सिंगरौली में 6 लाख नहीं अब तक सिर्फ 33 हजार पेड़ कटे, मंत्री का दावा

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सिंगरौली में 6 लाख नहीं अब तक सिर्फ 33 हजार पेड़ कटे, मंत्री का दावा

सिंगरौली में पेड़ कटाई पर विवाद, मंत्री ने दी सफाई

मध्यप्रदेश के सबसे प्रदूषित शहर सिंगरौली में घिरौली कोल ब्लॉक के लिए छह लाख पेड़ काटने के विरोध को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है। कांग्रेस और स्थानीय लोग बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई का विरोध कर रहे हैं और मामला अदालत तक पहुंच चुका है।

मंत्री संपतिया उइके का बयान: 6 लाख नहीं, अभी 33 हजार पेड़ कटे

सिंगरौली जिले की प्रभारी और प्रदेश की पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने स्पष्ट किया कि सिंगरौली में छह लाख पेड़ काटे जाने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बार-बार यह कहा जा रहा है कि छह लाख पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि उनकी जानकारी के अनुसार अब तक केवल 33 हजार पेड़ ही काटे गए हैं।

मंत्री के अनुसार छह लाख पेड़ों की कटाई केवल प्रस्तावित है और विकास कार्यों की आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे कटाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अब तक जो पेड़ काटे गए हैं, वे सभी नियमों और प्रावधानों के तहत काटे गए हैं और छह लाख पेड़ों की कटाई अभी तक नहीं हुई है।

जल जीवन मिशन और विभागीय उपलब्धियां

भोपाल के बाणगंगा स्थित जल भवन में मोहन सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में हर घर जल का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जा रहा है और सरकार का फोकस प्रत्येक परिवार को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।

18 दिसंबर 2025 तक प्रदेश के 81 लाख 21 हजार ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 72.87 प्रतिशत परिवारों को घर-घर नल से शुद्ध पानी मिल रहा है। इसे विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया गया है।

बुरहानपुर बना देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला

मंत्री ने जानकारी दी कि भारत सरकार ने बुरहानपुर जिले को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित किया है। साथ ही प्रदेश की सभी जल परीक्षण प्रयोगशालाओं का एनएबीएल प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है, जिससे मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पुरस्कार

भारत सरकार के "स्वच्छ जल से सुरक्षा" अभियान में मध्यप्रदेश को देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा छिंदवाड़ा की अनिता चौधरी को जल जीवन मिशन के तहत जल योद्धा श्रेणी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

गांवों की तस्वीर में बदलाव

पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 13.69 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन दिए गए हैं। 10,440 गांवों को हर घर जल ग्राम घोषित किया गया है। 64 गांवों में पायलट आधार पर 24×7 जल आपूर्ति की व्यवस्था लागू की गई है।

इसके साथ ही 15,238 नए हैंडपंप और नलकूप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग के सभी जिलों में एकल नल जल योजनाएं 100 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं, जिससे सात लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है।

कानून, तकनीक और डिजिटल सिस्टम पर जोर

संपतिया उइके ने बताया कि बोरवेल हादसों की रोकथाम के लिए बोरवेल अधिनियम लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। योजनाओं की निगरानी के लिए जल रेखा मोबाइल ऐप और शिकायत निवारण के लिए जल दर्पण पोर्टल शुरू किए गए हैं।

नल जल योजनाओं के सभी स्रोतों और टंकियों की जियो-टैगिंग, इन्वेंटरी और ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, ई-प्रबंधन और ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से विभाग का कामकाज बड़े पैमाने पर डिजिटल किया गया है। मंत्री के अनुसार विभाग लगातार सीएम हेल्पलाइन में ग्रेड ‘ए’ में बना हुआ है।

महिलाओं और बच्चों को लाभ

मंत्री ने कहा कि घर तक पानी पहुंचने से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का समय बचा है और बालिकाओं की स्कूल में उपस्थिति में वृद्धि हुई है। बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों के मामले नगण्य रहे हैं।

अब तक 10 लाख से अधिक जल नमूनों की जांच की गई है और महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी की जांच का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर भी पानी की गुणवत्ता की निगरानी हो रही है।

आगामी लक्ष्य: हर घर तक नल का जल

सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 100 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है। सभी गांवों को हर घर जल प्रमाणित करने और जनजातीय क्षेत्रों में मिशन की गति तेज करने की योजना है।

इसके साथ ही जल योजनाओं में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, 24×7 जल आपूर्ति प्रणाली और सतही स्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है। इस पूरी प्रक्रिया के बीच सिंगरौली में पेड़ कटाई का मुद्दा राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है, जिस पर सरकार ने प्रस्तावित और वास्तविक कटाई के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की है।

Pushpendra Chaubey