घने कोहरे से थमी ट्रेनें, 15–20 दिन शीतलहर से कांपेगा मध्यप्रदेश

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घने कोहरे से थमी ट्रेनें, 15–20 दिन शीतलहर से कांपेगा मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में घना कोहरा, शीतलहर और बारिश के आसार

मध्यप्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। रात के तापमान में कुछ जगहों पर बढ़ोतरी के बावजूद दिन के समय सर्दी का असर और तेज हो गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा, शीतलहर और कहीं-कहीं हल्की बारिश की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है।

कोहरे की चपेट में आधा प्रदेश, ट्रेनें घंटों लेट

शनिवार सुबह भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सीधी, धार, गुना, रायसेन, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, देवास, दमोह, मंडला, सागर, सतना, श्योपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा और खजुराहो समेत कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। भोपाल में सीजन में पहली बार सुबह करीब 9 बजे तक धूप नहीं निकली। घने कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार भी धीमी हो गई और कुछ ट्रेनें कई घंटों तक देरी से चलने की स्थिति में रहीं।

अगले दिनों तक घना कोहरा, उसके बाद कड़ाके की ठंड

मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन तक कई जिलों में घना कोहरा छाया रहने की संभावना है। इसके बाद प्रदेश में तेज सर्दी और कड़ाके की ठंड का दौर मजबूत होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले शुक्रवार को भी आधे से ज्यादा प्रदेश में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा दर्ज किया गया था और 15 शहरों में दिन का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

जनवरी में 15–20 दिन शीतलहर की संभावना

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि इस बार दिसंबर में प्रदेश में कहीं भी बारिश नहीं हुई और आसमान साफ रहा। भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में 15 से 16 दिन तक शीतलहर चली। उनके अनुसार जनवरी में भी ऐसा ही मौसम बने रहने के आसार हैं और इस महीने 15 से 20 दिन तक शीतलहर चल सकती है। वर्ष के पहले दिन ग्वालियर में हल्की बारिश दर्ज हुई, जबकि भोपाल और इंदौर में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। कड़ाके की ठंड का मुख्य दौर जनवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर महीने के अंत तक बने रहने का अनुमान है।

कई शहरों में गिरा रात का पारा, पचमढ़ी सबसे ठंडा

प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि कुछ स्थानों पर मामूली बढ़ोतरी भी हुई। ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 7.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि भोपाल में 11 डिग्री, इंदौर में 12.6 डिग्री, उज्जैन में 13.3 डिग्री और जबलपुर में 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शिवपुरी में 6 डिग्री, दतिया में 6.6 डिग्री, राजगढ़ में 8.2 डिग्री, मंडला में 8.9 डिग्री और रतलाम में 9.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकांश अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।

4 और 5 जनवरी के लिए कोहरे का अलर्ट

मौसम विभाग ने 4 जनवरी को ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा, मऊगंज, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, सिंगरौली, सीधी, शहडोल और उमरिया में कोहरे का अलर्ट जारी किया है। 5 जनवरी को भी ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में कोहरे का अधिक प्रभाव देखने की संभावना जताई गई है।

नवंबर–दिसंबर में रिकॉर्ड सर्दी, जनवरी में भी कड़ाके की ठंड की आशंका

इस बार नवंबर और दिसंबर के महीनों में मध्यप्रदेश में सर्दी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि जनवरी में भी इसी तरह कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी में पहले भी प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान माइनस के आसपास पहुंच चुका है और इस बार भी तेज सर्दी, घने कोहरे और लगातार चलने वाली शीतलहर की स्थिति बन सकती है।

जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ से बढ़ रही ठंड

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदेश में ठंड बढ़ने की एक प्रमुख वजह जेट स्ट्रीम है। यह लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवाओं की पट्टी है, जिसकी रफ्तार इस बार करीब 285 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह जेट स्ट्रीम इस समय देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ उत्तर के मैदानी इलाकों की ठंडी हवा जब मध्यप्रदेश तक पहुंचती है, तो ठंड और बढ़ जाती है। यह स्थिति पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर और तेज हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ दोनों एक साथ प्रभावी होते हैं, तो सर्दी का प्रभाव सामान्य से कहीं अधिक हो जाता है, जो इस समय देखा जा रहा है।

