव पर एयर इंडिया पर कार्रवाई, उपभोक्ता आयोग का फैसला
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल (क्रमांक-1) ने एयर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सेवा में कमी को प्रमाणित माना है। आयोग ने एयर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह एक यात्री के खाते से काटे गए फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक वापस करे और उसे क्षतिपूर्ति भी प्रदान करे।
फ्लाइट शेड्यूल में लगातार बदलाव से पैदा हुआ विवाद
यह मामला भोपाल निवासी सुरेंद्र उपाध्याय द्वारा दायर उपभोक्ता परिवाद से जुड़ा है। वे एयर इंडिया की फ्रीक्वेंट फ्लायर योजना के सदस्य हैं। उन्होंने 14 मार्च 2021 को अपने अर्जित अंकों का उपयोग करते हुए दिल्ली से भोपाल के लिए 6 मई 2021 की उड़ान का अवॉर्ड टिकट बुक किया था।
इसके बाद एयर इंडिया ने 21 अप्रैल 2021 को ई-मेल के माध्यम से यात्रा की तिथि 6 मई से बदलकर 7 मई कर दी। इसके बाद 30 अप्रैल 2021 को फिर ई-मेल कर यात्रा तिथि को 8 मई कर दिया गया। बार-बार शेड्यूल बदलने से यात्री असमंजस में आ गया और उसने 2 मई 2021 को ई-मेल के माध्यम से टिकट निरस्त कर पूरे फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक वापस करने की मांग की।
रिफंड से इनकार और “नो-शो” का तर्क
परिवादी का कहना था कि एयर इंडिया के नियमों के अनुसार फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव होने पर बिना किसी पेनल्टी के टिकट निरस्त कर पूरा रिफंड दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद न तो समय पर जवाब दिया गया और न ही पूरा रिफंड किया गया। इसके उलट लगभग 3,200 फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक पेनल्टी के रूप में काट लिए गए।
काफी समय बाद, अप्रैल 2022 में एयर इंडिया की ओर से जवाब मिला, जिसमें टिकट को “नो-शो” मानते हुए रिफंड से इनकार कर दिया गया। इस रवैये से आहत होकर सुरेंद्र उपाध्याय ने जिला उपभोक्ता आयोग, भोपाल में शिकायत दर्ज कराई।
एकपक्षीय सुनवाई और आयोग की स्पष्ट टिप्पणियां
आयोग के समक्ष एयर इंडिया को नोटिस तामील होने के बावजूद न तो कोई जवाब प्रस्तुत किया गया और न ही कोई दस्तावेज दाखिल किए गए। इस कारण मामले की एकपक्षीय सुनवाई हुई। आयोग की सदस्या डॉ. प्रतिभा पाण्डेय ने आदेश में कहा कि यात्रा की तिथि बार-बार बदलना एयरलाइन की जिम्मेदारी थी और इसी कारण यात्री को टिकट रद्द कराना पड़ा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसी स्थिति में टिकट को “नो-शो” मानकर अंक न लौटाना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा की श्रेणी में आता है। यह फैसला दिसंबर के पहले सप्ताह में सुनाया गया।
अंक वापसी, क्षतिपूर्ति और ब्याज का आदेश
आयोग ने निर्देश दिया कि एयर इंडिया दो माह के भीतर यात्री के खाते से काटे गए 3,200 फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक वापस करे। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अदा करे। यदि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो परिवाद दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
आयोग ने यह भी कहा कि चूंकि एयर इंडिया की ओर से कोई जवाब या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, इसलिए परिवादी द्वारा दिए गए दस्तावेजों और शपथपत्र के आधार पर ही एकपक्षीय निर्णय लिया गया। इस तरह आयोग ने एयरलाइन की तरफ से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा को साबित मानते हुए यात्री को राहत प्रदान की।
Adarsh Chaurasiya