गाजियाबाद में तलवार बांटने पर बवाल, गार्डों की गिरफ्तारी और हिंदू रक्षा दल का दावा

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गाजियाबाद में तलवार बांटने पर बवाल, गार्डों की गिरफ्तारी और हिंदू रक्षा दल का दावा

गाजियाबाद में हिंदू रक्षा दल द्वारा तलवार बांटने पर केस, कई गिरफ्तार

गाजियाबाद के शालीमार गार्डन क्षेत्र में हिंदू रक्षा दल के सदस्यों द्वारा घर-घर जाकर तलवारें और अन्य धारदार हथियार बांटे जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। 29 दिसंबर को रिकॉर्ड किए गए 21 सेकंड के इस वीडियो में संगठन के कार्यकर्ता भारत माता की जय के नारे लगाते हुए एक घर के बाहर रुकते दिखते हैं और बाहर आए व्यक्ति के हाथ में तलवार देकर बहन-बेटियों की सुरक्षा के नाम पर उसका उपयोग करने की बात कहते हैं।

तलवार बांटने पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां

इस घटना के बाद पुलिस ने हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र उर्फ पिंकी चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज कर 6 जनवरी को उन्हें उनके बेटे सहित गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले तलवारें बांटने और वीडियो में दिखने वाले 10 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। पुलिस ने कई घरों से बांटी गई तलवारें भी जब्त की हैं।

तलवारें लेने वाले कुछ लोग भी कानूनी कार्रवाई की जद में आए हैं। इनमें एक सोसाइटी के गार्ड सहित कई स्थानीय लोग शामिल हैं, जिन्हें वीडियो और फोटो के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार किया। ये लोग दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अनजाने में तलवारें हाथ में लीं और उनका किसी संगठन से संबंध नहीं है।

आरोपी गार्ड के परिवार और स्थानीय लोगों का पक्ष

शालीमार गार्डन में एक सोसाइटी के गार्ड की पत्नी, जिन्हें रिपोर्ट में भावना नाम से उल्लेख किया गया है, का कहना है कि उनके पति किसी संगठन से जुड़े नहीं हैं। उनके अनुसार, जिस दिन घटना हुई, उनके पति घर में सो रहे थे, तभी हिंदू रक्षा दल के सदस्य आए, उन्हें बाहर बुलाया और अचानक हाथ में तलवार थमा कर नारा बुलवा दिया। बाद में उसी शाम पुलिस आई और उनके पति को हिरासत में ले गई। भावना बताती हैं कि पुलिस ने उन्हें अदालत में जाकर बात करने की सलाह दी।

भावना से जब हथियार बांटे जाने को लेकर राय पूछी गई, तो उन्होंने वर्तमान हालात का हवाला देते हुए कहा कि डर का माहौल है और उन्हें लगता है कि सबके पास हथियार होना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश की घटनाओं को उदाहरण के रूप में सामने रखा और खुद को असुरक्षित महसूस करने की बात कही।

इसी इलाके में दुकान चलाने वाले अमित के भाई को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अमित का कहना है कि उनका भाई दुकान के बाहर खड़ा था, जब वहां तलवारें बांटी जा रही थीं। मौजूद लोगों की तरह उसके हाथ में भी तलवार दे दी गई और किसी ने उसकी फोटो खींच ली। अमित का दावा है कि उनके भाई को यह एहसास नहीं था कि सिर्फ तलवार पकड़ लेना इतना बड़ा अपराध माना जाएगा।

अमित ने स्पष्ट किया कि उनका हिंदू रक्षा दल या उसके कार्यक्रमों से कोई लेना-देना नहीं है और वे अपने काम से मतलब रखने वाले लोग हैं। उनका कहना है कि किसी भी अपराध से निपटने के लिए प्रशासन मौजूद है और आम लोगों को हथियार उठाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संगठन की गतिविधियों को गलत बताकर कहा कि हिंदू-मुस्लिम या जाति के नाम पर विभाजन नहीं होना चाहिए।

