हेडिंग (भाजपा में “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” का नया प्रयोग.. अनुभव.. युवा नेतृत्व और संगठन की नई रणनीति) (सवाल दर सवाल ) राकेश अग्निहोत्री..

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हेडिंग 
(भाजपा में “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” का नया प्रयोग.. अनुभव.. युवा नेतृत्व और संगठन की नई रणनीति) (सवाल दर सवाल ) राकेश अग्निहोत्री..

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को “राष्ट्रीय संगठक (वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क)” नियुक्त किया जाना महज संगठनात्मक फैसला नहीं माना जा रहा.. इसे भाजपा की बदलती राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है.. खास बात यह है कि यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब नितिन नवीन की पूरी राष्ट्रीय टीम.. राष्ट्रीय पदाधिकारी और कार्यसमिति का स्वरूप अभी सामने आना बाकी है.. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भाजपा इस नई व्यवस्था के जरिए क्या संदेश देना चाहती है.. भाजपा लंबे समय से खुद को कैडर आधारित पार्टी के रूप में पेश करती रही है.. जहां बूथ स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक कार्यकर्ता संस्कृति उसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है.. लेकिन समय के साथ जब नेतृत्व की नई पीढ़ी सामने आती है तब अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन की चुनौती भी सामने आती है.. पुराने नेताओं और लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका क्या होगी.. उन्हें किस रूप में सक्रिय रखा जाएगा.. और नई पीढ़ी के नेतृत्व के साथ उनका समन्वय कैसे बनेगा.. यही सवाल इस नियुक्ति के बाद चर्चा में हैं.. “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” को सिर्फ सम्मानजनक पद नहीं.. बल्कि संगठनात्मक सेतु के रूप में भी देखा जा रहा है.. नाम में मौजूद “संपर्क” शब्द संकेत देता है कि वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को संवाद.. फीडबैक और संगठनात्मक मार्गदर्शन की प्रक्रिया से सक्रिय रूप से जोड़े रखने की मंशा हो सकती है.. यानी भाजपा यह संदेश देती दिख सकती है कि अनुभव को किनारे नहीं किया जाएगा.. बल्कि उसे नई संरचना के भीतर भूमिका दी जाएगी.. इस नियुक्ति की तुलना भाजपा के पुराने “मार्गदर्शक मंडल” से भी हो रही है.. 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद लालकृष्ण आडवाणी.. मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया था.. उस समय विपक्ष ने इसे वरिष्ठ नेताओं को सम्मानजनक दूरी पर रखने की रणनीति बताया था.. जबकि भाजपा ने इसे अनुभव का संस्थागत सम्मान कहा था.. हालांकि मौजूदा व्यवस्था में एक फर्क नजर आता है.. मार्गदर्शक मंडल अपेक्षाकृत प्रतीकात्मक माना गया.. जबकि “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” अधिक सक्रिय और संवाद आधारित भूमिका की ओर संकेत करता दिख रहा है.. राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह नियुक्ति युवा नेतृत्व और वरिष्ठ अनुभव के बीच संतुलन बनाने की कवायद भी हो सकती है.. भाजपा ने हाल के वर्षों में अपेक्षाकृत युवा चेहरों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है.. ऐसे में पार्टी के भीतर यह चुनौती भी रहती है कि पीढ़ीगत बदलाव असंतोष में न बदले.. नितिन नवीन जैसे अपेक्षाकृत युवा अध्यक्ष के सामने संगठनात्मक ऊर्जा बनाए रखने.. वरिष्ठ नेताओं का विश्वास कायम रखने और 2029 की तैयारी को मजबूत करने जैसी चुनौतियां होंगी.. ऐसे में “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” जैसी भूमिका संवाद और विश्वास निर्माण का माध्यम बन सकती है.. इसे मोदी–अमित शाह मॉडल की राजनीतिक