ग्वालियर में जनदरबार: अनुपस्थित अधिकारी को नोटिस, सीवर-गंदे पानी की शिकायतों के निराकरण के आदेश

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ग्वालियर में जनदरबार: अनुपस्थित अधिकारी को नोटिस, सीवर-गंदे पानी की शिकायतों के निराकरण के आदेश

ग्वालियर जनदरबार में अनुपस्थित अधिकारी को नोटिस, सीवर-गंदे पानी की शिकायतों के निराकरण के आदेश

जनदरबार में शिकायतों की सुनवाई

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक-16 (जीवाजीगंज) में जन-समस्या निवारण दरबार लगाया गया। क्षेत्र के लोग सीवर, पीने के पानी और गंदे पानी समेत अन्य समस्याएं लेकर पहुंचे। निगम आयुक्त संघ प्रिय ने मौके पर पहुंचकर लोगों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के तत्काल निराकरण के निर्देश दिए।

अनुपस्थित अधिकारी को नोटिस

जनदरबार में शिकायतों की सुनवाई के दौरान आयुक्त को एक अधिकारी अनुपस्थित मिला। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारी को दो घंटे में उपस्थित होकर जवाब देने का नोटिस जारी किया। आयुक्त ने कहा कि निर्धारित समय में उपस्थित नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

तीन महीने से आ रहा गंदा पानी

सीवर और गंदे पानी की शिकायत लेकर पहुंचे तेजस सिंह राजपूत ने बताया कि उनके क्षेत्र में पिछले तीन महीने से 8 इंच की पाइपलाइन में गंदा पानी आ रहा है। उन्होंने कई बार वार्ड स्तर पर शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। हर बार जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें लौटा दिया गया। जनदरबार में आयुक्त ने उनकी शिकायत सुनी और संबंधित अधिकारी को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए।

अभियान 8 जनवरी 2027 तक

निगम आयुक्त संघ प्रिय ने बताया कि मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 7 अगस्त 2026 से 8 जनवरी 2027 तक विभिन्न क्षेत्रों में जनसमस्या निवारण के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। नगर निगम ने हर शुक्रवार को अलग-अलग क्षेत्रों में अधिकारियों की मौजूदगी में जनदरबार लगाने का रोस्टर तैयार किया है। शिविरों में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों का निराकरण किया जाएगा। पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनदरबार में आने वाली शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

L. N. Bhargava