ठंड के लिए दिसंबर–जनवरी सबसे अहम महीने

मौसम विभाग का कहना है कि जैसे जून से सितंबर के बीच मानसून के चार महीनों में मुख्य बारिश जुलाई और अगस्त में होती है, वैसे ही ठंड के लिए दिसंबर और जनवरी सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं दो महीनों में उत्तर भारत से आने वाली ठंडी और बर्फीली हवाएं मध्यप्रदेश में अधिक मात्रा में पहुंचती हैं, जिससे तापमान में तेज गिरावट दर्ज होती है और सर्द हवाएं चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं।

जनवरी में बारिश का ट्रेंड और पश्चिमी विक्षोभ का असर

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जनवरी में प्रदेश के कई जिलों में मावठा (जनवरी की बारिश) भी दर्ज होता है। पिछले साल भी कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार भी साल के पहले दिन से ही कुछ हिस्सों में बादल छाए रहे और ग्वालियर में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

भोपाल में जनवरी की सर्दी और बारिश के रिकॉर्ड

राजधानी भोपाल में जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड के साथ दिन में कभी-कभी गर्मी का एहसास और बारिश का मिश्रित ट्रेंड देखा गया है। 18 जनवरी 1935 को यहां न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो रिकॉर्ड है। वहीं 26 जनवरी 2009 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 10 वर्षों में से 7 साल जनवरी में बारिश हो चुकी है। 6 जनवरी 2004 को 24 घंटे में सबसे अधिक 2 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि जनवरी 1948 में कुल मासिक 3.8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है।

इंदौर में माइनस तापमान और भारी बारिश के आंकड़े

इंदौर में जनवरी के महीने में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में दर्ज हो चुका है। 16 जनवरी 1935 को यहां न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इंदौर का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 27 जनवरी 1990 को दिन का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश के मामले में 6 जनवरी 1920 को 24 घंटे में 3 इंच से अधिक पानी गिरा था और उसी वर्ष जनवरी में कुल 4 इंच मासिक बारिश रिकॉर्ड की गई थी।

जबलपुर: तीखी सर्दी और जनवरी की बारिश

जबलपुर में भी जनवरी के महीने में तीखी सर्दी और बारिश का ट्रेंड रहा है। 7 जनवरी 1946 को न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो रिकॉर्ड है। वहीं, 7 जनवरी 1973 को अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 24 जनवरी 1919 को 24 घंटे में 2.5 इंच बारिश दर्ज हुई और उसी वर्ष जनवरी में कुल 8 इंच से अधिक मासिक बारिश हुई थी।

ग्वालियर–चंबल सबसे ठंडा, लगातार रिकॉर्ड बनते रहे

उत्तरी हवाओं के सीधे प्रभाव के कारण ग्वालियर–चंबल क्षेत्र प्रदेश के सबसे ठंडे हिस्सों में गिना जाता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड लंबे समय से देखा जाता रहा है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 24 जनवरी 1954 को यहां रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वर्ष 2014 से 2024 के बीच 9 वर्षों में जनवरी में बारिश दर्ज की गई। 8 जनवरी 1926 को 24 घंटे में 2.1 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जबकि 1948 में जनवरी की कुल मासिक बारिश 3.1 इंच रही थी।

उज्जैन में शून्य डिग्री तक गिरा तापमान

उज्जैन पर भी उत्तरी हवा का खासा असर रहता है, जिससे यहां भी कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को यहां न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। पिछले 10 वर्षों में जनवरी के दौरान तापमान 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। बारिश के लिहाज से 11 जनवरी 1987 को 24 घंटे में सबसे अधिक सवा इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जबकि 1994 में कुल मासिक 2.2 इंच बारिश दर्ज की गई।

निष्कर्ष: जनवरी में ठंड और कोहरे से सतर्क रहने की जरूरत

मौसम विभाग और विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, मध्यप्रदेश में जनवरी के महीने में घना कोहरा, शीतलहर और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच ठंड का असर पूरे महीने मजबूत रहने का अनुमान है। लोगों को यात्रा और दैनिक गतिविधियों की योजना बनाते समय कोहरे, कम विजिबिलिटी और कड़ाके की ठंड को ध्यान में रखकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

Adarsh Chaurasiya