दूरदर्शिता से जोड़कर भी देखा जा रहा है.. भाजपा की राजनीति में पिछले एक दशक में यह साफ दिखा है कि पार्टी ने पीढ़ी परिवर्तन को अचानक टकराव के बजाय योजनाबद्ध बदलाव के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की.. नई पीढ़ी को नेतृत्व देना.. लेकिन अनुभव को पूरी तरह अलग न करना.. यही भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना गया.. इस नजरिए से देखें तो यह संगठन की री-इंजीनियरिंग का संकेत भी हो सकता है.. राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से युवाओं.. रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर लगातार राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिशों के बीच भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं.. बल्कि कार्यकर्ता आधार को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखने की भी है.. ऐसे में भाजपा की रणनीति यह हो सकती है कि चेहरे युवा दिखें.. लेकिन संगठनात्मक संरचना अनुभवी हाथों से भी संचालित होती रहे.. इस फैसले का असर राज्यों तक दिखने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.. मध्य प्रदेश इसका दिलचस्प उदाहरण बन सकता है.. शिवराज सिंह चौहान के केंद्र में जाने के बाद भाजपा ने डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर नई पीढ़ी के नेतृत्व का संकेत दिया.. वहीं संगठन में हेमंत खंडेलवाल सरकार और संगठन के तालमेल का चेहरा बनकर उभरे.. राज्य में कई ऐसे वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से संगठन का हिस्सा रहे हैं.. लेकिन मंत्रीमंडल.. निगम-मंडलों या राजनीतिक नियुक्तियों में समायोजन की प्रतीक्षा में हैं.. ऐसे में यदि राष्ट्रीय स्तर पर “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” का मॉडल प्रभावी होता है.. तो प्रदेश स्तर पर भी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए संवाद या सलाहकारी मंच की चर्चा तेज हो सकती है.. फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा देशभर में जनसंपर्क.. सामाजिक सरोकार और कार्यकर्ता आधारित कार्यक्रमों को तेज कर रही है.. ऐसे समय में यह नियुक्ति संकेत देती दिखाई देती है कि भाजपा केवल सत्ता संचालन नहीं.. बल्कि संगठनात्मक संरचना को भी भविष्य की राजनीति के अनुरूप ढालने में जुटी है.. नागेंद्र नाथ त्रिपाठी की नियुक्ति की वास्तविक अहमियत आने वाले समय में तब ज्यादा स्पष्ट होगी.. जब नितिन नवीन की पूरी टीम.. राष्ट्रीय कार्यसमिति और राज्यों में संगठनात्मक बदलाव की तस्वीर सामने आएगी.. फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि भाजपा शायद “युवा नेतृत्व.. वरिष्ठ मार्गदर्शन” के संतुलन को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है.. बॉक्स इंट्रो (मार्गदर्शक मंडल के बाद भाजपा का“वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” मॉडल?) केंद्र में मोदी सरकार की अस्तित्व में आने के बाद मार्गदर्शक मॉडल खूब surkhiya बना था, अब जब मोदी सरकार अपने कार्यकाल के 12 साल पूरी कर रही और राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर चेहरा युवा नितिन नवीन तब अचानक एक नया मॉडल वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क नई व्यवस्था सामने आई है.. मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा का यह नया संगठनात्मक संकेत सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं माना जा रहा.. मध्य प्रदेश में घोषित घोषित बीजेपी का मार्गदर्शक मंडल नहीं बना था,.. यहां अनुभव और युवा वरिष्ठ और ऊर्जावान के साथ पीढ़ी बदलने की कोशिश संगठन स्तर पर लगभग पूरी कर ली गई लेकिन सरकार में यह फार्मूला अभी आगे नहीं बढ़ सका.. इस नए मॉडल की गूंज भोपाल तक सुनाई दे सकती है, क्योंकि राज्य में भी नेतृत्व परिवर्तन, पीढ़ीगत बदलाव और संगठन–सरकार के संतुलन की राजनीति साथ-साथ चल रही है.., शिवराज सिंह चौहान के केंद्र में जाने के बाद पार्टी ने नई पीढ़ी के चेहरे के रूप में डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया.. लेकिन कुछ मंत्री उनसे वरिष्ठ उनके सहयोगी बने गए..