हिंदू रक्षा दल का पक्ष और तलवार बांटने की दलील

शालीमार गार्डन में स्थित हिंदू रक्षा दल के ऑफिस में राष्ट्रीय संयोजक संकेत कटारा से दैनिक भास्कर ने बातचीत की। तलवार बांटने पर केस दर्ज होने के बाद भी संकेत कटारा इसे गलत नहीं मानते। उनका कहना है कि इस कदम से न तो कोई अपराध हुआ, न शांति भंग हुई और न ही किसी को नुकसान पहुंचा। वे मानते हैं कि संगठन के सदस्यों को जमानत मिलने के बाद फिर से ऐसे कार्यक्रम पर विचार किया जा सकता है।

कटारा के अनुसार, बांग्लादेश में 15 दिनों के भीतर तीन हिंदू युवकों की हत्या की घटनाओं के बाद उनके कार्यकर्ता गुस्से में थे और उन्होंने शस्त्र पूजन के साथ घरों में तलवारें बांटने का कार्यक्रम तय किया, ताकि बहन-बेटियां अपनी सुरक्षा के लिए इनका उपयोग कर सकें। उन्होंने दावा किया कि देश में भीड़तंत्र के आगे कई बार पुलिस बेबस रही है और इसी इतिहास को देखते हुए आत्मरक्षा के नाम पर हथियार बांटे गए।

कानून के सवाल पर संकेत कटारा ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक छोटा सा गैरकानूनी कदम उठाया है, लेकिन उसकी तुलना देश के अन्य हिस्सों में खुलेआम हथियार दिए जाने के आरोपों से की। उनका कहना है कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि उन पर केस होगा, लेकिन वे पुलिस का केस झूठा बताते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकार लाइसेंस वाले हथियार देती है, और यदि उनसे कुछ गलत होता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

एक समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोपों पर कटारा ने कहा कि उनके भाषणों को वे “क्रिया की प्रतिक्रिया” मानते हैं। उन्होंने लव जिहाद, गाय कटने और हिंदुओं पर कथित अत्याचार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जहां अल्पसंख्यक आबादी अधिक होती है, वहां हिंदुओं को प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि “गलत काम” बंद हो जाएं तो वे किसी को भगाने की बात नहीं करते।

2024 में बांग्लादेशी बताकर मुस्लिमों की झुग्गियां तोड़ने के मामले पर उन्होंने खुद को भावुक बताते हुए कहा कि उस समय भी बांग्लादेश में हिंसा हो रही थी और अगर उन्हें कानून पर भरोसा नहीं होता तो वे बड़ा आंदोलन करते। उन्होंने कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं।

तलवारों का इंतजाम, ‘जिहादी प्रवृत्ति’ और फंडिंग पर दावे

तलवारें कहां से आईं, इस सवाल पर संकेत कटारा का कहना है कि दिल्ली में कहीं भी तलवारें आसानी से मिल जाती हैं और कई लोग पैसे की कमी के कारण इन्हें खरीद नहीं पाते। संगठन ने ऐसे ही लोगों को तलवारें दीं, खास तौर पर उन घरों में जहां लड़के नहीं हैं, ताकि वहां रहने वाली लड़कियां अपनी सुरक्षा के लिए सजग रहें।

कटारा ने “जिहादी किस्म” के लोगों से आशय उन लोगों से बताया जो उनके अनुसार उनके धर्म की लड़कियों को गलत नजर से देखते हैं या नाम बदलकर साजिशन फंसाते हैं। उनका कहना है कि ऐसे लोग भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में मौजूद हैं और अगर वे इस तरह की हरकत करेंगे तो बहन-बेटियों को आत्मरक्षा में तलवार उठानी पड़ेगी।

फंडिंग के सवाल पर उन्होंने कहा कि संगठन के एक लाख से अधिक कार्यकर्ता ही इसके लिए पैसे देते हैं और कोई अलग फंडिंग स्रोत नहीं है। संगठन के सदस्य ललित शर्मा ने दावा किया कि तलवारों के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती और ये ऑनलाइन व ऑफलाइन, दोनों तरह से आसानी से मिल जाती हैं। उनकी जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद में लगभग 15 लोगों को तलवारें बांटी गईं और पुलिस का फोन आने के बाद वितरण रोका गया। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी को मारना नहीं, बल्कि हिंदुओं को मजबूत करना है।