वहीं संगठन में हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने सरकार और संगठन के बीच नई केमिस्ट्री का संदेश दिया.. राजनीतिक चर्चा यह भी रही कि हेमंत खंडेलवाल को मोहन यादव के साथ बेहतर समन्वय और संगठनात्मक तालमेल को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया.. अब जब मोहन मंत्रिमंडल का पुनर्गठन और हेमंत की नई टीम के एक्सरसाइज पूरी होने के बाद निर्णय फसलों में तब्दील होकर कभी भी सामने आ सकते हैं.. तो वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क का मध्य प्रदेश फोरम और मॉडल आखिर कितना जरूरी और क्या संदेश देगा.. चुनौती सिर्फ नेतृत्व बदलने की नहीं है.. असली सवाल यह है कि वरिष्ठ, अनुभवी और लंबे समय से सक्रिय भाजपा नेताओं की भूमिका क्या होगी?क्यों अहम हो सकता है यह मॉडल?मोहन सरकार में कई ऐसे मंत्री हैं जो अनुभव और उम्र के पैमाने पर मुख्यमंत्री से वरिष्ठ माने जाते हैं.., वहीं कई दिग्गज चेहरे मंत्रीमंडल में जगह नहीं पा सके या निगम-मंडलों और राजनीतिक नियुक्तियों में समायोजन का इंतजार कर रहे हैं..ऐसे में यदि भाजपा “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” जैसी संरचना को प्रदेश स्तर तक लाती है तो उसके कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं.. सबसे पहले बात असंतोष प्रबंधन का राजनीतिक मॉडल .. जो नेता मंत्री नहीं बने, संगठन में जगह नहीं मिली या नियुक्तियों की प्रतीक्षा में हैं, उन्हें एक सम्मानजनक और सक्रिय भूमिका देकर जोड़े रखने की रणनीति बन सकती है, जिस पर मध्य प्रदेश बीजेपी आगे भी बढ़ चुकी है.. दूसरा अनुभव बनाम नई पीढ़ी का संतुलन..,मोहन यादव नई पीढ़ी के नेतृत्व का चेहरा हैं, लेकिन भाजपा यह संदेश देना चाहेगी कि अनुभव को दरकिनार नहीं किया जाएगा.. यानी.“नई कमान, लेकिन पुराना अनुभव साथ” तीसरा सरकार और संगठन के बीच संवाद तंत्र.. हेमंत खंडेलवाल की प्रस्तावित टीम और मोहन सरकार के बीच यदि वरिष्ठ नेताओं की सलाहकारी भूमिका बनती है तो यह संगठन और सत्ता के बीच फीडबैक मैकेनिज्म की तरह भी काम कर सकती है.. एक और संदेश मंत्रिमंडल पुनर्गठन से पहले संकेत?..राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा है कि मोहन यादव को मंत्रिमंडल विरासत में मिला और समय आने पर पुनर्गठन संभव है.. यदि ऐसा होता है तो हर नेता को मंत्री बनाना संभव नहीं होगा, ऐसे में वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क जैसी अवधारणा कई महत्वाकांक्षाओं को राजनीतिक स्पेस देने का माध्यम बन सकती है..बड़ा सवालभाजपा की प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान अभी बाकी है, निगम-मंडल नियुक्तियां भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं,ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा किक्या मध्य प्रदेश में भी “वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क” का कोई प्रदेश मॉडल उभरेगा?क्या हेमंत खंडेलवाल की टीम में वरिष्ठों के लिए अलग भूमिका तय होगी? और क्या मोहन सरकार के संभावित मंत्रिमंडल पुनर्गठन के समानांतर संगठन में संतुलन साधने की कवायद तेज होगी? मध्य प्रदेश में यह मॉडल एक संदेश की तरह पढ़ा जा सकता है.. “पीढ़ी परिवर्तन होगा, लेकिन अनुभव को साथ लेकर” यानी भाजपा शायद यह बताना चाहती है कि नई राजनीति का चेहरा भले बदल जाए, लेकिन पुराने संगठनात्मक अनुभव की भूमिका खत्म नहीं होगी..

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