आर्म्स एक्ट 1959 के अनुसार, 9 इंच से लंबी तलवार बिना लाइसेंस रखना और उसका सार्वजनिक प्रदर्शन करना अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिए तीन साल तक की सजा हो सकती है। यह प्रावधान इस पूरे विवाद के कानूनी पहलू को रेखांकित करता है।

पिंकी चौधरी और उनकी बेटी के बयान

तलवार बांटने के मामले में केस दर्ज होने के बाद हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी कुछ समय तक फरार रहे। इस दौरान 31 दिसंबर को जारी किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि जो वे चाहते थे, वह कर दिखाया है और “आतंकवादियों” को संदेश मिल गया है कि हिंदू अब हथियार उठाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वे पीछे नहीं हटेंगे, चाहे कितने भी मुकदमे दर्ज हों।

3 जनवरी को सोशल मीडिया पर जारी एक अन्य वीडियो में पिंकी चौधरी ने कहा कि प्रशासन चाहे जितने मुकदमे दर्ज कर दे, वे लौटकर आएंगे तो मुंहतोड़ जवाब देंगे। बाद में 6 जनवरी को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

5 जनवरी को उनकी बेटी करुणा चौधरी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए थाने ले गई और घंटों तक सवाल-जवाब किए। करुणा ने तलवार बांटने को सही ठहराते हुए कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए हर घर में एक पिंकी चौधरी होना चाहिए।

हिंदू रक्षा दल का विवादित इतिहास

हिंदू रक्षा दल पहले भी कई बार सांप्रदायिक नारों, मुसलमानों पर हमलों और भड़काऊ बयानों के कारण विवादों में रहा है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद संगठन ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि देहरादून में कहीं भी कश्मीरी मुसलमान दिखेगा तो उसका “इलाज” किया जाएगा। संगठन ने दावा किया था कि उनकी टीमें सुबह से अलग-अलग इलाकों में जाएंगी और वे अब सरकार के भरोसे नहीं बैठेंगे।

अगस्त 2024 में गाजियाबाद की एक झुग्गी बस्ती में संगठन के अध्यक्ष पिंकी चौधरी और कुछ सदस्यों ने वहां रह रहे मुसलमानों को बांग्लादेशी बताकर पीटा, झुग्गियों में तोड़फोड़ की और सांप्रदायिक नारे लगाए। इस मामले में भी पुलिस ने पिंकी चौधरी के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था, हालांकि कुछ महीने बाद उन्हें जमानत मिल गई।

अगस्त 2021 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक रैली में भी मुसलमानों के खिलाफ खुलेआम नारेबाजी की गई थी, जहां पिंकी चौधरी ने भड़काऊ बयान दिए। उस समय भी उनकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में वे जमानत पर रिहा हो गए।

संबंधित मामला: बांग्लादेशी बताने वाली ‘मशीन’ पर सवाल

रिपोर्ट में संदर्भ के तौर पर 23 दिसंबर की एक अलग घटना का भी उल्लेख है, जब गाजियाबाद के कौशाम्बी थाने के एसएचओ अजय शर्मा, लोकल पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के साथ बिहारी मार्केट की झुग्गियों में पहुंचे। वहां वे लोगों की नागरिकता की जांच कर रहे थे और कथित तौर पर कहा कि “मशीन” कुछ लोगों को बांग्लादेशी बता रही है। इस “मशीन” की वास्तविकता और प्रक्रिया पर एक अलग रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं।

कुल मिलाकर, गाजियाबाद में तलवार बांटने की घटना ने कानून, आत्मरक्षा, सांप्रदायिक तनाव और पुलिस कार्रवाई के बीच संतुलन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां संगठन अपने कदम को आत्मरक्षा की तैयारी और “प्रतिक्रिया” के रूप में पेश कर रहा है, वहीं कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन पर है और तलवारों के सार्वजनिक वितरण को लेकर कानूनी कार्रवाई जारी है।

Gulzar Ahmad